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Jind News: उप स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों को किया जागरूक
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22जेएनडी10: नगूरां आंगनबाड़ी केंद्र पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं की शपथ दिलाते स्वास्थ्य निरीक्षक न
- फोटो : kathua news
अलेवा। पीएचसी नगूरां की स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत नगूरां, दिल्लूवाला, चांदपुर, दालमवाला समेत विभिन्न गांवों के उप स्वास्थ्य व आंगनबाड़ी केंद्रोंं पर लोगों को जागरूक किया। अध्यक्षता स्वास्थ्य निरीक्षक नरेंद्र ढांडा ने की।
नरेंद्र ढांडा ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं अभियान की शुरूआत 22 जनवरी 2015 को पानीपत जिले से हुई थी। इस दौरान उन्होंने बेटियां तो है ईश्वर का उपहार, मत छीनों इनका जीने का अधिकार नामक स्लोगनों से लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्वेश्य लड़कियों को शिक्षित, बालिकाओं को शोषण से बचाना, भ्रूण हत्या रोकना, गर्भपात, विवाहिता यौन उत्पीड़न, सामाजिक व वित्तीय रूप से समृद्व बनाना है। इसके अलावा इसका मुख्य उद्देश्य कम लिंग अनुपात वाले राज्यों व जिलों में सुधार करना है। यही नहीं इस अवसर पर महिला कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं जैसे निराश्रित महिला पेंशन, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की जानकारी दी गई।
उन्होंने बेटा-बेटी में भेदभाव समाप्त करने का आह्वान लोगों से किया। उन्होंने कहा कि दोनों को समान शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए ताकि बेटियां भी आत्मनिर्भर बनकर परिवार, कल्याण तथा देश का नाम रोशन कर सके। आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में जैसे खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा यहां तक सेना में भी अपना परचम लहरा रही हैं। इसलिए लोगों को बेटा-बेटी में किसी प्रकार का अंतर न समझकर समान शिक्षा का अधिकार देना चाहिए। इस अवसर पर संजय नागर, कुलदीप, अनिल, सुभाष के अलावा आशा वर्कर सुनीता दलाल, संतोष, बिमला, मंजू, गीता, जुगेश, रीना, सोनिया, शीला, बबीता मौजूद रही।
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नरेंद्र ढांडा ने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं अभियान की शुरूआत 22 जनवरी 2015 को पानीपत जिले से हुई थी। इस दौरान उन्होंने बेटियां तो है ईश्वर का उपहार, मत छीनों इनका जीने का अधिकार नामक स्लोगनों से लोगों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्वेश्य लड़कियों को शिक्षित, बालिकाओं को शोषण से बचाना, भ्रूण हत्या रोकना, गर्भपात, विवाहिता यौन उत्पीड़न, सामाजिक व वित्तीय रूप से समृद्व बनाना है। इसके अलावा इसका मुख्य उद्देश्य कम लिंग अनुपात वाले राज्यों व जिलों में सुधार करना है। यही नहीं इस अवसर पर महिला कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं जैसे निराश्रित महिला पेंशन, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना की जानकारी दी गई।
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उन्होंने बेटा-बेटी में भेदभाव समाप्त करने का आह्वान लोगों से किया। उन्होंने कहा कि दोनों को समान शिक्षा का अधिकार मिलना चाहिए ताकि बेटियां भी आत्मनिर्भर बनकर परिवार, कल्याण तथा देश का नाम रोशन कर सके। आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में जैसे खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा यहां तक सेना में भी अपना परचम लहरा रही हैं। इसलिए लोगों को बेटा-बेटी में किसी प्रकार का अंतर न समझकर समान शिक्षा का अधिकार देना चाहिए। इस अवसर पर संजय नागर, कुलदीप, अनिल, सुभाष के अलावा आशा वर्कर सुनीता दलाल, संतोष, बिमला, मंजू, गीता, जुगेश, रीना, सोनिया, शीला, बबीता मौजूद रही।
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