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फसल अवशेष जलाने के मामले में जिले को तीन जोन में बांटा

Tue, 25 Aug 2020 11:21 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2020 11:21 PM IST
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The district is divided into three zones in case of burning crop residue
डीसी डॉ. आदित्य दहिया। - फोटो : Jind
फसल अवशेष जलाने से किसानों को रोकने के लिए प्रशासन ने जिले को लाल, पीला और हरा तीन जोन में विभाजित किया है। इसके अलावा धान की कटाई के लिए इस्तेमाल होने वाली कंबाइन के पीछे एसएमएस (स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम) लगाना जरूरी होगा। यदि कोई बिना एसएमएस के कंबाइन चलाते हुए मिला तो उसकी मशीन जब्त कर ली जाएगी।
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डीसी डॉ. आदित्य दहिया ने कहा कि जिन गांवों में पिछले वर्ष फसल अवशेष जलाने की छह से ज्यादा घटनाएं सामने आई हुई हैं उन्हें लाल, पांच तक की घटनाओं वाले गांव को पीला तथा दो से नीचे वाली घटनाओं को हरे जोन में रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इसके लिए लाल व पीले जोन में आने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य सरकार द्वारा कंबाइन के पीछे लगने वाली एसएमएस मशीन पर अधिकतम 56 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल में फसल अवशेष में आग लगाने की घटनाएं लगातार कम हो रही हैं। जिले के किसान इसमें अपना योगदान दें, ताकि जिले में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं शून्य हों।
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सहायक कृषि अभियंता विजय कुंडू ने कहा कि फसल अवशेषों को इन मशीनों का प्रयोग करके छोटे-छोटे टुकड़े करके जमीन में मिला दिया जाए तो भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। जिले में अब तक 256 सीएचसी स्थापित किए जा चुके हैं। इन सीएचसी में उपलब्ध मशीनों को किराये पर लेकर किसान अपने खेत में फसल अवशेषों को अच्छी तरह प्रबंधन कर सकते हैं।
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