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Jind News: प्राकृतिक खेती से सुमित्रा ने लिखी सफलता की इबारत
Thu, 05 Mar 2026 11:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Thu, 05 Mar 2026 11:50 PM IST
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05जेएनडी25: सुमित्रा देवी तैयार किए गए उत्पादों को प्रदर्शनी में लगाकर जानकारी देते हुए। स्रोत:
जींद। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले की महिलाओं की उपलब्धियों को याद किया जा रहा है। ऐसी ही प्रेरणादायी कहानी गांव अहिरका की किसान सुमित्रा की है। इन्होंने प्राकृतिक खेती से न केवल सफलता नई इबारत लिखी बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता का रास्ता खोला है।
सुमित्रा कई वर्षों से प्राकृतिक और जैविक खेती के माध्यम से खेती को नए व्यवसायिक मॉडल में बदल रही हैं। वे खेतों में धान, सरसों, मूंग, हल्दी, धनिया, मेथी और विभिन्न सब्जियों की खेती करती हैं। खास बात यह है कि वह इन फसलों को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उनकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर बाजार में उतारती हैं, जिससे उत्पादों का मूल्य बढ़ जाता है और अच्छी आमदनी होती है।
सुमित्रा बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2018 में करीब चार एकड़ जमीन में खेती शुरू की थी। समय के साथ उन्होंने मिश्रित खेती का मॉडल अपनाया। एक से दो एकड़ में अमरूद का बाग, गुलाब और गेंदे के फूलों की खेती के साथ हल्दी और करोंदा भी उगाती हैं। इस तरह जमीन के हर इंच का उपयोग कर वे बेहतर उत्पादन ले रही हैं।
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सुमित्रा के इस प्रयास से अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है। मसालों और अन्य उत्पादों की पैकेजिंग के लिए उन्होंने दो महिलाओं को काम पर रखा है, वहीं खेतों में भी चार से पांच लोगों को रोजगार मिलता है। वह खुद पोस्ट ग्रेजुएशन हैं। उनके पति डॉ. सुभाष चंद्र कृषि विभाग में बीडीओ पद पर कार्यरत हैं और खेती में उनका सहयोग करते हैं। संवाद
बाक्स
सालाना आय दो से तीन लाख रुपये तक
वह आंवला कैंडी, आंवले के लड्डू, शहद, नींबू का अचार, करोंदे का अचार, सरसों का तेल, बिस्किट और मोरिंगा पाउडर जैसे कई उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग बाजार में बढ़ रही है। खेती से जुड़े इन उत्पादों के कारण सालाना आय दो से तीन लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। सुमित्रा को प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2023 में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
बाक्स
अहिरका में किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी दिया गया। इसमें सुमित्रा ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत तैयार कर फसलों में इस्तेमाल किया जाता है। इससे खेती की लागत कम होती है और जमीन की उर्वरता भी बनी रहती है।
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सुमित्रा कई वर्षों से प्राकृतिक और जैविक खेती के माध्यम से खेती को नए व्यवसायिक मॉडल में बदल रही हैं। वे खेतों में धान, सरसों, मूंग, हल्दी, धनिया, मेथी और विभिन्न सब्जियों की खेती करती हैं। खास बात यह है कि वह इन फसलों को सीधे बाजार में बेचने के बजाय उनकी प्रोसेसिंग और पैकेजिंग कर बाजार में उतारती हैं, जिससे उत्पादों का मूल्य बढ़ जाता है और अच्छी आमदनी होती है।
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सुमित्रा बताती हैं कि उन्होंने वर्ष 2018 में करीब चार एकड़ जमीन में खेती शुरू की थी। समय के साथ उन्होंने मिश्रित खेती का मॉडल अपनाया। एक से दो एकड़ में अमरूद का बाग, गुलाब और गेंदे के फूलों की खेती के साथ हल्दी और करोंदा भी उगाती हैं। इस तरह जमीन के हर इंच का उपयोग कर वे बेहतर उत्पादन ले रही हैं।
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सुमित्रा के इस प्रयास से अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है। मसालों और अन्य उत्पादों की पैकेजिंग के लिए उन्होंने दो महिलाओं को काम पर रखा है, वहीं खेतों में भी चार से पांच लोगों को रोजगार मिलता है। वह खुद पोस्ट ग्रेजुएशन हैं। उनके पति डॉ. सुभाष चंद्र कृषि विभाग में बीडीओ पद पर कार्यरत हैं और खेती में उनका सहयोग करते हैं। संवाद
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सालाना आय दो से तीन लाख रुपये तक
वह आंवला कैंडी, आंवले के लड्डू, शहद, नींबू का अचार, करोंदे का अचार, सरसों का तेल, बिस्किट और मोरिंगा पाउडर जैसे कई उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की मांग बाजार में बढ़ रही है। खेती से जुड़े इन उत्पादों के कारण सालाना आय दो से तीन लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। सुमित्रा को प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 2023 में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
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अहिरका में किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण भी दिया गया। इसमें सुमित्रा ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत तैयार कर फसलों में इस्तेमाल किया जाता है। इससे खेती की लागत कम होती है और जमीन की उर्वरता भी बनी रहती है।