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Jind News: 25 जून को निर्जला एकादशी, व्रत का विशेष महत्व
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फोटो 23जेएनडी30-अशोक शर्मा महाराजा अग्रसेन पुजारी।
उचाना। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर 25 जून को निर्जला एकादशी मनाई जाएगी। इस अवसर पर भगवान विष्णु की आराधना, व्रत और दान का विशेष महत्व माना जाता है।
अग्रसेन मंदिर के पुजारी अशोक शर्मा ने बताया कि निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु का व्रत रखते हैं।
पुजारी ने बताया कि मान्यता है कि जो व्यक्ति वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस व्रत का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है, जब महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर भीमसेन ने निर्जला एकादशी का व्रत किया था।
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अशोक शर्मा ने बताया कि इस दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है। साथ ही जरूरतमंदों को जल, फल, वस्त्र, छाता और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यकारी माना गया है।
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अग्रसेन मंदिर के पुजारी अशोक शर्मा ने बताया कि निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ और फलदायी माना गया है। इस दिन श्रद्धालु बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु का व्रत रखते हैं।
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पुजारी ने बताया कि मान्यता है कि जो व्यक्ति वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस व्रत का उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है, जब महर्षि वेदव्यास के निर्देश पर भीमसेन ने निर्जला एकादशी का व्रत किया था।
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अशोक शर्मा ने बताया कि इस दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भजन-कीर्तन का विशेष महत्व है। साथ ही जरूरतमंदों को जल, फल, वस्त्र, छाता और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यकारी माना गया है।