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Jind News: कभी मालवी के कुएं से बुझती थी शाही परिवार की प्यास, आज ग्रामीण बूंद-बूंद को तरसे

Sat, 29 Mar 2025 11:15 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 29 Mar 2025 11:15 PM IST
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Once the royal family's thirst was quenched by Malvi's well, today the villagers yearn for every drop
29जेएनडी28-मालवी गांव का कुआं, जिसका जींद के राजा पानी पीते थे। संवाद - फोटो : सौ शैया अस्पताल के पास खड़ी नई एंबुलेंस।
फोटो 29जेएनडी28,30,31:
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कभी मालवी के कुएं से बुझती थी शाही परिवार की प्यास, आज ग्रामीण बूंद-बूंद को तरसे
--19वीं सदी में राजा के परिवार के लिए सफेद कुआं था आरक्षित, दूसरे से ग्रामीण भरते थे पानी

कर्मवीर

जुलाना। जिला मुख्यालय से 34 किलोमीटर मालवी गांव की अपनी गाथा है। वह अपने अंदर कई सदियों पुराना इतिहास समेटे हुए है। यह गांव जितना जिले से दूर है, उतना ही मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। कभी इस गांव से जींद के राजा के परिवार के लिए पीने के लिए पानी जाता था, वहीं आज उसी गांव के लोग एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। गांव में पेयजल के लिए कोई खास प्रबंध नहीं है। माइनर के माध्यम से ही पेयजल सप्लाई होती है।

18वीं और 19वीं सदी की बात है, जब गांव में दो कुएं होते थे। एक को सफेद कुआं कहा जाता था तो एक को काला कुआं कहा जाता था। काले कुएं का पानी ग्रामीण पीते थे और सफेद कुएं का पानी जींद रियासत के राजा रघुबीर सिंह के शाही परिवार के लिए ले जाया जाता था। सफेद कुआं शाही परिवार के लिए आरक्षित था। केवल शाही परिवार के लोग ही उसका पानी पी सकते थे। आजादी के बाद उस कुएं को ग्रामीणों के हवाले किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि अपने पूर्वजों से सुना था कि सफेद कुएं का पानी पीने से तिली रोग मिट जाते थे। धीरे-धीरे समय बदलता गया और समय के साथ दोनों कुएं रद्द हो गए। अब यह गांव सरकार और प्रशासन की अनदेखी का शिकार हो रहे हैं। हालांकि ग्रामीणों की पेयजल किल्लत को दूर करने के लिए प्रशासन ने जलघर और बुस्टर भी बनाए गए हैं लेकिन पेयजल की व्यवस्था को देखते हुए दोनों ही सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। जलघर में करसोला माइनर से पानी आता है, लेकिन माइनर में पानी 21 दिन बाद आता है। ऐसे में जलघर और टैंकों का पानी एक सप्ताह तक भी नहीं चल पाता। फिर अन्य दिन जलघर और बुस्टर में जमीनी पानी ही प्रयोग किया जाता है। ट्यूबवैल का पानी का टीडीएस इतना ज्यादा है कि यह पानी प्रयोग में नहीं लाया जा सकता।
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बॉक्स

कई बार दी शिकायत, नहीं हुआ समाधान

पेयजल किल्लत को लेकर कई बार शिकायत भी दी गई, लेकिन कोई भी समाधान नहीं हो पाया। ग्रामीणों की प्रशासन और सरकार से मांग है कि उन्हें स्वच्छ पेयजल मुहैया करवाया जाए, ताकि उन्हें हो रही परेशानियों से निजात मिल सके।
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--धर्मेंद्र सिंह, ग्रामीण मालवी
बॉक्स

पानी का कैंपर खरीद कर चला रहे काम

पेयजल किल्लत इतनी भयंकर है कि लोगों को 15 रुपयेे प्रति कैंपर खरीद कर काम चलाना पड़ रहा है। इसका सीधा असर ग्रामीणों की जेब पर पड़ रहा है। प्रशासन पर ग्रामीणों की समस्या को लेकर कानों पर जूं तक नही रैंग रही है। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें पानी उपलब्ध करवाया जाए।

--अशोक कुमार, पंच, मालवी
वर्जन

पेयजल किल्लत का समाधान करवाया जाएगा। अबकि बार नहर लेट आएगी तो पानी कम दिया जा रहा है। ग्रामीणों को समस्या ना हो इसके लिए ट्यूबवैल द्वारा पानी दिया जा रहा है।


---सतीश नैन, एसडीओ जनस्वास्थ्य विभाग जुलाना।

29जेएनडी28-मालवी गांव का कुआं, जिसका जींद के राजा पानी पीते थे। संवाद

29जेएनडी28-मालवी गांव का कुआं, जिसका जींद के राजा पानी पीते थे। संवाद- फोटो : सौ शैया अस्पताल के पास खड़ी नई एंबुलेंस।

29जेएनडी28-मालवी गांव का कुआं, जिसका जींद के राजा पानी पीते थे। संवाद

29जेएनडी28-मालवी गांव का कुआं, जिसका जींद के राजा पानी पीते थे। संवाद- फोटो : सौ शैया अस्पताल के पास खड़ी नई एंबुलेंस।

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