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चेयरमैन जस्टिस प्रीतमपाल की अगुवाई में एनजीटी टीम पहुंची जींद

Sat, 28 Dec 2019 11:21 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2019 11:21 PM IST
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The NGT team led by justice Pritam Pal reached Jind
लघु सचिवालय में अधिकारियों की बैठक लेते जस्टिस प्रीतमपाल। - फोटो : Jind
एनजीटी की टीम ने चेयरमैन जस्टिस प्रीतमपाल की अगुवाई में जींद का दौरा किया। उन्होंने दोपहर 12 से लेकर दो बजे तक लघु सचिवालय में अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद वे सफीदों के एसटीपी की जांच के लिए निकल गये। पत्रकारों से बातचीत के दौरान जस्टिस प्रीतमपाल ने कहा कि पोल्ट्री फार्म में निकलने वाले गंद के समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। जिले में कचरा प्रबंधन को लेकर विशेष विचार विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए लोगों की भागीदारी सबसे ज्यादा जरूरी है। जिला प्रशासन व जनता साथ मिलकर चलेंगे तो ही इस काम में सफलता हासिल हो पाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी शहर में कचरा या साफ-सफाई नहीं है तो लोग इसके बारे में अधिकारियों को सूचना दें। इसके बाद अधिकारियों को चाहिए कि वे इस पर तुरंत कार्रवाई करें। सभी साथ मिलकर चलेंगे तभी शहर साफ रह सकेगा। बैठक में मुर्गी फार्म संचालकों की शिकायत सामने आई है। इसके लिए मौके पर जा कर जांच की जाएगी कि किस तरह के प्रबंध मुर्गी फार्म संचालकों द्वारा किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अभी शहर में यह समस्या सामने आ रही है कि डंपिंग साइट से कूड़ा प्रबंध किस तरह से किया जाता है। सूखे व गीले कूड़े को अलग-अलग डाला जाए। जिससे कूड़े से खाद बनाई जा सकें, जिससे वेस्ट को एनर्जी कार्यों में तबदील किया जा सके। तभी शहर की सफाई की व्यवस्था में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि शहर में अन्य जगहों पर भी डपिंग साइट बनाई जाएगी। सरकार इस पर काम कर रही है। सभी डपिंग साइट के चारो ओर दिवार निकाली जाएगी। डंपिंग साइट पर कूड़ा डालने के बाद मिट्टी भी डाली जाएगी। जिससे आसपास में गंद नहीं जाए।
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टायर जलाने की मामले में एक सप्ताह में होगी जांच
पत्रकारों ने जब जस्टिस प्रीतमपाल से पूछा कि जींद जिले में कई ऐसी फैक्ट्रियां हैं जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पैमाने पर खरा नहीं उतरी। लोगों द्वारा उनकी कई बार शिकायत की जाती कि इन फैक्ट्रियों से बड़े पैमाने पर तेल निकाला जाता है और शिकायत देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती तो उन्होंने कहा कि यह मामला प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड के संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा मामला है तो इस पर कार्रवाई होगी। फैक्ट्रियों के सैंपल लिए जाएंगे और जो फैक्ट्री पैमाने पर खरा नहीं उतरती उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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एक्यूआई बढ़ने के कई कारण, दिल्ली में स्कोडा कंपनी वालों पर लगा 500 करोड़ रुपये जुर्माना
लगातार बढ़ रहे एक्यूआई पर प्रीतमपाल ने कहा कि इस पर नियंत्रण पाने के लिए लोगों को चाहिए कि लोग कूड़ा नहीं जलाएं। दिल्ली में एक्यूआई खराब होने पर कहा कि इसका मुख्य कारण यातायात वाहनों का ज्यादा संख्या में होना है। अमेरिका में स्कोडा गाड़ी से निकलने वाले कार्बन गैस प्रदूषण जांच कंट्रोल बोर्ड के पैमाने पर खरा नहीं उतरा और उस पर एक हजार करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। जब यह मामला दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के संज्ञान में आया और यहां पर इसकी जांच की गई तो वे भी पैमाने पर खरी नहीं उतरी। दिल्ली में भी स्कोडा गाड़ी कंपनी वालों पर 500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस पर जब कंपनी वाले गाड़ियों को वापस लेकर जाने की बात कहने लगे तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने पहले जुर्माने के तौर पर 500 करोड़ रुपये भरने के लिए कहा।
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31 मार्च 2020 तक बदल जाएगा शहर का नक्शा
शहर की आबादी के हिसाब से नगर परिषद के पास सफाई कर्मचारियों की संख्या काफी कम है। शहर की आबादी लगभग तीन लाख है। वहीं नगर परिषद के पास केवल 230 सफाई कर्मचारी हैं, जबकि शहर की आबादी के हिसाब से 600 कर्मचारियों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस पर काम किया जाएगा। उम्मीद रहेगी कि 31 मार्च 2020 तक शहर का नक्शा ही बदल जाएगा। इसके लिए अभी काफी काम करने की जरूरत है।
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