{"_id":"605a26c28ebc3ee64e6fbef7","slug":"mercury-dropped-due-to-light-rain-aqi-reached-94-jind-news-rtk60133633","type":"story","status":"publish","title_hn":"हल्की बारिश से गिरा पारा, एक्यूआई 94 पहुंचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हल्की बारिश से गिरा पारा, एक्यूआई 94 पहुंचा
विज्ञापन
गेहूं की फसल। यदि बारिश अधिक हुई तो नुकसान हो सकता है।
- फोटो : Jind
मौसम में आए बदलवा का असर जहां तापमान पर पड़ा है, वहीं पर्यावरण पर भी देखा गया है। सोमवार सुबह से रात तक व मंगलवार सुबह हुई बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आई है। सोमवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री तो मंगलवार को 31 डिग्री रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस से गिरकर 15 डिग्री पर पहुंच गया है। हालांकि बूंदाबांदी से फसलों को नुकसान होने की संभावना है।
पिछले कई दिन से जींद में पर्यावरण प्रदूषण काफी उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके चलते जींद शहर विश्व के 30 प्रदूषित शहरों में भी शुमार हो गया है। ऐसे में बारिश होने से इसमें सुधार हुआ है। पिछले कुछ दिनों से एक्यूआई 200 से 150 के बीच में चल रहा था, लेकिन सोमवार और मंगलवार को हुई बूंदाबांदी के बाद मंगलवार को एक्यूआई 94 दर्ज किया गया। इससे जींद की हवा काफी स्वच्छ हुई है।
अब तक की बूंदाबांदी से नहीं अधिक नुकसान
अब तक जितनी बूंदाबांदी हुई है, उससे फसलों को कोई खास नुकसान नहीं है। कटाई का समय आ गया है, लेकिन पछेती बिजाई वाले गेहूं में अभी समय लगेगा। जहां सिंचाई की गई थी, वहां फसल गिर गई है, लेकिन अन्य स्थानों पर सही है।
विज्ञापन
डॉ. सुभाष चंद्र, खंड कृषि अधिकारी।
विज्ञापन
पिछले कई दिन से जींद में पर्यावरण प्रदूषण काफी उच्च स्तर पर पहुंच गया था। इसके चलते जींद शहर विश्व के 30 प्रदूषित शहरों में भी शुमार हो गया है। ऐसे में बारिश होने से इसमें सुधार हुआ है। पिछले कुछ दिनों से एक्यूआई 200 से 150 के बीच में चल रहा था, लेकिन सोमवार और मंगलवार को हुई बूंदाबांदी के बाद मंगलवार को एक्यूआई 94 दर्ज किया गया। इससे जींद की हवा काफी स्वच्छ हुई है।
विज्ञापन
अब तक की बूंदाबांदी से नहीं अधिक नुकसान
अब तक जितनी बूंदाबांदी हुई है, उससे फसलों को कोई खास नुकसान नहीं है। कटाई का समय आ गया है, लेकिन पछेती बिजाई वाले गेहूं में अभी समय लगेगा। जहां सिंचाई की गई थी, वहां फसल गिर गई है, लेकिन अन्य स्थानों पर सही है।
विज्ञापन
डॉ. सुभाष चंद्र, खंड कृषि अधिकारी।

बारिश से बचने के लिए छाता लेकर जाती लड़की। - फोटो : Jind