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सराभा का जीवन आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है : डॉ. सुधीर
Mon, 17 Nov 2025 12:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 17 Nov 2025 12:49 AM IST
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16जेएनडी26 : शहीद करतार सिंह सराभा की शहादत दिवस पर संबोधित करते हुए वक्ता। स्रोत संस्था
जींद। शहीद सूबेसिंह स्मारक में रविवार को शहीद करतार सिंह सराभा के शहादत दिवस पर सेमिनार का आयोजन किया गया। अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ के जिला सचिव एवं शिक्षाविद् मंगत राम शास्त्री ने की जबकि संचालन कपूर सिंह ने किया। सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. सुधीर कुमार रहे।
उन्होंने बताया कि शहीद करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई 1896 को पंजाब के लुधियाना जिले के सराभा गांव में हुआ। मात्र 16 वर्ष की उम्र में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका पहुंचे जहां उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। सराभा ने गदर अखबार के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत में सशस्त्र क्रांति की तैयारी में सक्रिय रूप से जुट गए।
डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि सराभा का जीवन आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है। देशभक्ति, त्याग और अदम्य साहस की उनकी भावना वर्तमान पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित करती है। कार्यक्रम के समापन पर अध्यक्ष मंगत राम शास्त्री ने शहीदों की स्मृति को जीवंत रखने के शहीद यादगार समिति के संकल्प को दोहराया।
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समिति के पदाधिकारियों ने ऐसे आयोजनों को भविष्य में भी जारी रखने का निर्णय लिया। इस दौरान डॉ. सुरेश जैन, कॉमरेड रमेश चंद्र, कर्मबीर संधु, राजकुमार श्योकंद, मंगल दीप नेहरा, रामबीर शर्मा, पवन कुमार, नूतन प्रकाश, वेद अलेवा, डॉ. मुरारी लाल, जसपाल, बिट्टू और संदीप डालमवाला आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने बताया कि शहीद करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई 1896 को पंजाब के लुधियाना जिले के सराभा गांव में हुआ। मात्र 16 वर्ष की उम्र में वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका पहुंचे जहां उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। सराभा ने गदर अखबार के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत में सशस्त्र क्रांति की तैयारी में सक्रिय रूप से जुट गए।
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डॉ. सुधीर कुमार ने कहा कि सराभा का जीवन आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है। देशभक्ति, त्याग और अदम्य साहस की उनकी भावना वर्तमान पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान के लिए प्रेरित करती है। कार्यक्रम के समापन पर अध्यक्ष मंगत राम शास्त्री ने शहीदों की स्मृति को जीवंत रखने के शहीद यादगार समिति के संकल्प को दोहराया।
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समिति के पदाधिकारियों ने ऐसे आयोजनों को भविष्य में भी जारी रखने का निर्णय लिया। इस दौरान डॉ. सुरेश जैन, कॉमरेड रमेश चंद्र, कर्मबीर संधु, राजकुमार श्योकंद, मंगल दीप नेहरा, रामबीर शर्मा, पवन कुमार, नूतन प्रकाश, वेद अलेवा, डॉ. मुरारी लाल, जसपाल, बिट्टू और संदीप डालमवाला आदि मौजूद रहे।