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Jind News: 700 साल पहले बसा शादीपुर गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित
Mon, 26 May 2025 01:43 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 26 May 2025 01:43 AM IST
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जुलाना। कस्बे के साथ लगता गांव शादीपुर 700 साल का पुराना इतिहास संजोए हुए है। गांव में रांघड़ जाति के लोग रहते थे। शादी नामक रांघड के नाम से गांव का नाम शादीपुर पड़ा है। गांव की आबादी करीब 5 हजार है।
गांव में आज भी लोग आर्य समाज के नियमों को मानते हैं। गांव में न सांग होने देते हैं क्योंकि सांग को ग्रामीण अश्लील मानते हैं और आज तक गांव में शराब का ठेका नहीं खुल पाया है। इसके अलावा गांव में कोई सार्वजनिक मंदिर भी नहीं है।
गांव के दो युवाओं ने पूरे देश में अपनी छाप छोड़ी है। शादीपुर निवासी दीपक लाठर ने कॉमनवेल्थ खेलों में कांस्य जीतकर देश का नाम रोशन किया है। वहीं सत्यवान ने भी नेशनल यूथ अवार्ड हासिल किया है। सत्यवान लाठर को 2005 में अवार्ड से नवाजा था। देश का नाम रोशन करने में अहम भूमिका निभाने के बावजूद भी गांव में विकास कार्यों की काफी दरकार है।
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गांव में 25 साल पहले बनाया गया उद्योग कुंज आज भी विकसित नहीं हो पाया है। गांव में 1979 में गुरुकुल और आर्य समाज की पाठशाला बनाई गई थी। गांव के विकास कार्यों को लेकर ग्रामीण सरकार और प्रशासन के अधिकारियों से भी मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही हाथ लगा है। शादीपुर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव का विकास तो हुआ है, लेकिन अब भी गांव में समस्याएं मौजूद हैं। इनका समाधान करना आवश्यक है। गांव के कई गलियों की हालत खस्ता है। गांव में स्टेडियम तो बना है, लेकिन आज तक कोई भी सुविधा खिलाड़ियों को नहीं मिल पाई है।
आर्य समाज से जुड़े हैं गांव के लोग
आर्य समाज को गांव के सभी लोग मानते हैं। इसके कारण गांव में मरणोपरांत अस्थियां नहीं उठाई जाती हैं। गांव में आज तक शराब का ठेका नहीं खुल पाया है।
विरेंद्र आर्य, शादीपुर।
गांव में सफाई व्यवस्था का जनाजा निकला हुआ है। गांव के बीच में स्थित गंदे पानी के तालाब ने लोगों का जीना दूभर किया हुआ है। गांव के गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए और तालाब की जगह गांव में पार्क बनाया जाए।
-कुलवंत लाठर, पूर्व सरपंच शादीपुर।
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गांव में आज भी लोग आर्य समाज के नियमों को मानते हैं। गांव में न सांग होने देते हैं क्योंकि सांग को ग्रामीण अश्लील मानते हैं और आज तक गांव में शराब का ठेका नहीं खुल पाया है। इसके अलावा गांव में कोई सार्वजनिक मंदिर भी नहीं है।
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गांव के दो युवाओं ने पूरे देश में अपनी छाप छोड़ी है। शादीपुर निवासी दीपक लाठर ने कॉमनवेल्थ खेलों में कांस्य जीतकर देश का नाम रोशन किया है। वहीं सत्यवान ने भी नेशनल यूथ अवार्ड हासिल किया है। सत्यवान लाठर को 2005 में अवार्ड से नवाजा था। देश का नाम रोशन करने में अहम भूमिका निभाने के बावजूद भी गांव में विकास कार्यों की काफी दरकार है।
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गांव में 25 साल पहले बनाया गया उद्योग कुंज आज भी विकसित नहीं हो पाया है। गांव में 1979 में गुरुकुल और आर्य समाज की पाठशाला बनाई गई थी। गांव के विकास कार्यों को लेकर ग्रामीण सरकार और प्रशासन के अधिकारियों से भी मिल चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही हाथ लगा है। शादीपुर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव का विकास तो हुआ है, लेकिन अब भी गांव में समस्याएं मौजूद हैं। इनका समाधान करना आवश्यक है। गांव के कई गलियों की हालत खस्ता है। गांव में स्टेडियम तो बना है, लेकिन आज तक कोई भी सुविधा खिलाड़ियों को नहीं मिल पाई है।
आर्य समाज से जुड़े हैं गांव के लोग
आर्य समाज को गांव के सभी लोग मानते हैं। इसके कारण गांव में मरणोपरांत अस्थियां नहीं उठाई जाती हैं। गांव में आज तक शराब का ठेका नहीं खुल पाया है।
विरेंद्र आर्य, शादीपुर।
गांव में सफाई व्यवस्था का जनाजा निकला हुआ है। गांव के बीच में स्थित गंदे पानी के तालाब ने लोगों का जीना दूभर किया हुआ है। गांव के गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए और तालाब की जगह गांव में पार्क बनाया जाए।
-कुलवंत लाठर, पूर्व सरपंच शादीपुर।