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डेढ़ महीने से दर-दर भटक रहे खुदरा सब्जी विक्रेता मानसिक तनाव में लाइट के टावर पर चढ़ा

Thu, 02 Jul 2020 11:39 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2020 11:39 PM IST
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Retail vegetable vendor wandering from rate to rate for one and a half months climbed the tower of light under mental stress
मानिसक तनाव के कारण टावर पर चढ़ा मांसाखोर। - फोटो : Jind
सब्जी मंडी में शेडों के नीचे प्रशासन द्वारा कोरोना संक्रमण के चलते काम करने की अनुमति नहीं दिए जाने के चलते अब मासाखोर मानसिक तनाव में आने लगे हैं। वीरवार सुबह सब्जी मंडी परिसर में उस समय हड़कंप मच गया जब एक मासाखोर सब्जी मंडी स्थित लाइट के टावर पर चढ़ गया और अपनी मौत का जिम्मेदार कुछ आढ़तियों को बताने लगा। मंडी में मौजूद आढ़तियों व अन्य लोगों को पता चला तो वे मौके पर पहुंचे और फिर पुलिस के सहयोग से उस व्यक्ति को नीचे उतारा गया।
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इसके बाद आढ़ती व मासाखोर शहर थाना भी पहुंचे। जहां उन्हें समझा-बुझाकर शांत किया गया। गौरतलब हे कि पिछले डेढ़ महीने से जींद की सब्जी मंडी के मासाखोर को मंडी में सब्जी बचने की अनुमति मांगने को लेकर दर-दर को भटकने को मजबूर हैं। इसी के चलते वे कभी विधायक, कभी डीसी तो कभी मार्केट कमेटी सचिव से मिलते रहे, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन देकर टाल दिया गया। इसके चलते मासाखोर मानसिक व आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं। इसी मानसिक परेशानी के चलते रूपनगर निवासी बलबीर सिंह सैनी मंडी में स्थित लाइट के टावर पर मरने की धमकी देकर चढ़ गया। उसने कई आढ़तियों के नाम की पर्ची भी जेब में रख ली और आवाज लगाने लगा कि उसकी मौत के ये लोग जिम्मेदार होंगे। मासाखोर के टावर पर चढ़ने की सूचना मिलने शहर पुलिस व आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद उसे समझाकर टावर से सुरक्षित उतार लिया गया। बाद में काफी मासाखोर और आढ़ती शहर थाने पहुंचे और किसी तरह मामला शांत हो पाया। मासाखोर सत्यवान व शिव अवतार गौतम ने कहा कि सब्जी मंडी में करीब 350 मासाखोर हैं जो फड़ पर सब्जी बेचने का कार्य करते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का हवाला देकर प्रशासन ने इन्हें मंडी से बाहर काम करने के आदेश दिए थे और डेढ़ माह से वे बेरोजगार घूम रहे हैं। इसके चलते वे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। आढ़ती उनको गुमराह कर रहे हैं। मासाखोर सत्यवान ने कहा कि रोजी रोटी का संकट मुंह बाय खड़ा है। भावुक होकर उन्होंने कहा कि प्रशासन को बाल-बच्चों पर रहम करना चाहिए।
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मासाखोरों को काम की इजाजत प्रशासन ने देनी है : अवतार
आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान अवतार कुमरा ने कहा कि मासाखोर हमारे भाई हैं और वे वर्षों से साथ मिलकर काम करते आए हैं। इन्हें काम करने की इजाजत देना प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में है। हमारा कोई लेना देना नहीं है। हमारी सहानुभूति सभी मसाखोरों के साथ है।
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