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Jind News: बेसहारा पशुओं को रखने के लिए नप के पास जगह ही नहीं
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01जेएनडी05: शहर के सब्जी मंडी रोड पर सड़क पर वाहन चालकों के लिए खतरा बनकर बैठा बेसहारा पशु। संव
जींद। शहर के लोगों को सड़क हादसों से बचाने के लिए नगर परिषद ने कई बार बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया। इस अभियान के तहत हर बार इन पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ा गया। पिछले 10 दिन में 200 पशुओं को नप ने पकड़कर गोशाला में पहुंचाया है।
शहर में सड़काें पर घूमने वाले बेसहारा गोवंश की संख्या हजारों में है, जबकि तीन हजार के आसपास गोवंश शहर की गोशालाओं में भी बंद हैं। शाम के समय शहर की सड़कों पर सैंकड़ों की संख्या में गोवंश नजर आते हैं। इनके कारण वाहन चालकों या फिर रेहड़ी व फड़ी लगाने वालों को हादसों का डर रहता है।
बीते दो वर्ष पहले शहर की सड़कों पर कई हादसे हुए थे। इनके बाद नप ने बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ने का अभियान भी तेज किया था। पिछले महीने ही शहर की एक गोशाला ने नप को 200 पशु लेने की स्वीकृति दी थी। इसके बाद शहर में नप के कर्मचारियों ने इन पशुओं को पकड़ना शुरू कर दिया और इनको शहर की नंदीशाला में पहुंचाया।
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अब बेसहारा पशुओं को पकड़ना नगर परिषद के लिए मुश्किल बना हुआ है। शहर की गोशालाओं में पशुओं की संख्या स्थान के अनुसार लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन शहर की सड़कों पर पशुओं की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही।
बाक्स
आसपास के क्षेत्रों से छोड़े जा रहे गोवंश
नगर परिषद ने कई बार अभियान चलाकर गोवंश को पकड़कर नंदीशाला में छोड़ा है, लेकिन जींद की सीमा से सटे दूसरे क्षेत्रों से गोवंश को शहर के नजदीक छोड़ दिया जाता है। इस कारण आए दिन गोवंश की संख्या शहर में ज्यादा बढ़ रही है। इनको रोकने के लिए भी प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है।
बाक्स
सभी गोशालाओं को गाय रखने के लिए लिखा था पत्र
नगर परिषद ने जिले में चल रही सभी गोशालाओं को पत्र लिखकर सड़कों पर घूम रही गाय को रखने के लिए कई माह पहले पत्र लिखा था। इन गोशालाओं में पहले चरण में गाय को रखा जाएगा। इसमें एक गोशाला की तरफ से नगर परिषद को गाय रखने के लिए सहमति जताई थी। अब इसमें ही 200 बेसहारा पशुओं को पकड़कर भेजा जा रहा है। इसके अलावा अन्य किसी गोशाला ने अभी तक बेसहारा पशुओं को रखने के लिए सहमति नहीं जताई।
बाक्स
चारे की कमी बताकर गोवंश को रखने से किया था मना
छह महीने पहले नंदीशाला और गोशालाओं ने चारे और अन्य व्यवस्था की कमी का हवाला देकर बेसहारा गोवंश लेने से मना कर दिया था। इसके चलते गोवंश को पकड़ने का अभियान रुक गया था।
बाक्स
सरकार की तरफ से पहले गोशालाओं को प्रति गोवंश 150 रुपये सालाना दिए जाते थे, जो बाद में 300 रुपये कर दिए गए थे, लेकिन इस राशि से एक पशु के लिए 10 दिन के चारे की भी व्यवस्था नहीं हो सकती थी।
बाक्स
रात में झुंड बनाकर सड़क पर बैठ जाते हैं गोवंश
शहर में बेसहारा गोवंशों की संख्या बढ़ रही है। रात को गोवंश सड़कों पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं। बारिश का मौसम होने के कारण मच्छर से बचने के लिए यह कॉलोनियों से निकलकर मुख्य मार्गों पर आ जाते हैं।
वर्जन
गोवंश को नंदीशाला में छोड़ने का अभियान फिलहाल चला हुआ। एक गोशाला में 200 पशुओं को रखने की मंजूरी गोशाला की तरफ से मिली थी। इसके बाद अन्य गोशालाओं से पशु रखने के लिए मंजूरी ली जाएगी, ताकि शहर की सड़कों को पशुमुक्त बनाया जा सके।
-सुनील कुमार, सीएसआई नगर परिषद जींद।
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शहर में सड़काें पर घूमने वाले बेसहारा गोवंश की संख्या हजारों में है, जबकि तीन हजार के आसपास गोवंश शहर की गोशालाओं में भी बंद हैं। शाम के समय शहर की सड़कों पर सैंकड़ों की संख्या में गोवंश नजर आते हैं। इनके कारण वाहन चालकों या फिर रेहड़ी व फड़ी लगाने वालों को हादसों का डर रहता है।
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बीते दो वर्ष पहले शहर की सड़कों पर कई हादसे हुए थे। इनके बाद नप ने बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशालाओं में छोड़ने का अभियान भी तेज किया था। पिछले महीने ही शहर की एक गोशाला ने नप को 200 पशु लेने की स्वीकृति दी थी। इसके बाद शहर में नप के कर्मचारियों ने इन पशुओं को पकड़ना शुरू कर दिया और इनको शहर की नंदीशाला में पहुंचाया।
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अब बेसहारा पशुओं को पकड़ना नगर परिषद के लिए मुश्किल बना हुआ है। शहर की गोशालाओं में पशुओं की संख्या स्थान के अनुसार लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन शहर की सड़कों पर पशुओं की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही।
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आसपास के क्षेत्रों से छोड़े जा रहे गोवंश
नगर परिषद ने कई बार अभियान चलाकर गोवंश को पकड़कर नंदीशाला में छोड़ा है, लेकिन जींद की सीमा से सटे दूसरे क्षेत्रों से गोवंश को शहर के नजदीक छोड़ दिया जाता है। इस कारण आए दिन गोवंश की संख्या शहर में ज्यादा बढ़ रही है। इनको रोकने के लिए भी प्रशासन के पास कोई व्यवस्था नहीं है।
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सभी गोशालाओं को गाय रखने के लिए लिखा था पत्र
नगर परिषद ने जिले में चल रही सभी गोशालाओं को पत्र लिखकर सड़कों पर घूम रही गाय को रखने के लिए कई माह पहले पत्र लिखा था। इन गोशालाओं में पहले चरण में गाय को रखा जाएगा। इसमें एक गोशाला की तरफ से नगर परिषद को गाय रखने के लिए सहमति जताई थी। अब इसमें ही 200 बेसहारा पशुओं को पकड़कर भेजा जा रहा है। इसके अलावा अन्य किसी गोशाला ने अभी तक बेसहारा पशुओं को रखने के लिए सहमति नहीं जताई।
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चारे की कमी बताकर गोवंश को रखने से किया था मना
छह महीने पहले नंदीशाला और गोशालाओं ने चारे और अन्य व्यवस्था की कमी का हवाला देकर बेसहारा गोवंश लेने से मना कर दिया था। इसके चलते गोवंश को पकड़ने का अभियान रुक गया था।
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सरकार की तरफ से पहले गोशालाओं को प्रति गोवंश 150 रुपये सालाना दिए जाते थे, जो बाद में 300 रुपये कर दिए गए थे, लेकिन इस राशि से एक पशु के लिए 10 दिन के चारे की भी व्यवस्था नहीं हो सकती थी।
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रात में झुंड बनाकर सड़क पर बैठ जाते हैं गोवंश
शहर में बेसहारा गोवंशों की संख्या बढ़ रही है। रात को गोवंश सड़कों पर झुंड बनाकर बैठ जाते हैं। बारिश का मौसम होने के कारण मच्छर से बचने के लिए यह कॉलोनियों से निकलकर मुख्य मार्गों पर आ जाते हैं।
वर्जन
गोवंश को नंदीशाला में छोड़ने का अभियान फिलहाल चला हुआ। एक गोशाला में 200 पशुओं को रखने की मंजूरी गोशाला की तरफ से मिली थी। इसके बाद अन्य गोशालाओं से पशु रखने के लिए मंजूरी ली जाएगी, ताकि शहर की सड़कों को पशुमुक्त बनाया जा सके।
-सुनील कुमार, सीएसआई नगर परिषद जींद।