{"_id":"67019f6f121718a31b0f9c34","slug":"rekha-reached-success-through-hard-work-jind-news-c-199-1-sroh1009-124002-2024-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jind News: मेहनत के दम पर सफलता के मुकाम पर पहुंची रेखा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jind News: मेहनत के दम पर सफलता के मुकाम पर पहुंची रेखा
Sun, 06 Oct 2024 01:49 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sun, 06 Oct 2024 01:49 AM IST
विज्ञापन
05जेएनडी58: रेखा कश्यप। संवाद
जींद। महिलाओं को सिलाई कढ़ाई सिखाकर आत्मनिर्भर बनाकर रेखा कश्यप शक्ति स्वरूपा बनी है। करीब 10 साल पहले पति के बीमार होने पर घर में खर्च चलाने वाला कोई नहीं था। आर्थिक संकट आड़े था। ऐसे में रेखा ने हौसला नहीं खोया और सिलाई मशीन को अपना हथियार बनाकर सिलाई सेंटर शुरू किया। मेहनत की और सफलता के मुकाम पर पहुंची। उन्होंने करीब 1500 महिलाओं को सशक्त बनाया। करीब 300 महिलाएं उनकी प्रेरणा से खुद का सिलाई सेंटर चला रही हैं।
रेखा कश्यप ने लगभग दस वर्ष पहले सिलाई का काम शुरू किया था। इसके बाद अन्य दुखी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आठ वर्ष पहले खुद सिलाई कढ़ाई सिखाने का निर्णय लिया और महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर शुरू किया, ताकि महिलाएं सिलाई सिखाकर अपने परिवार का गुजारा चला सकें। वर्ष 2016 में सिलाई सेंटर महिलाओं को सिखाना शुरू किया। इसके बाद शहर में कई स्थानों पर यह सेंटर चलाए। जिससे महिलाओं को सशक्त बनाया। रेखा कश्यप फिलहाल प्राचीन भूतेश्वर ट्रस्ट समिति के नाम से सिलाई सेंटर प्राचीन भूतेश्वर मंदिर में चला रही है। इससे पहले भी उन्होंने कश्यप धर्मशाला अपराही मोहल्ला में लगभग एक वर्ष तक सिलाई सेंटर चलाया। महादेव धर्मशाला में तीन वर्ष तक सिलाई सेंटर चलाया। इसके अलावा भी शहर में अन्य स्थानों पर सिलाई सेंटर चलाकर अब तक लगभग 1500 से ज्यादा महिलाओं को सशक्त बनाया है। इनमें से 300 से ज्यादा महिलाओं ने सिलाई कढ़ाई के कार्य को रोजगार के रुप में भी अपनाया है। जो शहर की कालोनियों में सिलाई सेंटर खोलकर अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं। शहर के अलावा गांवों से आने वाली महिलाओं को भी रेखा कश्यप ने सिलाई सेंटर सिखाकर गांवों में अपनी पहचान बनाई। सिलाई कढ़ाई के कार्य को सिखाने के लिए उन्होंने दो बैच चलाए हुए हैं। सुबह और सायं को महिला व युवती सिलाई सीखने के लिए आती हैं।
विज्ञापन
रेखा कश्यप ने लगभग दस वर्ष पहले सिलाई का काम शुरू किया था। इसके बाद अन्य दुखी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आठ वर्ष पहले खुद सिलाई कढ़ाई सिखाने का निर्णय लिया और महिलाओं के लिए सिलाई सेंटर शुरू किया, ताकि महिलाएं सिलाई सिखाकर अपने परिवार का गुजारा चला सकें। वर्ष 2016 में सिलाई सेंटर महिलाओं को सिखाना शुरू किया। इसके बाद शहर में कई स्थानों पर यह सेंटर चलाए। जिससे महिलाओं को सशक्त बनाया। रेखा कश्यप फिलहाल प्राचीन भूतेश्वर ट्रस्ट समिति के नाम से सिलाई सेंटर प्राचीन भूतेश्वर मंदिर में चला रही है। इससे पहले भी उन्होंने कश्यप धर्मशाला अपराही मोहल्ला में लगभग एक वर्ष तक सिलाई सेंटर चलाया। महादेव धर्मशाला में तीन वर्ष तक सिलाई सेंटर चलाया। इसके अलावा भी शहर में अन्य स्थानों पर सिलाई सेंटर चलाकर अब तक लगभग 1500 से ज्यादा महिलाओं को सशक्त बनाया है। इनमें से 300 से ज्यादा महिलाओं ने सिलाई कढ़ाई के कार्य को रोजगार के रुप में भी अपनाया है। जो शहर की कालोनियों में सिलाई सेंटर खोलकर अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं। शहर के अलावा गांवों से आने वाली महिलाओं को भी रेखा कश्यप ने सिलाई सेंटर सिखाकर गांवों में अपनी पहचान बनाई। सिलाई कढ़ाई के कार्य को सिखाने के लिए उन्होंने दो बैच चलाए हुए हैं। सुबह और सायं को महिला व युवती सिलाई सीखने के लिए आती हैं।
विज्ञापन