Parliament: किसान आंदोलन में भी सक्रिय थी नीलम, परिजन बोले- पढ़ने के बाद भी रोजगार न मिलने पर किया होगा ऐसा
नीलम के परिजनों के मुताबिक नीलम बीए, एमए, एम फिल, नेट क्वालीफाइड, सीटेट, एचटेट क्वालीफाई है। वह हिसार पीजी में रह कर हरियाणा सिविल सविर्सेज की तैयारी कर रही है।
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दिल्ली में संसद भवन के बाहर पकड़ी गई लड़की नीलम जींद जिले के उचाना के गांव घसो खुर्द की रहने वाली है। नीलम इस समय हरियाणा सिविल सविर्सेज की तैयारी के लिए हिसार के पीजी में रह रही थी। 25 नवंबर को घर से पीजी के लिए निकली थी। नीलम के पिता कोहर सिंह उचाना मंडी में हलवाई का काम करते हैं। नीलम के परिवार में तीन बहनें, दो भाई व माता-पिता हैं। उनके चाचा गांव में किराना की दुकान चलाते हैं। नीलम के भाई ने कहा कि वह बहुत पढ़ी लिखी है। वह बेरोजगारी के खिलाफ है। वह किसान आंदोलन के दौरान गांव वालों के साथ ही आंदोलन में जाती थी। अब बड़े भाई ने उनके बारे में बताया कि वह गिरफ्तार हो गई है।
गांव में चलाती थी लाइब्रेरी, संगठन बनाने की भी चर्चा
पिछले दिनों नीलम गांव में लाइब्रेरी चला रही थी और बच्चों को पढ़ाती थी लेकिन गांव के कुछ लोगों ने इस पर एतराज जताया था। इसके बाद नीलम ने बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया था। नीलम किसान आंदोलन से लेकर दूसरे धरने और प्रदर्शनों में भी काफी एक्टिव रही हैं। चर्चा है कि नीलम प्रगतिशील आजाद युवा संगठन की संस्थापक है। लेकिन परिवार वालों का कहना है कि वह किसी संगठन से नहीं जुड़ी थी।
सुबह हुई थी मां से फोन पर बात
नीलम की मां सरस्वती ने बताया कि उसकी बेटी के साथ सुबह बात हुई थी। नीलम कह रही थी कि ध्यान से दवा लेकर आ जाना। उन्हें नहीं पता था कि वह दिल्ली गई हुई है। उन्हें नहीं पता किस तरह से उसने यह कदम उठाया। हो सकता है नौकरी के लिए बेशक ऐसा किया हो। वैसे और कुछ कारण नहीं हो सकता। नीलम के परिवार के लोगों का कहना है कि वह बीए, एमए, एम फिल, नेट क्वालीफाइड, सीटेट, एचटेट क्वालीफाई है। फिलहाल हिसार के पीजी में रह कर तैयारी कर रही थी। किसान आंदोलन में भी वह काफी सक्रिय रही। नीलम बेरोजगारी, छात्राओं के साथ नाइंसाफी के खिलाफ रही है।
17 साल पहले गांव के 11 लोगों पर हुआ था देशद्रोह का मुकदमा
घसो खुर्द गांव में 17 साल पहले माओवादी विचारधारा देखने को मिली थी। कुछ लोगों को गांव की दीवारों पर माओवादी विचारधारा के स्लोगन लिखे हुए मिले थे। इस दौरान गांव में गोलियां भी चली थी। इस मामले में गांव के 11 लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा भी दर्ज हुआ था। बाद में यह मुकदमा खारिज हो गया था। काफी दिनों तक गांव पुलिस छावनी में तबदील रहा था।