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Jind News: रजिस्ट्री पोर्टल बन रहा परेशानी, वकीलों ने जताया कड़ा विरोध
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जींद। सोमवार को उपमंडल कार्यालय में एडवोकेट अजमेर श्योकंद की अगुवाई में वकील एकत्रित हुए। यहां पर राज्यपाल, सीएम, मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन एसडीएम रमित यादव के नाम से भेजा गया। अजमेर श्योकंद ने बताया कि सरकार ने रजिस्ट्रेशन को लेकर नवंबर में पोर्टल लॉन्च किया था।
सरकार ने प्रचार किया कि रजिस्ट्री पेपर लेस होगी। आज भी पोर्टल के अंदर बहुत कमी है। खाना नंबर 5 खानाखस्त भी कहते है उसमें लोग मालिक हैं उसके अंदर उनकी रजिस्ट्री नहीं हो रही है। पहले काफी साइड रजिस्ट्री हुई है आज उनकी भी रजिस्ट्री नहीं होती। ऐसा ही रहता तो हरियाणा के अंदर 35 से 40 प्रतिशत जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी।
ऑनलाइन डीड करते है तो उसका 500 रुपए का टोकन कटता है। वो अंदर से रिजेक्ट हो जाए तो 500 रुपए रिफंड नहीं होते। कई डीड ऐसी होती है जो कई बार ऑनलाइन करनी पड़ती है जो रिजेक्ट होती रहती है। राशि रिफंड नहीं होने से आम जनता को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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जो ऋण लेते है उसकी कोई मोटेसन फीस नहीं होती लेकिन इसके अंदर अपने आप 250 रुपए फीस कटती है। उन्होंने कहा कि शासन, प्रशासन का कहना था कि खाना कास्त में मालिक है उनको खाना मलकियत में लेकर आएंगे लेकिन वो भी संभव नहीं है। जब तक पोर्टल की कमी दूर नहीं होती जब तक मैनुअल रजिस्ट्री करने का अधिकार रजिस्ट्रार को देना चाहिए।
सरकार ये नहीं करेगी तो हम मजबूरन इसके खिलाफ अदालत में जाएंगे। लोगों की समस्याओं को देखते हुए राज्यपाल, सीएम, मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन एसडीएम के माध्यम से भेजा है। प्रोपर्टी आईडी को लेकर भी एसडीएम को ज्ञापन दिया गया है।
मौके पर फूल सिंह श्योकंद, अमित काकड़ोद, मेहर सिंह, एडवोकेट सन्नी चौधरी, हरदीप श्योकंद, प्रदीप पेगां, संदीप काकड़ोद, साधुराम, दीपक वर्मा, सतीश मौजूद रहे।
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सरकार ने प्रचार किया कि रजिस्ट्री पेपर लेस होगी। आज भी पोर्टल के अंदर बहुत कमी है। खाना नंबर 5 खानाखस्त भी कहते है उसमें लोग मालिक हैं उसके अंदर उनकी रजिस्ट्री नहीं हो रही है। पहले काफी साइड रजिस्ट्री हुई है आज उनकी भी रजिस्ट्री नहीं होती। ऐसा ही रहता तो हरियाणा के अंदर 35 से 40 प्रतिशत जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो पाएगी।
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ऑनलाइन डीड करते है तो उसका 500 रुपए का टोकन कटता है। वो अंदर से रिजेक्ट हो जाए तो 500 रुपए रिफंड नहीं होते। कई डीड ऐसी होती है जो कई बार ऑनलाइन करनी पड़ती है जो रिजेक्ट होती रहती है। राशि रिफंड नहीं होने से आम जनता को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
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जो ऋण लेते है उसकी कोई मोटेसन फीस नहीं होती लेकिन इसके अंदर अपने आप 250 रुपए फीस कटती है। उन्होंने कहा कि शासन, प्रशासन का कहना था कि खाना कास्त में मालिक है उनको खाना मलकियत में लेकर आएंगे लेकिन वो भी संभव नहीं है। जब तक पोर्टल की कमी दूर नहीं होती जब तक मैनुअल रजिस्ट्री करने का अधिकार रजिस्ट्रार को देना चाहिए।
सरकार ये नहीं करेगी तो हम मजबूरन इसके खिलाफ अदालत में जाएंगे। लोगों की समस्याओं को देखते हुए राज्यपाल, सीएम, मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन एसडीएम के माध्यम से भेजा है। प्रोपर्टी आईडी को लेकर भी एसडीएम को ज्ञापन दिया गया है।
मौके पर फूल सिंह श्योकंद, अमित काकड़ोद, मेहर सिंह, एडवोकेट सन्नी चौधरी, हरदीप श्योकंद, प्रदीप पेगां, संदीप काकड़ोद, साधुराम, दीपक वर्मा, सतीश मौजूद रहे।