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लंपी स्किन वायरस का मामला नहीं, अर्लट मोड में पशुपालन विभाग
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एक पशुबाड़े में बंधे पशु। संवाद।
- फोटो : Jind
जींद। पंजाब के पशुओं में आई लंपी स्किन वायरस की बीमारी का फिलहाल जींद जिले में कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके बावजूद पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। पशु चिकित्सकों ने पशुपालकों को अपने पशुओं पर मच्छरदानी के प्रयोग की सलाह दी है।
वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. बलमत ने कहा कि फिलहाल जिले में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। उनके पास इस तरह की कोई शिकायत भी नहीं आई है। इसके बावजूद पशुपालन विभाग पूरी तरह से इस वायरस पर नजर रखे हुए है। पशुपालन मुख्यालय की तरफ से उनके पास इस पर नजर रखने के निर्देश मिले हैं। यह बीमारी कोई हवा से नहीं फैलती। यह डांस मक्खी द्वारा फैलती है। जब एक डांस मक्खी एक पशु का खून चूसती है और वह दूसरे पर बैठ जाती है तो यह बीमारी फैलती है। इसलिए अपने पशुओं पर मच्छरदानी लगाए रखनी चाहिए। इसमें सबसे पहले पशु की गर्दन पर धब्बेनुमा दाग हो जाते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे यह पशु से अन्य शरीर पर भी फैल जाते हैं। इसमें पशु चारा खाना छोड़ देता है तथा धीरे-धीरे उसके शरीर में कमजोरी आती है और वह दूध देना भी बंद कर सकता है। पीड़ित पशुओं व उनसे संबंधित सामान को बाकी पशुओं से अलग करना चाहिए। संक्रमित पशुओं को इधर से उधर नहीं ले जाना चाहिए। पशुओं पर लगने वाले मक्खी, मच्छर, चिचड़ों की रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मिले हैं निर्देश
डॉ. बलमत ने कहा कि शुक्रवार को पूरे प्रदेश के पशु चिकित्सकों की मुख्यालय के साथ वीडियो कांफ्र्रेंसिंग हुई है। इसमें इस बीमारी से बचाव व उपचार के विशेष निर्देश मिले हैं। पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। फिलहाल इस रोग की कोई वैक्सीन नहीं है। यदि पशु बीमारी हो जाए तो उसको बुखार की दवाई दी जा सकती है।
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वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. बलमत ने कहा कि फिलहाल जिले में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। उनके पास इस तरह की कोई शिकायत भी नहीं आई है। इसके बावजूद पशुपालन विभाग पूरी तरह से इस वायरस पर नजर रखे हुए है। पशुपालन मुख्यालय की तरफ से उनके पास इस पर नजर रखने के निर्देश मिले हैं। यह बीमारी कोई हवा से नहीं फैलती। यह डांस मक्खी द्वारा फैलती है। जब एक डांस मक्खी एक पशु का खून चूसती है और वह दूसरे पर बैठ जाती है तो यह बीमारी फैलती है। इसलिए अपने पशुओं पर मच्छरदानी लगाए रखनी चाहिए। इसमें सबसे पहले पशु की गर्दन पर धब्बेनुमा दाग हो जाते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे यह पशु से अन्य शरीर पर भी फैल जाते हैं। इसमें पशु चारा खाना छोड़ देता है तथा धीरे-धीरे उसके शरीर में कमजोरी आती है और वह दूध देना भी बंद कर सकता है। पीड़ित पशुओं व उनसे संबंधित सामान को बाकी पशुओं से अलग करना चाहिए। संक्रमित पशुओं को इधर से उधर नहीं ले जाना चाहिए। पशुओं पर लगने वाले मक्खी, मच्छर, चिचड़ों की रोकथाम के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।
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वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मिले हैं निर्देश
डॉ. बलमत ने कहा कि शुक्रवार को पूरे प्रदेश के पशु चिकित्सकों की मुख्यालय के साथ वीडियो कांफ्र्रेंसिंग हुई है। इसमें इस बीमारी से बचाव व उपचार के विशेष निर्देश मिले हैं। पशुपालन विभाग पूरी तरह से अलर्ट है। फिलहाल इस रोग की कोई वैक्सीन नहीं है। यदि पशु बीमारी हो जाए तो उसको बुखार की दवाई दी जा सकती है।
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