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Jind News: कविता से केंद्रीय गृहमंत्री पर किया कटाक्ष
Sun, 22 Dec 2024 11:49 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 22 Dec 2024 11:49 PM IST
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22जेएनडी03: शिव कालोनी स्थित अक्षर भवन में बैठक करते हुए जनवादी लेखक संघ के सदस्य।
जींद। जनवादी लेखक संघ जींद की ओर से रविवार को अक्षर भवन शिव कॉलोनी में विचार एवं कविता गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता संघ के उपाध्यक्ष सोहनदास ने की। गोष्ठी में डॉ. कपिल भारद्वाज, रामफल दहिया, आजाद सिंह जुलानी, मंगतराम शास्त्री, चमन चोहान, प्रवेश कुमार, तिलक राज मिगलानी, पूजन आर्य, तरसेम गोयल एवं बिंद्र सिंह ने भाग लिया।
गोष्ठी में उपस्थित सदस्यों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से बाबा साहेब आंबेडकर को एक फैशन बताए जाने पर उनकी निंदा की। सभी ने एकमत से कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने केवल बाबा साहेब का मजाक उड़ाया है, बल्कि भारत के लोकतंत्रात्मक ढांचे, धर्मनिरपेक्षता एवं संप्रभुता संपन्न प्रतिष्ठा का मजाक उड़ाया है। बाबा साहेब एक फैशन नहीं, करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हम जनवादी लेखक संघ के मंच से गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं। गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने कविता पाठ किया। आजाद जुलानी ने एक गीत पढ़ा जिसकी बानगी देखिए। बढ़ रही हैं नफरतें, नफरतों का दौर है। आदमी कल और था आज अब कुछ और है। कपिल भारद्वाज ने वेज बिरयानी शीर्षक से एक व्यंग्य कविता पढ़ी। इसकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं, लोकतंत्र है और वेज बिरयानी का विज्ञापन है, बाकी सब असत्य है इस महादेश में। मंगतराम शास्त्री ने कही कि बता इस दौर के नेता और कितणा गिरैंगे जो आंबेडकर नै भी कुपढ़ फैशन बतावैं सैं। कदे तै था उरै भगवान, तो पर कद मिली शिक्षा, गरीब्बां नै तो बाबा साबेह ए भगवान भावैं सैं। प्रवेश कुमार ने भी काली सुबह शीर्षक से कविता पढ़ी। फरवरी के प्रथम सप्ताह में जिला सम्मेलन करने का फैसला लिया गया।
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गोष्ठी में उपस्थित सदस्यों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से बाबा साहेब आंबेडकर को एक फैशन बताए जाने पर उनकी निंदा की। सभी ने एकमत से कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने केवल बाबा साहेब का मजाक उड़ाया है, बल्कि भारत के लोकतंत्रात्मक ढांचे, धर्मनिरपेक्षता एवं संप्रभुता संपन्न प्रतिष्ठा का मजाक उड़ाया है। बाबा साहेब एक फैशन नहीं, करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हम जनवादी लेखक संघ के मंच से गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हैं। गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने कविता पाठ किया। आजाद जुलानी ने एक गीत पढ़ा जिसकी बानगी देखिए। बढ़ रही हैं नफरतें, नफरतों का दौर है। आदमी कल और था आज अब कुछ और है। कपिल भारद्वाज ने वेज बिरयानी शीर्षक से एक व्यंग्य कविता पढ़ी। इसकी कुछ पंक्तियां इस प्रकार हैं, लोकतंत्र है और वेज बिरयानी का विज्ञापन है, बाकी सब असत्य है इस महादेश में। मंगतराम शास्त्री ने कही कि बता इस दौर के नेता और कितणा गिरैंगे जो आंबेडकर नै भी कुपढ़ फैशन बतावैं सैं। कदे तै था उरै भगवान, तो पर कद मिली शिक्षा, गरीब्बां नै तो बाबा साबेह ए भगवान भावैं सैं। प्रवेश कुमार ने भी काली सुबह शीर्षक से कविता पढ़ी। फरवरी के प्रथम सप्ताह में जिला सम्मेलन करने का फैसला लिया गया।

22जेएनडी03: शिव कालोनी स्थित अक्षर भवन में बैठक करते हुए जनवादी लेखक संघ के सदस्य।
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