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सामुदायिक स्वास्थ्य जुलाना में मरीजों को नहीं मिल रही पर्याप्त ऑक्सीजन
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुलाना में सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों को भटकना पड़ रहा है। एक दिन में केवल 80 से 100 सैंपल वायल आती है। जबकि सैंपलिंग करवाने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा होती है। वायल खत्म होने के बाद मरीजों को बिना सैंपल करवाए ही लौटना पड़ता है। वहीं मरीजों को ऑक्सीजन भी उपलब्ध नहीं हो पाती है, जिसकी वजह से यहां मरीजों को दाखिल नहीं किया जा रहा है।
जुलाना क्षेत्र में 227 कोरोना के एक्टिव केस हैं। पिछले साल के मुकाबले कोरोना के जुलाना में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। जुलाना के अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन के लिए भी भटकना पड़ रहा है। लेकिन ऑक्सीजन के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लीपापोती करते नजर आ रहे हैं। जुलाना में रोजाना तीन सिलिंडर ऑक्सीजन ही उपलब्ध होती है। जबकि अस्पताल में दस से बारह मरीज दाखिल होते हैं। तीन सिलिंडर केवल आठ से दस घंटे ही चल पाते हैं। ऐसे में मरीजों को जींद या रोहतक रेफर किया जाता है। एक ओर तो कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है तो दूसरी और स्वास्थ्य विभाग यहां पर कोई सुविधा नहीं बढ़ा रहा है। जुलाना क्षेत्र में अब तक कोरोना संक्रमण से 12 लोगों की मौत हो चुकी है।
आरटीपीसीआर सैंपल के लिए वायल की कमी को लेकर विभाग को अवगत करवाया गया है। जितनी वायल मिलती है, उतने ही सैंपल किए जा रहे हैं। यहां ऑक्सीजन का जितना कोटा है उतना पहुंच रहा है। मरीजों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने दी जा रही है।
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डॉ. नरेश वर्मा, एसएमओ जुलाना
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जुलाना क्षेत्र में 227 कोरोना के एक्टिव केस हैं। पिछले साल के मुकाबले कोरोना के जुलाना में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। जुलाना के अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन के लिए भी भटकना पड़ रहा है। लेकिन ऑक्सीजन के मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी लीपापोती करते नजर आ रहे हैं। जुलाना में रोजाना तीन सिलिंडर ऑक्सीजन ही उपलब्ध होती है। जबकि अस्पताल में दस से बारह मरीज दाखिल होते हैं। तीन सिलिंडर केवल आठ से दस घंटे ही चल पाते हैं। ऐसे में मरीजों को जींद या रोहतक रेफर किया जाता है। एक ओर तो कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है तो दूसरी और स्वास्थ्य विभाग यहां पर कोई सुविधा नहीं बढ़ा रहा है। जुलाना क्षेत्र में अब तक कोरोना संक्रमण से 12 लोगों की मौत हो चुकी है।
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आरटीपीसीआर सैंपल के लिए वायल की कमी को लेकर विभाग को अवगत करवाया गया है। जितनी वायल मिलती है, उतने ही सैंपल किए जा रहे हैं। यहां ऑक्सीजन का जितना कोटा है उतना पहुंच रहा है। मरीजों को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आने दी जा रही है।
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डॉ. नरेश वर्मा, एसएमओ जुलाना