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निजीकरण के विरोध में केवाईएस ने सरकार का पुतला फूंककर जताया रोष
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संस्थाओं के निजी करण के खिलाफ सरकार का पुतला फूंक कर रोष जताते केवाईएस के कार्यकर्ता।
- फोटो : Jind
क्रांतिकारी युवा संगठन के सदस्यों ने सरकारी विभागों के निजीकरण के विरोध में मंगलवार को केएम कॉलेज गेट पर पुतला फूंक कर रोष जताया। इस दौरान एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
केवाईएस के सदस्य रवि, सुनील, विक्रम, विकास, जगविंदर, अजय, सोहन, आनंद, जनित, प्रवीण, ज्योति और कोमल ने कहा कि सरकार धीरे-धीरे सभी जन कल्याणकारी विभागों को निजी कंपनियों के हाथों में दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का कहना है कि यह विभाग घाटे में चल रहा है, इसलिए इनको निजी कर रहे हैं। इन लोगों ने कहा कि सरकारी विभाग घाटे में क्यों आए, सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए। किसी जनकल्याणकारी विभाग को निजी हाथों में दे देना उसका ठोस हल नहीं है। निजी कंपनियों का मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना होता है, न कि जनता की सेवा करना।
सदस्यों ने कहा कि मोदी सरकार ने भारतीय रेलवे, बीएसएनएल, एमटीएनएल, भारत पेट्रोलियम, एयरपोर्ट, बिजली निगम, एससीआई जैसे मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाले विभागों को घाटे के नाम पर निजी कंपनी को बेचा रही है। यह आने वाले भविष्य के लिए रोजगार खत्म कर देगा और जनकल्याणकारी सेवाएं आम आदमी पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों तक सस्ती व अच्छी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाएं, लेकिन सरकार अपने इस कर्तव्य से दूर होती जा रही है। केवाईएस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि सभी सरकारी जन कल्याणकारी विभागों का निजीकरण बंद किया जाए।
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केवाईएस के सदस्य रवि, सुनील, विक्रम, विकास, जगविंदर, अजय, सोहन, आनंद, जनित, प्रवीण, ज्योति और कोमल ने कहा कि सरकार धीरे-धीरे सभी जन कल्याणकारी विभागों को निजी कंपनियों के हाथों में दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का कहना है कि यह विभाग घाटे में चल रहा है, इसलिए इनको निजी कर रहे हैं। इन लोगों ने कहा कि सरकारी विभाग घाटे में क्यों आए, सरकार को इसकी जांच करनी चाहिए। किसी जनकल्याणकारी विभाग को निजी हाथों में दे देना उसका ठोस हल नहीं है। निजी कंपनियों का मकसद सिर्फ मुनाफा कमाना होता है, न कि जनता की सेवा करना।
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सदस्यों ने कहा कि मोदी सरकार ने भारतीय रेलवे, बीएसएनएल, एमटीएनएल, भारत पेट्रोलियम, एयरपोर्ट, बिजली निगम, एससीआई जैसे मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने वाले विभागों को घाटे के नाम पर निजी कंपनी को बेचा रही है। यह आने वाले भविष्य के लिए रोजगार खत्म कर देगा और जनकल्याणकारी सेवाएं आम आदमी पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों तक सस्ती व अच्छी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाएं, लेकिन सरकार अपने इस कर्तव्य से दूर होती जा रही है। केवाईएस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि सभी सरकारी जन कल्याणकारी विभागों का निजीकरण बंद किया जाए।
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