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स्वास्थ्य केंद्र के बेंच पर तीन घंटे तक तड़पती रही गर्भवती महिला, जन्म के बाद नवजात की मौत

Mon, 26 Jul 2021 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jul 2021 12:03 AM IST
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The pregnant woman was suffering for three hours on the bench of the health center, the newborn died after birth
नागरिक अस्पताल पहुंचे परिजन और मृत नवजात को लेकर खड़ी महिला। संवाद - फोटो : Jind
गांव मुआना में मानवता उस वक्त तार-तार हो गई जब एक गर्भवती महिला को डिलिवरी के लिए गांव के स्वास्थ्य केंद्र में न तो डॉक्टर मिला, न न और न ही कोई स्टाफ। फोन करने के बावजूद एंबुलेंस तक समय पर नहीं पहुंची। परिणाम यह हुआ कि गर्भवती ने अस्पताल के बेंच पर तीन घंटे दर्द से तड़पते हुए जिंदगी और मौत से जूझती रही। आखिकार बेंच पर ही उसकी डिलीवरी हो गई। पैदा हुए बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।
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मिली जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर में मुआना गांव के रहने वाले कुलदीप की पत्नी कृष्णा को प्रसव की तकलीफ हुई। आनन-फानन में कुलदीप पत्नी को डिलिवरी के लिए गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर ले गया। जब वह वहां पहुंचा तो कोई डॉक्टर, नर्स या स्वास्थ्य कर्मी नहीं मिला। वहां पर केवल दो सफाई कर्मचारी मौजूद थे। उनसे नर्स का नंबर लेकर फोन किया गया तो उसने कहा कि उनके पास सोमवार दोपहर दो बजे तक कोई समय नहीं है। उसके बाद एंबुलेंस को फोन किया गया तो वह भी समय से मौके पर नहीं पहुंची। गर्भवती महिला को अस्पताल के बेंच पर लिटाया गया। वह प्रसव दर्द से करीब तीन घंटे तक तड़पती रही। लेकिन अस्पताल में कोई स्वास्थ्य अधिकारी व कर्मचारी नहीं पहुंचा। आखिरकार तीन घंटों की जद्दोजहद के बाद महिला ने बेंच पर ही बच्चे को जन्म दे दिया, लेकिन नवजात की मौत हो गई। करीब तीन बजे महिला को उप स्वास्थ्य केंद्र मुआना से सफीदों के नागरिक अस्पताल में लाकर भर्ती करवाया गया। इस दौरान मुआना गांव से पीड़ित परिवार के लोग व काफी तादाद में ग्रामीण सफीदों के नागरिक अस्पताल पहुंच गए। परिवार व ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर रोष था। परिवार के लोगों का आरोप था कि उप स्वास्थ्य केंद्र मुआना के डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मचारियों की लापरवाही के कारण उनके नवजात बच्चे की जान गई है। बच्चे की मां जिंदगी और मौत से जूझ रही है। अगर मौके पर डॉक्टर होता तो उनके बच्चे की जान बच सकती थी। लापरवाही के कारण ही उनके जच्चा की हालत गंभीर बनी हुई है। परिवार की सरकार व प्रशासन से मांग थी कि ड्यूटी पर तैनात डाक्टरों, नर्सों व स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए।
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वहीं ग्रामीणों का कहना था कि गांव मुआना जिला जींद का सबसे बड़ा गांव जरूर है। लेकिन इस गांव में कोई सुविधा नहीं है। गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र नाम का है। यहां न तो डॉक्टर आते हैं और न ही स्वास्थ्य कर्मी। ग्रामीणों का कहना था कि सरकार हर गांव में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की बात करती है, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मांग की कि गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाए। इसके साथ ही इस घटनाक्रम के पीछे आरोपी हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। सिविल सर्जन डॉ. मनजीत ने का कहना है कि इस मामले की जांच करवाकर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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