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नहीं मिल पाएगी फरवरी महीने में मरीजों को आईसीयू की सुविधा
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नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में बना आईसीयू।
- फोटो : Jind
नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में जनवरी महीने में बनकर तैयार हो चुके आईसीयू की सुविधा मरीजों को फरवरी महीने में भी मिलनी मुश्किल नजर आ रही है। आईसीयू के अंदर का कार्य पूरा हो गया लेकिन बाहरी सिविल कार्य अभी अधूरा है। जिला स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य निदेशालय से बजट की मांग भेजी है। मार्च महीने के पहले सप्ताह में ही आईसीयू की सुविधा मरीजों को मिल जाएगी। आईसीयू बनने के लिए स्वास्थ्य विभाग के सामने स्टाफ की दिक्कत भी आएगी।
अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के प्रथम तल पर 18 बेड का आईसीयू बनकर लगभग तैयार है। इसमें आईसीयू के बाहर का सिविल कार्य अभी अधूरा है। इस कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग से पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने 16 लाख 53 हजार रुपये की मांग की है। हालांकि कार्य अभी भी चल रहा है लेकिन पूरा कार्य पैसे मिलने के बाद ही होगा। इसके अलावा आईसीयू में मशीनों को स्थापित किया जा रहा है। इन 18 बेड में चार बेड बच्चों के लिए होंगे जबकि 10 बेड गंभीर मरीजों के लिए उपलब्ध होंगे। चार बेड वेंटिलेटर से हटाने के बाद निगरानी में रखे जाने वाले मरीजों के लिए उपलब्ध होंगे। आईसीयू का कार्य दूसरी लहर के शुरुआत में ही शुरू हो गया था।
स्टाफ कम होने से आईसीयू चलाने में आएगी परेशानी
18 बेड के आईसीयू चलाने के लिए कम से कम 20 स्टाफ नर्स की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा इतने ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की जरूरत होगी। अस्पताल प्रशासन के पास पहले ही पेरा मेडिकल स्टाफ की कमी है। आईसीयू में गंभीर मरीजों को रखा जाएगा इसलिए इसमें स्टाफ की भी अधिक आवश्यकता होगी। आईसीयू तैयार होने के बाद स्टाफ की डिमांड भी स्वास्थ्य निदेशालय के पास भेजी जाएगी।
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आईसीयू बनकर लगभग तैयार हो चुका है। इसमें कुछ बाहरी सिविल कार्य बाकी है। फरवरी महीने में ही सारा कार्य पूरा हो जाएगा। स्वास्थ्य निदेशालय से बजट की मांग की गई है। स्टाफ की भी व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पड़ी तो स्टाफ की डिमांड भी की जाएगी। आईसीयू बनने के बाद जिले के लोगों को इसका काफी लाभ होगा।
-डॉ. लोकवीर, पीएमओ।
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अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के प्रथम तल पर 18 बेड का आईसीयू बनकर लगभग तैयार है। इसमें आईसीयू के बाहर का सिविल कार्य अभी अधूरा है। इस कार्य के लिए स्वास्थ्य विभाग से पीडब्ल्यूडी बीएंडआर ने 16 लाख 53 हजार रुपये की मांग की है। हालांकि कार्य अभी भी चल रहा है लेकिन पूरा कार्य पैसे मिलने के बाद ही होगा। इसके अलावा आईसीयू में मशीनों को स्थापित किया जा रहा है। इन 18 बेड में चार बेड बच्चों के लिए होंगे जबकि 10 बेड गंभीर मरीजों के लिए उपलब्ध होंगे। चार बेड वेंटिलेटर से हटाने के बाद निगरानी में रखे जाने वाले मरीजों के लिए उपलब्ध होंगे। आईसीयू का कार्य दूसरी लहर के शुरुआत में ही शुरू हो गया था।
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स्टाफ कम होने से आईसीयू चलाने में आएगी परेशानी
18 बेड के आईसीयू चलाने के लिए कम से कम 20 स्टाफ नर्स की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा इतने ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की जरूरत होगी। अस्पताल प्रशासन के पास पहले ही पेरा मेडिकल स्टाफ की कमी है। आईसीयू में गंभीर मरीजों को रखा जाएगा इसलिए इसमें स्टाफ की भी अधिक आवश्यकता होगी। आईसीयू तैयार होने के बाद स्टाफ की डिमांड भी स्वास्थ्य निदेशालय के पास भेजी जाएगी।
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आईसीयू बनकर लगभग तैयार हो चुका है। इसमें कुछ बाहरी सिविल कार्य बाकी है। फरवरी महीने में ही सारा कार्य पूरा हो जाएगा। स्वास्थ्य निदेशालय से बजट की मांग की गई है। स्टाफ की भी व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पड़ी तो स्टाफ की डिमांड भी की जाएगी। आईसीयू बनने के बाद जिले के लोगों को इसका काफी लाभ होगा।
-डॉ. लोकवीर, पीएमओ।