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Jind News: बैंक ने नहीं बताया समय पर बीमा कंपनी का नाम, पांच साल अटका रहा क्लेम

Sat, 20 Sep 2025 02:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 20 Sep 2025 02:39 AM IST
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The bank did not disclose the name of the insurance company on time, leaving the claim pending for five years.
रोहतक। सर्वे के दौरान समय पर बीमा कंपनी का नाम न बताने पर कंसाला की महिला किसान का क्लेम पांच साल अटका रहा। जिला उपभोक्ता ने शुक्रवार को निर्णय सुनाते हुए आदेश दिया है कि बीमा कंपनी किसान को 37905.66 रुपये की राशि किसान को दे। बैंक 9 प्रतिशत ब्याज, पांच हजार रुपये सेवाओं में कमी व पांच हजार कानूनी खर्च के तौर पर दे।
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आयोग के रिकाॅर्ड के मुताबिक कंसाला निवासी 40 वर्षीय महिला किसान मीनाक्षी ने 2020 में आयोग में याचिका दायर की थी कि उसके पास दो एकड़ जमीन है। अक्तूबर 2018 में उसमें गेहूं की फसल की बुआई की थी। साथ ही फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा कराया गया था।
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इसके लिए 29 दिसंबर 2018 को बैंक खाते से 568.58 रुपये की प्रीमियम राशि काट ली गई। कटाई के समय आग लगने के कारण फसल नष्ट हो गई। उसने पुलिस व राजस्व विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। जब उसने बैंक से बीमा कंपनी के बारे में पूछताछ की तो कोई जवाब नहीं मिला।
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बाद में बैंक ने लिखित जवाब में बताया कि उसकी फसल के बीमा का प्रीमियम यूनिवर्सल सोम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पास जमा है। इसके बाद कृषि विभाग ने फसल के निरीक्षण और सर्वेक्षण के लिए हल्का पटवारी को नियुक्त किया। इस तरह बैंक की ओर से बीमा कंपनी का समय पर नाम न बताने के कारण समय पर उसके दावे का निपटारा नहीं हो सका।

इसलिए फसल के नुकसान के तौर पर 80 हजार रुपये ब्याज सहित व 30 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिलवाए जाएं। आयोग ने बैंक व बीमा कंपनी को नोटिस जारी किया। बीमा कंपनी ने जवाब में बताया कि उसकी तरफ से क्लेम राशि 37,905.66 रुपये भुगतान करने के लिए आईडी बना दी थी। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद तय किया है कि बैंक की ओर से समय पर बीमा कंपनी का नाम न बताने के कारण बीमा कंपनी ने क्लेम जारी नहीं किया। कंपनी तत्काल क्लेम की राशि किसान को दे और देरी के लिए बैंक जिम्मेदार है। ऐसे में 9 प्रतिशत ब्याज, हर्जाना व कानूनी खर्च बैंक की ओर से दिया जाए।
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