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Jind News: प्राकृतिक खेती से सुधरेगी मिट्टी की सेहत, बढ़ेगी फसल की गुणवत्ता

Fri, 30 Oct 2026 12:13 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:13 AM IST
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Natural farming will improve soil health and enhance crop quality.
29जेएनडी16- अहिरका में किसान गो​ष्ठी में किसानों को जीवामृत व घन जीवामृत की जानकारी देते हुए डॉ
जींद। रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। ऐसे में भूमि का स्वास्थ्य बनाए रखने और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल लेने के लिए किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की जरूरत है। यह बात कृषि उपनिदेशक डॉ. सुखदेव सिंह ने गांव अहिरका स्थित एस एंड एस ऑर्गेनिक फार्म पर कृषि विभाग की ओर से चलाए जा रहे खेत बचाओ अभियान के तहत आयोजित किसान गोष्ठी में कही।
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डॉ. सुखदेव सिंह ने कहा कि लगातार फसल उत्पादन लेने के लिए मिट्टी की सेहत को सुरक्षित रखना जरूरी है। प्राकृतिक खेती से मिट्टी में जीवाणुओं की संख्या और जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है। इससे पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं और भूमि की उपजाऊ शक्ति में सुधार होता है।
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रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करके किसान मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ अच्छी गुणवत्ता वाला उत्पादन भी हासिल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग हरियाणा की ओर से देसी गाय खरीदने पर 30 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है।
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इसके अलावा प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को चार हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है। किसानों को इस खेती की तकनीकों का प्रशिक्षण हमेटी जींद में निशुल्क दिया जाता है। इस अवसर पर उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. बलजीत सिंह, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी डॉ. ईश्वर सिंह कौशिक और कृषि अधिकारी डॉ. बिल्लू उपस्थित रहे।


जीवामृत बनाने और प्राकृतिक कीट नियंत्रण की दी जानकारी
गोष्ठी में हमेटी जींद में समन्वित पोषक तत्व प्रबंधन विषय पर 15 दिवसीय डिप्लोमा कर रहे हरियाणा के 20 किसानों ने डॉ. हरभगवान कम्बोज के नेतृत्व में भाग लिया। प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने किसानों को व्यावहारिक जानकारी देते हुए गाय के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत व घनजीवामृत तैयार करने की विधि समझाई। उन्होंने नीम और धतूरा आदि से जैविक कीट नियंत्रक बनाने तथा फेरोमोन ट्रैप और पीले चिपचिपे कार्डों की मदद से रासायनिक कीटनाशकों के बिना कीट नियंत्रण करने के तरीके बताए।
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