भाईचारे की पंचायत: खेत में काम कर रहा था कप्तान, ग्रामीणों ने दी सूचना- भाई तेरी घर आली सरपंच बणा दी है
हसनपुर गांव के लोगों ने भाईचारे की मिसाल पेश की है। पंचायत में मौजूद नहीं होने के बावजूद महिला रीना के नाम पर सहमति बना दी। लोगों ने लड्डू खिलाकर उन्हें बधाई दी। इसके बाद ही कप्तान को सच्चाई पर यकीन हुआ।
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हरियाणा के जींद के गांव हसनपुर में रविवार को गांव के लोग सरपंच पद के लिए किसी एक नाम पर सहमति जताने का प्रयास कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ कप्तान ढाका खेत में इन सबसे बेखबर धान की कंबाइन के साथ कटाई कर रहे थे। गांव के कुछ लोग कप्तान ढाका के पास पहुंचे और कहा कि भाई! तेरी घर आली सरपंच बणा दी है, गाम म्ह तोला आ ज्या। इस पर कप्तान ने कहा कि क्यों मजाक करते हो भाई, हम तो सरपंच बनने की रेस में भी नहीं हैं। जब वह गांव में पहुंचे तो लोगों ने लड्डू खिलाकर उन्हें बधाई दी। इसके बाद ही कप्तान को सच्चाई पर यकीन हुआ।
नौ पंचों के नाम पर भी बनी सर्वसम्मति
हसनपुर गांव में लगभग 1200 मतदाता हैं। इसमें ढाका गोत्र के 140 मतदाता हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों ने पंचायत में ढाका परिवार की ही महिला रीना देवी को गांव का सरपंच चुनकर भाईचारे की मिसाल कायम की है। गांव के लोगों ने गांव में चुने जाने वाले नौ पंचों के नाम भी सर्वसम्मति से फाइनल कर दिए।
पिछले चुनाव में उम्मीदवारों ने खर्च की थी ज्यादा राशि, इसलिए बनाई सर्वसम्मति
ग्रामीणों ने कहा कि जिन नामों पर सहमति हुई है, उनके ही नामांकन करवाए जाएंगे। पिछली बार हुए चुनाव में गांव में सरपंच पद के उम्मीदवारों ने काफी रुपये खर्च किए थे। इससे ग्रामीण काफी परेशान हो गए थे। ग्रामीणों ने कहा कि इतने रुपये खर्च करके सरपंच बनना कोई सही बात नहीं है। इसलिए अगली बार जब पंचायत चुनाव होंगे तो सर्वसम्मति से फैसला किया जाएगा। इसी कारण ग्रामीणों ने पंचायत में यह फैसला किया है। पंचायत में 36 बिरादरी के लोग मौजूद थे। पूर्व सरपंच आजाद सिंह, रामनिवास, ब्लॉक समिति के पूर्व सदस्य कृष्ण, पूर्व सरपंच इंद्र सिंह, सत्यवान, कप्तान सिंह ने कहा कि गांव ने भाईचारे को कायम किया है।
एक ही दिन में तीन गांवों में बनी सर्वसम्मति
जींद। पंचायत चुनाव में जींद जिला सौहार्द की नजीर कायम करने की राह पर है। रविवार को हसनपुर, हैबतपुर दरोली खेड़ा में सर्वसम्मति से सरपंच और पंचों के नाम पर सहमति बनी। हैबतपुर में ऋषिपाल सिहाग, हसनपुर में रीना और दरोली खेड़ा में सुमन के नाम पर ग्रामीणों ने सर्वसम्मति की मुहर लगाई।
इससे पहले रूपगढ़ व सफाखेड़ी गांव में भी सरपंचों के नामों पर फैसले हो चुके हैं। पिछले सप्ताह सबसे पहले रूपगढ़ गांव में भाईचारे की मिसाल पेश की गई थी। इसके बाद अब तक पांच गांवों में भाईचारे की पंचायतें हो चुकी हैं। इनमें सरपंच व पंचों के नाम फाइनल कर दिए गए हैं। इन गांवों में जिन नामों पर सहमति हुई है, उनके ही नामांकन करवाए जाएंगे।
वहीं गोसाई खेड़ा में भी रविवार को सर्वसम्मति के प्रयास किए गए लेकिन बात सिरे नहीं चढ़ी। जिले के कुछ गांव ऐसे भी हैं, जहां पर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सर्वसम्मति से फैसले लिए जाएंगे। जिन लोगों पर सहमति बनेगी, उनके नामांकन रखे जाएंगे, बाकी के वापस करवाए जाएंगे।
पंचायत के चुनाव भाईचारे के चुनाव हैं। जिन गांवों में सरपंच के लिए एक-एक नामांकन आएगा, उन गांवों को सरकार की तरफ से 11-11 लाख रुपये दिए जाएंगे। -डॉ. मनोज कुमार, उपायुक्त
रीना के नाम पर क्यों सहमति बनी
ढाका परिवार के लोग गांव में बहुत कम संख्या में हैं। आज तक इनके परिवार से कोई भी सरपंच नहीं चुना गया था। इसलिए ग्रामीणों ने भाईचारे की पहल करते हुए इस परिवार की महिला रीना के नाम पर सहमति जता दी।