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सहकारी चीनी मिल में आई तकनीकी खराबी
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मिल में गन्ना लेकर पहुंचे किसान।
- फोटो : Jind
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जींद। सहकारी चीनी मिल अपने शुभारंभ के चौथे दिन ही बंद हो गई। मिल में तकनीकी खराबी आई हुई है। इसे ठीक करने के लिए शाहबाद से इंजीनियर बुलाए गए हैं, लेकिन फाल्ट ठीक नहीं हो रहा है। पिछले सत्र में भी मिल कई दिन तक तकनीकी फाल्ट के कारण बंद रही थी। मिल की मशीनरी काफी पुरानी हो चुकी है, इस कारण यह खराब हो जाती है। मिल में गन्ने की ट्रॉली लेकर पहुंचे किसानों को बहुत परेशानी हो रही है।
वीरवार शाम को अचानक मशीन की टरबाइन में कुछ खराबी आ गई। 24 घंटे होने के बावजूद भी मिल शुरू नहीं हो पाई। शाहाबाद से बुलाए इंजीनियर फाल्ट ठीक करने में लगे हुए हैं। मिल के तहत गन्ने का रकबा ज्यादा होने के कारण पिछले साल से 12 दिन पहले पेराई सत्र शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में ही 24 घंटे से मिल खराब है। काफी संख्या में किसान गन्ना लेकर मिल में पहुंचे हुए हैं। जब तक तकनीकी फॉल्ट ठीक नहीं हो जाता, तब तक किसानों को मिल में ही रुकना पड़ेगा। मिल के तहत करीब 16 हजार एकड़ का गन्ना आता है। पिछले साल मिल ने 28 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, जोकि इस बार 38 लाख है। इस प्रकार मिल खराब रही तो इतने गन्ने की पेराई करना मुश्किल हो जाएगा।
इंजीनियर काम कर रहे हैं
मिल में तकनीकी कमी आई हुई है। इंजीनियर ठीक कर रहे हैं। तकनीकी खराबी जल्द ठीक हो जाएगी और मिल जल्द शुरू हो जाएगा। किसानों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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-डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
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वीरवार शाम को अचानक मशीन की टरबाइन में कुछ खराबी आ गई। 24 घंटे होने के बावजूद भी मिल शुरू नहीं हो पाई। शाहाबाद से बुलाए इंजीनियर फाल्ट ठीक करने में लगे हुए हैं। मिल के तहत गन्ने का रकबा ज्यादा होने के कारण पिछले साल से 12 दिन पहले पेराई सत्र शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में ही 24 घंटे से मिल खराब है। काफी संख्या में किसान गन्ना लेकर मिल में पहुंचे हुए हैं। जब तक तकनीकी फॉल्ट ठीक नहीं हो जाता, तब तक किसानों को मिल में ही रुकना पड़ेगा। मिल के तहत करीब 16 हजार एकड़ का गन्ना आता है। पिछले साल मिल ने 28 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की थी, जोकि इस बार 38 लाख है। इस प्रकार मिल खराब रही तो इतने गन्ने की पेराई करना मुश्किल हो जाएगा।
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इंजीनियर काम कर रहे हैं
मिल में तकनीकी कमी आई हुई है। इंजीनियर ठीक कर रहे हैं। तकनीकी खराबी जल्द ठीक हो जाएगी और मिल जल्द शुरू हो जाएगा। किसानों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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-डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।