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Jind News: सुमित्रा देवी ने चार एकड़ में जैविक खेती से बनाई पहचान, आज दिल्ली में मिलेगा सम्मान
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14जेएनडी10: सुमित्रा रानी।
जींद। मेहनत, हौसले और नई सोच के दम पर खेती को आत्मनिर्भरता का माध्यम बना रहीं जिले के अहिरका गांव की प्रगतिशील महिला किसान सुमित्रा रानी आज दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। चार एकड़ जमीन पर जैविक खेती करने वाली सुमित्रा ने न केवल अपनी अलग पहचान बनाई है बल्कि व्हाट्सएप के जरिये जैविक उत्पादों की बिक्री कर खेती को सीधे बाजार से भी जोड़ा है।
उनकी इस पहल से दूसरी ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सुमित्रा रानी को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस पर आज दिल्ली में कृषि मंत्रालय की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
सुमित्रा देवी ने खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा बल्कि उपज की पैकिंग और बिक्री की जिम्मेदारी भी खुद संभाली है। वह अपनी जमीन पर चावल, दाल और मूंग का उत्पादन करती हैं। इसके बाद कृषि उत्पादों की पैकिंग करके सीधे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। उत्पादों की बिक्री के लिए उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप को माध्यम बनाया है। ग्राहक इसी ग्रुप के जरिये ऑर्डर देते हैं और उनकी मांग के अनुसार उत्पाद उपलब्ध करवाए जाते हैं। इस पहल से उन्होंने खेती को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रयास किया है।
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दूसरी महिलाओं को भी बना रहीं आत्मनिर्भर
सुमित्रा की सफलता का लाभ दूसरी ग्रामीण महिलाओं को भी मिल रहा है। कृषि उत्पादों की पैकिंग और बिक्री से जुड़े कामों में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ परिवार की आय में योगदान देने की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। महिलाएं खेती के साथ-साथ कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और विपणन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
जैविक खेती के लिए पहले भी मिल चुका है सम्मान
जैविक खेती के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए सुमित्रा रानी को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से सम्मान मिल चुका है। मार्च 2025 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मेले में भी उनको सम्मान मिला था। अब दिल्ली में कृषि मंत्रालय की ओर से आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाना उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
फोटो कैप्शन
14जेएनडी09: जैविक तरीके से तैयार की गई शलगम को दिखाते हुए सुमित्रा रानी। स्रोत: परिजन
14जेएनडी10: सुमित्रा रानी।
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उनकी इस पहल से दूसरी ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। जैविक खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सुमित्रा रानी को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस पर आज दिल्ली में कृषि मंत्रालय की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
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सुमित्रा देवी ने खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा बल्कि उपज की पैकिंग और बिक्री की जिम्मेदारी भी खुद संभाली है। वह अपनी जमीन पर चावल, दाल और मूंग का उत्पादन करती हैं। इसके बाद कृषि उत्पादों की पैकिंग करके सीधे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। उत्पादों की बिक्री के लिए उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप को माध्यम बनाया है। ग्राहक इसी ग्रुप के जरिये ऑर्डर देते हैं और उनकी मांग के अनुसार उत्पाद उपलब्ध करवाए जाते हैं। इस पहल से उन्होंने खेती को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रयास किया है।
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दूसरी महिलाओं को भी बना रहीं आत्मनिर्भर
सुमित्रा की सफलता का लाभ दूसरी ग्रामीण महिलाओं को भी मिल रहा है। कृषि उत्पादों की पैकिंग और बिक्री से जुड़े कामों में महिलाओं को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। इससे उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ परिवार की आय में योगदान देने की संभावनाएं भी मजबूत हो रही हैं। महिलाएं खेती के साथ-साथ कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और विपणन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
जैविक खेती के लिए पहले भी मिल चुका है सम्मान
जैविक खेती के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए सुमित्रा रानी को गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत से सम्मान मिल चुका है। मार्च 2025 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मेले में भी उनको सम्मान मिला था। अब दिल्ली में कृषि मंत्रालय की ओर से आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाना उनकी उपलब्धियों में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
फोटो कैप्शन
14जेएनडी09: जैविक तरीके से तैयार की गई शलगम को दिखाते हुए सुमित्रा रानी। स्रोत: परिजन
14जेएनडी10: सुमित्रा रानी।

14जेएनडी10: सुमित्रा रानी।