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जो हमारे साथ नहीं, हम उसके साथ नहीं : मलिक
ब्यूरो/ अमर उजाला, जींद
Updated Mon, 27 Feb 2017 12:05 AM IST
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ट्रेक्टर पर आगे बैठकर नारेबाजी करते महिला धरने पर जाते हुए।
- फोटो : jind
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि जो हमारे साथ नहीं, हम भी उसके साथ नहीं आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। जो दुकानदार अपनी दुकानों के बोर्ड पर जाटों के न्याय के साथ होने का पर्चा नहीं लगाएगा उस दुकान से जाट समुदाय के लोग सामान नहीं खरीदेंगे। इसलिए जिस भी दुकान से जाट समुदाय सामान खरीदता है, उसे बता दें कि एक मार्च के बाद पर्चा नहीं लगाने पर उसकी दुकान से सामान नहीं खरीदा जाएगा। इसके अलावा एक मार्च से असहयोग आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो एक मार्च के बाद बिजली, पानी के बिल व बैंकों से लिए लोन की राशि का भुगतान नहीं किया जाएगा।
मलिक रविवार को गांव ईक्कस में चल रहे जाट समुदाय के धरने पर मनाए गए काले दिवस को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान काफी संख्या में महिला एवं पुरुष काले कपड़े पहनकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि दो मार्च के बाद जाट आंदोलन की बागडोर युवाओं के हाथों में होगी। दिल्ली घेराव के बाद आंदोलन के ट्रैक्टर का हैंडल युवाओं के हाथों में दे दिया जाएगा। इसके बाद युवा ही तय करेंगे कि आंदोलन को किस तरीके से चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दो मार्च को दिल्ली में कूच किया जाएगा और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। अगर दिल्ली कूच के दौरान फोर्स उनको रोकती है तो उसी मार्ग पर धरने पर बैठ जाना।
दिल्ली कूच के बाद महिलाएं संभालेगी धरनों का मोर्चा
मलिक ने कहा कि जाट समुदाय के लोग दिल्ली में कूच करने के बाद धरनों का मोर्चा महिलाएं संभालेंगी। मलिक ने कहा कि जाट समुदाय के लोग 36 बिरादरी के लोगों को साथ लेकर एक दिन की दूध की सप्लाई को बंद करेंगे। इसकी तारीख का एलान जल्द ही कर दिया जाएगा। वहीं, मलिक ने कहा कि एक मार्च से नरवाना के दनौदा गांव में दूसरा धरना शुरू किया जाएगा।
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इस दौरान यशपाल मलिक ने राजकुमार सैनी द्वारा अपने आपको तोते की बजाय बाज बताने पर कहा कि राजकुमार सैनी पहले भी इंसान नहीं था और आज भी इंसान नहीं है। इस प्रकार के लोगों के लिए केवल भाईचारा बिगाड़ना ही मुख्य उद्देश्य होता है।
हमारे युवकों की रिहाई की नहीं करते मांग
समिति के राष्ट्रीय महासचिव अशोक बल्हारा ने कहा कि सरकार से हमने अब जेल में बंद युवाओं को रिहा करने की मांग को छोड़ दिया है। अगर सरकार जाट युवाओं को रिहा नहीं करती तो जाट समाज के महापुरुषों की मूर्तियां तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किए जाए। सरकार ने जाट धर्मशालाओं को तोड़ने वाले लोगों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
पत्रकारों से किया दुर्व्यवहार, मलिक ने मांगी माफी
यशपाल मलिक जब धरने को संबोधित कर रहे थे तो इसी दौरान कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ भीड़ में बैठे एक व्यक्ति ने दुर्व्यवहार किया। पत्रकारों की तरफ से यह मामला यशपाल मलिक के सामने रखा तो उसने दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगी और कहा कि वह मीडिया का सम्मान करते हैं। इसके लिए कमेटी को भी दिशा निर्देश दिए जाएंगे कि वह पत्रकारों से किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं होने दें। इस दौरान दो दिन पहले समिति के जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल द्वारा मीडिया के बारे में टिप्पणी करने पर भी यशपाल मलिक ने माफी मांगी।
दूसरे रास्तों से निकाली गईं बसें, इंटरनेट सेवाएं बाधित
जाट आरक्षण आंदोलन के मद्देनजर रविवार को कई रूटों पर रोडवेज की बस सेवा प्रभावित रहीं। इन रूटों पर सीधी बस नहीं चलाकर दूसरे रास्ते पर चला गया। कैथल रूट पर बस ढांड, पुंडरी के रास्ते भेजी गई। बरवाला व हिसार रूट की बसों को भी अन्य रास्तों से भेजा गया। हिसार रूट पर बसों को सिर्फ हांसी तक ही चलाया गया। कुछ बसों को हिसार के लिए बरवाला के रास्ते चलाया गया। कैथल रूट की अधिकतर बसें भी कसान गांव तक ही चली। चंडीगढ़ जाने वाली सभी बसें असंध, करनाल व पानीपत के रास्ते भेजी गईं। वहीं, एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाएं भी सुबह 10 बजे से शाम साढ़े छह बजे तक बंद रहीं।
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मलिक रविवार को गांव ईक्कस में चल रहे जाट समुदाय के धरने पर मनाए गए काले दिवस को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान काफी संख्या में महिला एवं पुरुष काले कपड़े पहनकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि दो मार्च के बाद जाट आंदोलन की बागडोर युवाओं के हाथों में होगी। दिल्ली घेराव के बाद आंदोलन के ट्रैक्टर का हैंडल युवाओं के हाथों में दे दिया जाएगा। इसके बाद युवा ही तय करेंगे कि आंदोलन को किस तरीके से चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि दो मार्च को दिल्ली में कूच किया जाएगा और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। अगर दिल्ली कूच के दौरान फोर्स उनको रोकती है तो उसी मार्ग पर धरने पर बैठ जाना।
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दिल्ली कूच के बाद महिलाएं संभालेगी धरनों का मोर्चा
मलिक ने कहा कि जाट समुदाय के लोग दिल्ली में कूच करने के बाद धरनों का मोर्चा महिलाएं संभालेंगी। मलिक ने कहा कि जाट समुदाय के लोग 36 बिरादरी के लोगों को साथ लेकर एक दिन की दूध की सप्लाई को बंद करेंगे। इसकी तारीख का एलान जल्द ही कर दिया जाएगा। वहीं, मलिक ने कहा कि एक मार्च से नरवाना के दनौदा गांव में दूसरा धरना शुरू किया जाएगा।
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इस दौरान यशपाल मलिक ने राजकुमार सैनी द्वारा अपने आपको तोते की बजाय बाज बताने पर कहा कि राजकुमार सैनी पहले भी इंसान नहीं था और आज भी इंसान नहीं है। इस प्रकार के लोगों के लिए केवल भाईचारा बिगाड़ना ही मुख्य उद्देश्य होता है।
हमारे युवकों की रिहाई की नहीं करते मांग
समिति के राष्ट्रीय महासचिव अशोक बल्हारा ने कहा कि सरकार से हमने अब जेल में बंद युवाओं को रिहा करने की मांग को छोड़ दिया है। अगर सरकार जाट युवाओं को रिहा नहीं करती तो जाट समाज के महापुरुषों की मूर्तियां तोड़ने वाले लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज किए जाए। सरकार ने जाट धर्मशालाओं को तोड़ने वाले लोगों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की।
पत्रकारों से किया दुर्व्यवहार, मलिक ने मांगी माफी
यशपाल मलिक जब धरने को संबोधित कर रहे थे तो इसी दौरान कवरेज कर रहे पत्रकार के साथ भीड़ में बैठे एक व्यक्ति ने दुर्व्यवहार किया। पत्रकारों की तरफ से यह मामला यशपाल मलिक के सामने रखा तो उसने दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगी और कहा कि वह मीडिया का सम्मान करते हैं। इसके लिए कमेटी को भी दिशा निर्देश दिए जाएंगे कि वह पत्रकारों से किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं होने दें। इस दौरान दो दिन पहले समिति के जिलाध्यक्ष वीरभान ढुल द्वारा मीडिया के बारे में टिप्पणी करने पर भी यशपाल मलिक ने माफी मांगी।
दूसरे रास्तों से निकाली गईं बसें, इंटरनेट सेवाएं बाधित
जाट आरक्षण आंदोलन के मद्देनजर रविवार को कई रूटों पर रोडवेज की बस सेवा प्रभावित रहीं। इन रूटों पर सीधी बस नहीं चलाकर दूसरे रास्ते पर चला गया। कैथल रूट पर बस ढांड, पुंडरी के रास्ते भेजी गई। बरवाला व हिसार रूट की बसों को भी अन्य रास्तों से भेजा गया। हिसार रूट पर बसों को सिर्फ हांसी तक ही चलाया गया। कुछ बसों को हिसार के लिए बरवाला के रास्ते चलाया गया। कैथल रूट की अधिकतर बसें भी कसान गांव तक ही चली। चंडीगढ़ जाने वाली सभी बसें असंध, करनाल व पानीपत के रास्ते भेजी गईं। वहीं, एहतियात के तौर पर इंटरनेट सेवाएं भी सुबह 10 बजे से शाम साढ़े छह बजे तक बंद रहीं।