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कर्मचारी को लेना होगा जोखिम, नगर परिषद को अब देना पड़ेगा शपथ पत्र

Tue, 21 Sep 2021 11:44 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 21 Sep 2021 11:44 PM IST
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the employee will have to take the risk
: गायों को घेरते टीम के सदस्य। - फोटो : Jind
सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगर परिषद द्वारा दिए गए ठेके की शर्तों में अब बदलाव किया जाएगा। इसके तहत नगर परिषद अभियान में शामिल होने वाले कर्मचारियों से शपथ पत्र लेगा कि वे अपने जोखिम पर काम कर रहे हैं। इसका कारण है 11 दिन पहले बेसहारा पशुओं को पकड़ने के अभियान के दौरान युवक की मौत है। इस मामले में नगर परिषद द्वारा युवक के परिवार को तीन लाख रुपये देने पड़े। ऐसे में नगरपरिषद अब नई शर्तें शामिल कर रहा है।
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गौरतलब है कि नगरपरिषद द्वारा पशुओं को पकड़ने के लिए ठेका दिया गया है। एक पशु पकड़ने पर नगर परिषद ठेकेदार को 486 रुपये का भुगतान करता है। इसी दौरान 11 सितंबर को जब गोहाना रोड पर अभियान चलाया जा रहा था, ठेकेदार का एक कर्मचारी सुनील बाइक की चपेट में आ गया। इसको लेकर परिजनों ने 10 दिन तक धरना दिया और सोमवार रात को नगर परिषद अधिकारियों व संगठनों के बीच सहमति बनी। इसमें नगरपरिषद द्वारा तीन लाख रुपये, ठेकेदार द्वारा तीन लाख रुपये दिए जाएंगे।
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नियमों में किया जाएगा बदलाव
नियमों में बदलाव किया जाएगा। इसके तहत कर्मचारियों ने शपथ पत्र लिए जाएंगे कि वे अपने जोखिम पर काम करेंगे। इसके बाद ही दोबारा पशुओं को पकड़ने का अभियान शुरू किया जाएगा।
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सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगरपरिषद।
अन्ना टीम ने तीन रातों में 190 को नंदीशाला पहुंचायाशहर की सड़कों पर घूम रहे लावारिश पशुओं को पकडने के लिए नगरपरिषद द्वारा दिए गए टेंडर के तहत ठेकेदार द्वारा पांच दिन में करीब 100 गायों व सांड़ों को ही पकड़ा गया। वहीं अन्ना टीम ने अपने स्तर पर तीन रातों को अभियान चलाया और इसमें 190 गोवंश को पकड़ कर नंदीशाला भेज दिया। इससे लोगों को काफी राहत मिली है। वहीं नगरपरिषद का अभियान पिछले 11 दिन से बंद पड़ा है।

दरअसल 11 सितंबर की रात को पशु पकड़ते वक्त हुए हादसे में अभियान में काम कर रहे एक युवक की मौत हो गई थी। इस पर परिवार के लोगों व कुछ संगठनों ने मुआवजे की मांग को लेकर धरना दिया। यह विवाद सोमवार रात को ही निपटा है। ऐसे में नगरपरिषद का अभियान 11 दिन से बंद पड़ा है।
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