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Jind News: मिड डे मील वर्कर्स का 30 और 31 मार्च को जींद में होगा प्रांतीय सम्मेलन
Mon, 17 Feb 2025 12:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 17 Feb 2025 12:22 AM IST
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16जेएनडी31-बैठक में भाग लेते हुए मिड डे मील वर्कर्स।
16जेएनडी31:
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। मांगों को लेकर मिड डे मील वर्कर्स का प्रांतीय सम्मेलन 30 और 31 मार्च को जींद में होगा। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन हरियाणा के राज्य सचिव सत्यवान, प्रेम, पिंकी और सुमन ने कहा कि प्रदेश में 30 हजार और देश में 25 लाख के करीब मिड डे मील वर्कर काम कर रही हैं, जो देश के 12 करोड़ बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाते हैं।
उन्होंने कहा यह बहुत दुखद है कि महिलाओं के सशक्तिकरण का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने पिछले 11 साल से मिड डे मील वर्कर्स के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आई है। उसमें कम बच्चों वाले स्कूलों को बंद किया जा रहा है और स्कूल मर्ज किए जा रहे हैं। देशभर में इसके चलते हजारों स्कूल बंद हो चुके हैं। हरियाणा सरकार पांच हजार स्कूलों को बंद कर चुकी है। इनमें अधिकतर लड़कियों के प्राथमिक स्कूल हैं। सरकार की इन्हीं नीतियों के चलते पिछले दस साल में देश में करीब दो लाख मिड डे मील वर्कर्स का रोजगार छीना गया है। यूनियन की मुख्य मांग है कि मानदेय दस महीने मिलता है, जबकि काम तो करीब 11 महीने करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें भी शिक्षकों और अन्य स्टाफ की तरह 12 महीने वेतन मिलना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। मांगों को लेकर मिड डे मील वर्कर्स का प्रांतीय सम्मेलन 30 और 31 मार्च को जींद में होगा। मिड डे मील वर्कर्स यूनियन हरियाणा के राज्य सचिव सत्यवान, प्रेम, पिंकी और सुमन ने कहा कि प्रदेश में 30 हजार और देश में 25 लाख के करीब मिड डे मील वर्कर काम कर रही हैं, जो देश के 12 करोड़ बच्चों के लिए दोपहर का भोजन बनाते हैं।
उन्होंने कहा यह बहुत दुखद है कि महिलाओं के सशक्तिकरण का दावा करने वाली केंद्र सरकार ने पिछले 11 साल से मिड डे मील वर्कर्स के मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। केंद्र सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति लेकर आई है। उसमें कम बच्चों वाले स्कूलों को बंद किया जा रहा है और स्कूल मर्ज किए जा रहे हैं। देशभर में इसके चलते हजारों स्कूल बंद हो चुके हैं। हरियाणा सरकार पांच हजार स्कूलों को बंद कर चुकी है। इनमें अधिकतर लड़कियों के प्राथमिक स्कूल हैं। सरकार की इन्हीं नीतियों के चलते पिछले दस साल में देश में करीब दो लाख मिड डे मील वर्कर्स का रोजगार छीना गया है। यूनियन की मुख्य मांग है कि मानदेय दस महीने मिलता है, जबकि काम तो करीब 11 महीने करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें भी शिक्षकों और अन्य स्टाफ की तरह 12 महीने वेतन मिलना चाहिए।
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