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Jind News: श्रद्धालुओं ने शिवालय में पहुंच कर लगाए भोले के जयघोष
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12जेएनडी07-जयंती देवी मंदिर में पूजा करते हुए श्रद्धालु। स्रोत श्रद्धाुल
- फोटो : आजाद नगर के शीतल मंदिर के पास जलभराव।
जींद। शनिवार को सावन माह के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने शिवालय में पहुंच कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और मनोकामनाएं मांगी। सावन माह नौ अगस्त तक चलेगा। इस पवित्र महीने में शिव भक्तों का भगवान शिव की पूजा को लेकर विशेष महत्व है। 23 जुलाई को सावन माह में ही शिवरात्रि मनाई जाएगी, जिसका आध्यात्मिक महत्व और भी अधिक है। भक्त सुबह से ही शिवालयों में उमड़ रहे हैं और भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं।
जयंती देवी मंदिर में शिव भक्तों ने रुद्राभिषेक मंत्र जाप और शिव चालीसा का पाठ कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर के पुजारी पंडित नवीन शास्त्री ने बताया कि सावन माह के पवित्र दिनों में प्रतिदिन सुबह रुद्राभिषेक होगा। मंदिर में भीड़ प्रबंधन के लिए उचित इंतजाम किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में सावन माह शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। पौराणिक मान्यता है कि इस माह में समुद्र मंथन के दौरान निकला हलाहल विष भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। जिससे उनकी भक्ति का महत्व और बढ़ गया।
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सावन में शिव पूजा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। भक्त मानते हैं कि इस दौरान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वहीं सावन माह में वर्षा ऋतु होती है और प्रकृति का शांत, हरित वातावरण शिव की तपस्या और शांति से मेल खाता है। गंगा जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री इस समय आसानी से उपलब्ध होती है।
वहीं सावन माह में शिव भक्त कांवड़ के माध्यम से गंगा जल हरिद्वार से लाकर पैदल यात्रा करते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। यह भक्ति का प्रतीक है। इसलिए सावन माह शिव भक्तों के लिए भक्ति, तप और आध्यात्मिक उत्साह का समय होता है।
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जयंती देवी मंदिर में शिव भक्तों ने रुद्राभिषेक मंत्र जाप और शिव चालीसा का पाठ कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर के पुजारी पंडित नवीन शास्त्री ने बताया कि सावन माह के पवित्र दिनों में प्रतिदिन सुबह रुद्राभिषेक होगा। मंदिर में भीड़ प्रबंधन के लिए उचित इंतजाम किए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म में सावन माह शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। पौराणिक मान्यता है कि इस माह में समुद्र मंथन के दौरान निकला हलाहल विष भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। जिससे उनकी भक्ति का महत्व और बढ़ गया।
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सावन में शिव पूजा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। भक्त मानते हैं कि इस दौरान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूरी करते हैं। वहीं सावन माह में वर्षा ऋतु होती है और प्रकृति का शांत, हरित वातावरण शिव की तपस्या और शांति से मेल खाता है। गंगा जल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री इस समय आसानी से उपलब्ध होती है।
वहीं सावन माह में शिव भक्त कांवड़ के माध्यम से गंगा जल हरिद्वार से लाकर पैदल यात्रा करते हैं और शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। यह भक्ति का प्रतीक है। इसलिए सावन माह शिव भक्तों के लिए भक्ति, तप और आध्यात्मिक उत्साह का समय होता है।