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मांगों को लेकर एक सितंबर को प्रदर्शन करेंगे मनरेगा मजदूर
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काम व उचित मजदूरी की मांग को लेकर मनरेगा मजदूर 1 सितंबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा। इसको लेकर हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित सीटू कार्यालय में शनिवार को मनरेगा मजदूरों की बैठक हुई।
सीटू के राज्य उपाध्यक्ष रमेश चंद्र ने कहा कि मनरेगा कानून बनाने के लिए मजदूरों ने लंबा संघर्ष किया है। कानून तो बना है, लेकिन इसे ईमानदारी से लागू नहीं किया जा रहा है। वर्तमान सरकार लगातार मनरेगा का बजट घटा रही है। अगर काम मिल जाता है तो लंबे समय तक मजदूरी नहीं मिलती है। हरियाणा में मनरेगा मजदूरों को 2020-21 में औसतन 39 दिन ही काम मिला है। 2014 से पहले मनरेगा की मजदूरी न्यूनतम वेतन से अधिक थी, लेकिन अब न्यूनतम वेतन से 58 रुपये कम है। फिलहाल न्यूनतम वेतन 373 रुपये है और मनरेगा की मजदूरी 315 रुपये। ऐसे में एक सितंबर को जिलेभर के मनरेगा मजदूर मांगों एवं समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करेंगे। मीटिंग में तेजबीर, बारूराम, राजेश कुमार, अनीता, विक्रम मौजूद रहे।
पीएमएवाई के लाभार्थियों के लिए चलेगा आंदोलन
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पास हुए मकानों के पात्र परिवार 2 सितंबर से लघु सचिवालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। कुछ लोगों ने योजना में नाम आने पर अपने मकान तोड़ दिए हैं। लेकिन उनको अभी तक पहली किस्त भी नहीं मिली है। यह लोग किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं।
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सीटू के राज्य उपाध्यक्ष रमेश चंद्र ने कहा कि मनरेगा कानून बनाने के लिए मजदूरों ने लंबा संघर्ष किया है। कानून तो बना है, लेकिन इसे ईमानदारी से लागू नहीं किया जा रहा है। वर्तमान सरकार लगातार मनरेगा का बजट घटा रही है। अगर काम मिल जाता है तो लंबे समय तक मजदूरी नहीं मिलती है। हरियाणा में मनरेगा मजदूरों को 2020-21 में औसतन 39 दिन ही काम मिला है। 2014 से पहले मनरेगा की मजदूरी न्यूनतम वेतन से अधिक थी, लेकिन अब न्यूनतम वेतन से 58 रुपये कम है। फिलहाल न्यूनतम वेतन 373 रुपये है और मनरेगा की मजदूरी 315 रुपये। ऐसे में एक सितंबर को जिलेभर के मनरेगा मजदूर मांगों एवं समस्याओं को लेकर प्रदर्शन करेंगे। मीटिंग में तेजबीर, बारूराम, राजेश कुमार, अनीता, विक्रम मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पास हुए मकानों के पात्र परिवार 2 सितंबर से लघु सचिवालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करेंगे। कुछ लोगों ने योजना में नाम आने पर अपने मकान तोड़ दिए हैं। लेकिन उनको अभी तक पहली किस्त भी नहीं मिली है। यह लोग किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं।
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