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कौशल विकास आर्थिक सशक्तीकरण का आधार : डाॅ. धीरज
Sat, 21 Feb 2026 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 21 Feb 2026 11:51 PM IST
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21जेएनडी13-पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रशिक्षु और अन्य। स्रोत संस्थान
जींद। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभागियों के लिए बेकरी उत्पाद निर्माण पर पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. धीरज पंघाल ने प्रशिक्षण की रूपरेखा तैयार करने से लेकर सफल क्रियान्वयन तक भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि आज के समय में पारंपरिक कृषि के साथ मूल्य संवर्धन आवश्यक है। बेकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह क्षेत्र स्वरोजगार के लिए संभावनाशील है। डाॅ. पंघाल ने प्रशिक्षण के दौरान न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई बल्कि समय पर स्वयं उपस्थित रहकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन भी किया।
उन्होंने प्रतिभागियों को उद्यम स्थापना, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं तथा विपणन रणनीतियों की जानकारी दी। डाॅ. धीरज पंघाल ने विशेष रूप से अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कौशल विकास ही आर्थिक सशक्तीकरण का आधार है। कृषि विज्ञान केंद्र का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना ही नही बल्कि प्रशिक्षण के बाद भी निरंतर मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करना है ताकि प्रतिभागी सफल उद्यमी बन सकें।
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उन्होंने प्रतिभागियों को समूह आधारित उद्यम के रूप में कार्य करने की भी सलाह दी। जिससे लागत कम होगी और लाभ अधिक मिलेगा। इस प्रशिक्षण में सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से आईं डाॅ. शीतल ने विशेषज्ञ के रूप में विभिन्न बेकरी उत्पादों, बिस्किट, ब्रेड, पेस्ट्री, मफिन, कुकीज आदि के निर्माण की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने कच्चे माल के चयन, मिश्रण की सही तकनीक, ओवन संचालन, तापमान नियंत्रण, स्वच्छता मानकों, पैकेजिंग तकनीक तथा उत्पाद की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रशिक्षण पूर्णत: प्रायोगिक (हैंड्स ऑन) आधारित रहा, जिससे प्रतिभागियों को स्वयं उत्पाद तैयार करने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान रवि, डा. प्रीति मलिक एवं डा. पवन कुमार ने भी प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग से उत्पाद की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कौशल आधारित प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने कौशल का उपयोग आय बढ़ाने के लिए करने का आह्वान किया।
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उन्होंने कहा कि आज के समय में पारंपरिक कृषि के साथ मूल्य संवर्धन आवश्यक है। बेकरी उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह क्षेत्र स्वरोजगार के लिए संभावनाशील है। डाॅ. पंघाल ने प्रशिक्षण के दौरान न केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाई बल्कि समय पर स्वयं उपस्थित रहकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन भी किया।
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उन्होंने प्रतिभागियों को उद्यम स्थापना, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं तथा विपणन रणनीतियों की जानकारी दी। डाॅ. धीरज पंघाल ने विशेष रूप से अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कौशल विकास ही आर्थिक सशक्तीकरण का आधार है। कृषि विज्ञान केंद्र का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना ही नही बल्कि प्रशिक्षण के बाद भी निरंतर मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करना है ताकि प्रतिभागी सफल उद्यमी बन सकें।
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उन्होंने प्रतिभागियों को समूह आधारित उद्यम के रूप में कार्य करने की भी सलाह दी। जिससे लागत कम होगी और लाभ अधिक मिलेगा। इस प्रशिक्षण में सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से आईं डाॅ. शीतल ने विशेषज्ञ के रूप में विभिन्न बेकरी उत्पादों, बिस्किट, ब्रेड, पेस्ट्री, मफिन, कुकीज आदि के निर्माण की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने कच्चे माल के चयन, मिश्रण की सही तकनीक, ओवन संचालन, तापमान नियंत्रण, स्वच्छता मानकों, पैकेजिंग तकनीक तथा उत्पाद की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से प्रकाश डाला। प्रशिक्षण पूर्णत: प्रायोगिक (हैंड्स ऑन) आधारित रहा, जिससे प्रतिभागियों को स्वयं उत्पाद तैयार करने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान रवि, डा. प्रीति मलिक एवं डा. पवन कुमार ने भी प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों, गुणवत्ता नियंत्रण तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के बारे में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग से उत्पाद की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। डॉ. वजीर सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कौशल आधारित प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने कौशल का उपयोग आय बढ़ाने के लिए करने का आह्वान किया।