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Jind News: रामकली में खेत बचाओ अभियान की शुरुआत, किसानों को दी मृदा संरक्षण की जानकारी
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01जेएनडी06: किसानों को मृदा संरक्षण के बारे में जागरूक करते हुए डॉ. धीरज पंघाल। स्रोत: विभाग
जींद। कृषि विज्ञान केंद्र, पांडु पिंडारा की ओर से सोमवार को गांव रामकली से देशव्यापी खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ किया गया। अभियान का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक संसाधनों के महत्व और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम का नेतृत्व जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. धीरज पंघाल ने किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित और अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इससे उत्पादन लागत कम होगी और भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
डॉ. पंघाल ने किसानों को चार आर सिद्धांत (सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही स्थान) की जानकारी देते हुए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक स्रोतों के प्रयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। इससे जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है।
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उन्होंने हरी खाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ढैंचा जैसी फसलों को खेत में मिलाने से मिट्टी में नाइट्रोजन और जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और खेती अधिक लाभकारी बनती है। इस दौरान किसानों ने मृदा स्वास्थ्य, हरी खाद और जैविक खेती से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया।
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कार्यक्रम का नेतृत्व जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. धीरज पंघाल ने किया। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित और अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। इससे उत्पादन लागत कम होगी और भूमि की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
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डॉ. पंघाल ने किसानों को चार आर सिद्धांत (सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही स्थान) की जानकारी देते हुए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य जैविक स्रोतों के प्रयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। इससे जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों की उपलब्धता बेहतर होती है।
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उन्होंने हरी खाद के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ढैंचा जैसी फसलों को खेत में मिलाने से मिट्टी में नाइट्रोजन और जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और खेती अधिक लाभकारी बनती है। इस दौरान किसानों ने मृदा स्वास्थ्य, हरी खाद और जैविक खेती से जुड़े सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से जवाब दिया।