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Jind News: जिले में विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने में रुचि नहीं दिखा रहे निजी स्कूल

Tue, 04 Feb 2025 12:33 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 04 Feb 2025 12:33 AM IST
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Private schools are not showing interest in making immense ID of students in the district
03जेएनडी22-डॉ. सुभाष वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी जींद।
जींद। जिले में विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने में निजी स्कूल रुचि नहीं दिखा रहे हैं। प्राइवेट स्कूलों की अब तक केवल 77.98 प्रतिशत विद्यार्थियों की ही अपार आईडी बन पाई है। वहीं, राजकीय स्कूलों ने 92.51 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। पिछले साल अक्तूबर माह से आईडी बनाने का काम चल रहा है।
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जिले में 726 राजकीय और 384 निजी स्कूल हैं। राजकीय स्कूलों में एक लाख दो हजार 876 विद्यार्थियों में से 95 हजार 175 विद्यार्थियों की आईडी बन चुकी है और सात हजार 701 विद्यार्थियों की आईडी बननी बाकी है। इसके अलावा 384 प्राइवेट स्कूलों में एक लाख 41 हजार 774 विद्यार्थियों में से एक लाख दस हजार 298 विद्यार्थियों की आईडी बन चुकी है और 31 हजार 476 विद्यार्थियों की आईडी बनना बाकी है। ऐसे में प्राइवेट स्कूल अभी अपार आईडी बनाने में राजकीय स्कूलों से काफी पीछे चल रहे हैं।
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विद्यार्थियों का डाटा मिसमैच जैसे नाम व जन्मतिथि का मिलान नहीं होने के चलते अपार आईडी बनवाने में परेशानी आ रही है। बतां दे कि एक देश-एक छात्र योजना के तहत आधार की तर्ज पर विद्यार्थियों की ऑटोमेटिड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी बनाई जा रही है। इससे विद्यार्थियों को देश के किसी भी कोने में स्थित स्कूल में दाखिला लेने में कोई परेशानी नहीं आएगी। विशेष बात यह है कि अपार आईडी को डिजी लॉकर से भी जोड़ा जाएगा। इसमें विद्यार्थी अपने समस्त प्रमाण-पत्र व अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां सुरक्षित रख सकेंगे।
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अपार आईडी में मौजूद 12 अंकों का यूनिक आईडी विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति को ट्रैक करने में मदद करेगा। आईडी में विद्यार्थी की समस्त जानकारी रहेगी। विद्यार्थी को देशभर में किसी भी स्थान पर यदि किसी संस्थान में दाखिला लेना है तो उसकी पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगी। विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने का उद्देश्य स्कूलों में ड्रॉप आउट को खत्म करना है। आईडी बनने के उपरांत यदि विद्यार्थी स्कूल छोड़ता है तो उसकी आसानी से पहचान की जा सकेगी। आईडी बनने पर विद्यार्थी को देश के किसी भी कोने में ट्रैक किया जा सकेगा। अपार आईडी को विद्यार्थी एक पहचान के रूप में भी प्रयोग कर सकेंगे। इसमें विद्यार्थी का नाम, पता, अभिभावक का नाम, मोबाइल नंबर व आधार कार्ड शामिल रहेगा। आईडी बनाने से पहले अभिभावकों से सहमति-पत्र लेना होगा।


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सभी स्कूलों को अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। राजकीय स्कूल अब अपने अंतिम चरण में हैं। प्रतिदिन सभी स्कूलों में आईडी की मॉनिटरिंग की जा रही है। निजी स्कूलों को भी जल्द कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। डाटा मिसमैच होने की वजह से अपार आईडी बनवाने में दिक्कत आ रही है।

-डॉ. सुभाष वर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, जींद।
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