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Jind News: करवाचौथ की चिंता छोड़कर डीएपी के लिए लाइन में लगीं सुहागिनें
Mon, 21 Oct 2024 03:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Mon, 21 Oct 2024 03:17 AM IST
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उचाना। भारतीय संस्कृति में करवाचौथ का व्रत अपना महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखते हुए अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। करवा चौथ के व्रत के दिन उचाना की मंडी में हैफेड की सरकारी दुकान के बाहर महिलाएं लंबी लाइन में लगी नजर आईं। करवा चौथ व्रत के दिन डीएपी खाद के लिए महिलाएं लाइन में लग कर डीएपी खाद लेने का इंतजार करती नजर आईं।
डीएपी हैफेड की सरकारी दुकान पर आने की जानकारी मिलने के बाद रविवार सुबह ही किसान मंडी पहुंच गए थे। गेहूं की बिजाई से पहले डीएपी की जरूरत होती है। अभी से डीएपी को लेकर यह हाल है तो आने वाले दिनों में क्या हाल होगा इसका अंदाजा मंडी में डीएपी खाद के लिए लगी लंबी लाइन से पता चल रहा था।
सुमन, राजो, बीरमती ने कहा कि करवाचौथ के व्रत के दिन भी डीएपी खाद लेने के लिए मंडी में आना पड़ा। यहां पर भी लंबी लाइन में लगना पड़ा। कई घंटों के बाद जब खाद के बैगों की पर्ची मिलनी शुरू हुई तो नंबर आया। कई दिनों से खाद लेने के लिए उनके परिवार के सदस्य मंडी आ रहे हैं, लेकिन खाद नहीं मिल रही थी।
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रामकुमार काकड़ोद, मनोज चहल भौंगरा, सुरेश ने कहा कि गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी खाद की जरूरत होती है। कई दिन से खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वह आ नहीं रही है। सरकारी दुकान पर खाद आने की जानकारी मिलने के बाद आसपास के गांव से किसान सुबह ही मंडी पहुंच गए थे। कम से कम पांच से छह घंटे तक खाद के बैग की पर्ची मिलने का इंतजार करना पड़ा। घर के सारे काम छोड़कर सुबह साढ़े पांच बजे ही किसान मंडी में आने लगे थे। हर बार डीएपी खाद की किल्लत होती है। गेहूं की बिजाई शुरू होने से पहले शासन, प्रशासन खाद के पुख्ता प्रबंध करे, ताकि किसानों को परेशानी न हो। हैफेड के सेल्समैन सतीश ने बताया कि डीएपी और यूरिया के 920 बैग आए हुए थे। प्रत्येक किसान को पांच से छह बैग दिए गए हैं।
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डीएपी हैफेड की सरकारी दुकान पर आने की जानकारी मिलने के बाद रविवार सुबह ही किसान मंडी पहुंच गए थे। गेहूं की बिजाई से पहले डीएपी की जरूरत होती है। अभी से डीएपी को लेकर यह हाल है तो आने वाले दिनों में क्या हाल होगा इसका अंदाजा मंडी में डीएपी खाद के लिए लगी लंबी लाइन से पता चल रहा था।
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सुमन, राजो, बीरमती ने कहा कि करवाचौथ के व्रत के दिन भी डीएपी खाद लेने के लिए मंडी में आना पड़ा। यहां पर भी लंबी लाइन में लगना पड़ा। कई घंटों के बाद जब खाद के बैगों की पर्ची मिलनी शुरू हुई तो नंबर आया। कई दिनों से खाद लेने के लिए उनके परिवार के सदस्य मंडी आ रहे हैं, लेकिन खाद नहीं मिल रही थी।
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रामकुमार काकड़ोद, मनोज चहल भौंगरा, सुरेश ने कहा कि गेहूं की बिजाई के लिए डीएपी खाद की जरूरत होती है। कई दिन से खाद के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन वह आ नहीं रही है। सरकारी दुकान पर खाद आने की जानकारी मिलने के बाद आसपास के गांव से किसान सुबह ही मंडी पहुंच गए थे। कम से कम पांच से छह घंटे तक खाद के बैग की पर्ची मिलने का इंतजार करना पड़ा। घर के सारे काम छोड़कर सुबह साढ़े पांच बजे ही किसान मंडी में आने लगे थे। हर बार डीएपी खाद की किल्लत होती है। गेहूं की बिजाई शुरू होने से पहले शासन, प्रशासन खाद के पुख्ता प्रबंध करे, ताकि किसानों को परेशानी न हो। हैफेड के सेल्समैन सतीश ने बताया कि डीएपी और यूरिया के 920 बैग आए हुए थे। प्रत्येक किसान को पांच से छह बैग दिए गए हैं।