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Jind News: फीस बढ़ाकर अभिभावकों को दर्द दे रहे निजी स्कूल

Wed, 09 Apr 2025 12:12 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद Updated Wed, 09 Apr 2025 12:12 AM IST
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Private schools are hurting parents by increasing fees
जींद। निजी स्कूलों में अब अप्रैल माह के दौरान दाखिला प्रक्रिया चल रही है। अभिभावक निजी स्कूलों में भारी भरकम फीस देकर बच्चों का दाखिला करवा निजी स्कूल संचालक हर बार फीस बढ़ाकर अभिभावकों का दर्द बढ़ा रहे हैं।
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पास होकर अगली कक्षा में जाने वाले विद्यार्थी की फीस बढ़ा दी जाती है, जबकि इस बार फार्म छह भरने को लेकर मुख्यालय से कोई निर्देश नहीं मिले थे। ऐसे में निजी स्कूल संचालक मनमानी करते हुए फीस बढ़ा रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। फाॅर्म छह में निजी स्कूल संचालकों को यह जानकारी देनी होती है कि वे फीस क्यों बढ़ा रहे हैं और विद्यार्थियों को क्या-क्या सुविधाएं दी जाएंगी। पहली कक्षा के विद्यार्थी की एडमिशन फीस आठ हजार रुपये और महीने की फीस लगभग 2500 रुपये है।
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इसके अलावा बस किराया अलग से रहता है। वहीं वर्दी, स्पोर्ट्स किट सहित अन्य सुविधाओं के नाम पर भारी भरकम वसूली की जाती है। इसके अलावा निजी स्कूल ज्यादातर अपने पास से ही बच्चों को किताबें दे रहे हैं। इन किताबों का कोई बिल नहीं दिया जाता, बस एक पर्ची पर लिखकर दे दिया जाता है। जिन स्कूलों ने पुस्तक विक्रेताओं से मिलीभगत की हुई है, वह अभिभावकों को कच्चा बिल ही देते हैं।
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इस दाखिले की फीस के बाद एक और बहुत बड़ा खर्च उन पर किताबों का पड़ रहा है। निजी स्कूल अपनी मनमानी चलाते हुए अभिभावकों को एनसीईआरटी की किताबें लगवाने की बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें लगवा रहे हैं। अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई खास कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। इसके चलते निजी स्कूल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। निजी स्कूल हर साल अपनी किताबों में कुछ न कुछ बदलाव कर देते हैं, इससे हर अभिभावक को नई किताबें ही खरीदनी पड़ती हैं।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि यह किताबें भी अभिभावकों को ज्यादातर स्कूलों में या फिर स्कूल की ओर से तय किए गए पुस्तक विक्रेता के पास से ही खरीदनी पड़ती हैं, जबकि शिक्षा विभाग का आदेश है कि हर साल सिलेबस नहीं बदला जाए, लेकिन कमीशन के चक्कर में कई निजी स्कूल हर साल किताबें बदल देते हैं, जिसका खामियाजा अभिभावकों की जेब पर पड़ता है।
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