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साक्षात त्याग, वैराग्य और प्रेम की मूर्त : सुखदेव महाराज
Tue, 25 Mar 2025 12:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 25 Mar 2025 12:00 AM IST
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24जेएनडी01-रोहतक रोड पर आयोजित सत्संग में भाग लेते हुए श्रद्धालु। स्रोत संगठन
जींद। कलाधारी महाराज के प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में रोहतक रोड पर सत्संग और भंडारे का आयोजन किया गया। ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि भगवान गूढ़ ज्ञान और प्रेम के अथाह सागर हैं। वह साक्षात त्याग, वैराग्य और प्रेम की मूर्त है। उन्होंने कहा कि परमपिता प्रभु ने मानवता के कल्याण के लिए कई वेद ग्रंथों की रचना की। भगवान ने संसार में रहते हुए गहरे भवसागर से पार उतरने का मार्ग दिखाया और अपने आप के सही स्वरूप से अवगत कराया।
ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि सेवा, सिमरण और दान से कल्याण होता है। सभी भक्तों को पूर्ण संत महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर मानवता की भलाई के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। मानवता के प्रति निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सर्वोत्तम है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आंख के ऊपर मोतियाबिंद रूपी जाला आने से कुछ भी दिखाई नहीं देता, इसी प्रकार अंतकरण में मोह, ममता और विषय वासना रूपी जाला आने से इंसान सत्य को अनुभव नहीं कर पाता। फिर डॉक्टर के पास जाकर कहता है कि चाहे कुछ भी ले लो, पर उसकी आंख ठीक कर दो। अंदर के सही डॉक्टर तो पूर्ण सतगुरु ही होते हैं। फिर पूर्ण सतगुरु कहते हैं कि आज तक जो कुछ भी है, वह सब समर्पित कर दो तो वह आंखों से अज्ञान रूपी मोतियाबिंद उतार देंगे। इससे तुम स्वयं को बिल्कुल साफ देख सकोगे। तुम जो भी जानते हो, वह तुम्हारे और परमपिता प्रभु के बीच में दीवार है। जब तुम्हारा जानकारी का पर्दा हट जाएगा और अंतःकरण का पात्र खाली, साफ और पवित्र हो जाएगा तो तुम स्वयं को बिल्कुल साफ देख सकोगे। इस मौके पर डॉ. सुखपाल सिंह, ओम प्रकाश कंसल, अनिल गोयल, कंवर सैन सिंगला, पवन बंसल, दीपक बंसल, सन्नी बंसल, साहिल बंसल, पदम जैन, रमेश, मुकेश और राकेश भी मौजूद रहे।
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ऋषि सुखदेव महाराज ने कहा कि सेवा, सिमरण और दान से कल्याण होता है। सभी भक्तों को पूर्ण संत महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर मानवता की भलाई के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। मानवता के प्रति निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म ही सर्वोत्तम है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आंख के ऊपर मोतियाबिंद रूपी जाला आने से कुछ भी दिखाई नहीं देता, इसी प्रकार अंतकरण में मोह, ममता और विषय वासना रूपी जाला आने से इंसान सत्य को अनुभव नहीं कर पाता। फिर डॉक्टर के पास जाकर कहता है कि चाहे कुछ भी ले लो, पर उसकी आंख ठीक कर दो। अंदर के सही डॉक्टर तो पूर्ण सतगुरु ही होते हैं। फिर पूर्ण सतगुरु कहते हैं कि आज तक जो कुछ भी है, वह सब समर्पित कर दो तो वह आंखों से अज्ञान रूपी मोतियाबिंद उतार देंगे। इससे तुम स्वयं को बिल्कुल साफ देख सकोगे। तुम जो भी जानते हो, वह तुम्हारे और परमपिता प्रभु के बीच में दीवार है। जब तुम्हारा जानकारी का पर्दा हट जाएगा और अंतःकरण का पात्र खाली, साफ और पवित्र हो जाएगा तो तुम स्वयं को बिल्कुल साफ देख सकोगे। इस मौके पर डॉ. सुखपाल सिंह, ओम प्रकाश कंसल, अनिल गोयल, कंवर सैन सिंगला, पवन बंसल, दीपक बंसल, सन्नी बंसल, साहिल बंसल, पदम जैन, रमेश, मुकेश और राकेश भी मौजूद रहे।

24जेएनडी01-रोहतक रोड पर आयोजित सत्संग में भाग लेते हुए श्रद्धालु। स्रोत संगठन
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