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Jind News: तीन शुभ योग में मनाई जाएगी निर्जला एकादशी
Sat, 15 Jun 2024 11:42 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 15 Jun 2024 11:42 PM IST
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15जेएनडी23 : जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री। संवाद
जींद। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस बार निर्जला एकादशी 17 जून को है, जबकि अगले दिन 18 जून को व्रत रखा जाएगा। एकादशी के व्रत से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी पर तीन शुभ योग बन रहे हैं। शिव योग दिनभर रहकर रात 9 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग लग जाएगा। दोपहर में 3 बजकर 56 मिनट से अगले दिन सुबह 5 बजकर 24 मिनट तक त्रिपुष्कर योग रहेगा। निर्जला एकादशी पर दान का बहुत महत्व होता है।
सनातन धर्म में एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि की प्राप्ति के लिए श्रद्धालु व्रत रखते हैं। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत 18 जून को है। इस व्रत को देवव्रत भी कहा जाता है, क्योंकि सभी अपनी रक्षा और श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह की निर्जला एकादशी को पानी पिलाकर सेवा करना पुण्य का भागीदार माना जाता है। इससे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यूं तो साल में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को सर्वोत्तम माना गया है। इस एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जानते हैं। श्रद्धालु इसी विश्वास को सार्थक करते हुए निर्जला एकादशी पर जगह-जगह मीठे पानी की छबीलें लगाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अराधना का भी विशेष महत्व है। साथ ही एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक निर्जल (बिना पानी के) व्रत रखने का महत्व है। कहते हैं कि निर्जला एकादशी पर उपवास रखकर आप पूरे वर्ष में आने वाली सभी 24 एकादशी का फल प्राप्त कर सकते हैं।
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हिंदू पंचांग के अनुसार निर्जला एकादशी पर तीन शुभ योग बन रहे हैं। शिव योग दिनभर रहकर रात 9 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सिद्ध योग लग जाएगा। दोपहर में 3 बजकर 56 मिनट से अगले दिन सुबह 5 बजकर 24 मिनट तक त्रिपुष्कर योग रहेगा। निर्जला एकादशी पर दान का बहुत महत्व होता है।
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सनातन धर्म में एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इसके अलावा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि की प्राप्ति के लिए श्रद्धालु व्रत रखते हैं। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली निर्जला एकादशी का व्रत 18 जून को है। इस व्रत को देवव्रत भी कहा जाता है, क्योंकि सभी अपनी रक्षा और श्री विष्णु की कृपा पाने के लिए एकादशी का व्रत करते हैं। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह की निर्जला एकादशी को पानी पिलाकर सेवा करना पुण्य का भागीदार माना जाता है। इससे स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यूं तो साल में कुल 24 एकादशी तिथियां आती हैं, लेकिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को सर्वोत्तम माना गया है। इस एकादशी को निर्जला एकादशी के नाम से जानते हैं। श्रद्धालु इसी विश्वास को सार्थक करते हुए निर्जला एकादशी पर जगह-जगह मीठे पानी की छबीलें लगाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अराधना का भी विशेष महत्व है। साथ ही एकादशी के सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक निर्जल (बिना पानी के) व्रत रखने का महत्व है। कहते हैं कि निर्जला एकादशी पर उपवास रखकर आप पूरे वर्ष में आने वाली सभी 24 एकादशी का फल प्राप्त कर सकते हैं।

15जेएनडी23 : जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री। संवाद
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