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मांगेराम गुप्ता और बृजमोहन सिंगला के इर्द गिर्द 32 साल घूमती रही जींद की राजनीति
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मांगेराम गुप्ता के अंतिम संस्कार में पहुंचे उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला व अन्य नेता।
- फोटो : Jind
पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता के निधन के बाद जींद की राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया है। 32 साल तक जींद की राजनीति मांगेराम गुप्ता और पूर्व मंत्री बृजमोहन सिंगला के इर्द-गिर्द घूमती रही। मांगेराम गुप्ता अपने पीछे पत्नी, तीन बेटे, दो बेटियां और पोते-पोतियां से भरा परिवार छोड़ गए हैं। शुक्रवार दोपहर हांसी रोड स्थित बनखंड महावेद श्मशानघाट में उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
पिछले साल ही पूर्व मंत्री बृजमोहन सिंगला का भी निधन हो गया था।
मांगेराम गुप्ता ने पहला चुनाव 1977 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रताप सिंह को 6105 मतों से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। मांगेराम गुप्ता ने कुल आठ चुनाव लड़े और इनमें से चार जीते। चार बार विधायक बनने वाले मांगेराम गुप्ता तीन बार प्रदेश में प्रभावशाली मंत्री भी बने। 1977 के बाद 1982 के चुनाव में वह लोकदल के बृजमोहन सिंगला से हार गए। 1987 में फिर से उन्होंने कांग्रेेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकदल के परमानंद से हार गए। 1991 में 16133 मतों से जीत कर विधायक बने। 1996 में फिर से बृजमोहन सिंगला ने उन्हें हरा दिया। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने फिर वापसी की और इनेलो के गुलशन भारद्वाज को हराकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2005 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर फिर से चुनाव जीता। 2009 के चुनाव में वे इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा से चुनाव हार गए थे। 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया और इसके बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। चार बार विधायक बनने वाले गुप्ता प्रदेश सरकार में स्थानीय निकाय मंत्री, वित्तमंत्री व परिवहन और शिक्षामंत्री रहे। 32 साल के इस राजनीतिक सफर में मांगेराम गुप्ता और बृजमोहन सिंगला ही जींद की राजनीति पर काबिज रहे।
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पिछले साल ही पूर्व मंत्री बृजमोहन सिंगला का भी निधन हो गया था।
मांगेराम गुप्ता ने पहला चुनाव 1977 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रताप सिंह को 6105 मतों से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। मांगेराम गुप्ता ने कुल आठ चुनाव लड़े और इनमें से चार जीते। चार बार विधायक बनने वाले मांगेराम गुप्ता तीन बार प्रदेश में प्रभावशाली मंत्री भी बने। 1977 के बाद 1982 के चुनाव में वह लोकदल के बृजमोहन सिंगला से हार गए। 1987 में फिर से उन्होंने कांग्रेेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकदल के परमानंद से हार गए। 1991 में 16133 मतों से जीत कर विधायक बने। 1996 में फिर से बृजमोहन सिंगला ने उन्हें हरा दिया। वर्ष 2000 में हुए चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने फिर वापसी की और इनेलो के गुलशन भारद्वाज को हराकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2005 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर फिर से चुनाव जीता। 2009 के चुनाव में वे इनेलो के डॉ. हरिचंद मिड्ढा से चुनाव हार गए थे। 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया और इसके बाद उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। चार बार विधायक बनने वाले गुप्ता प्रदेश सरकार में स्थानीय निकाय मंत्री, वित्तमंत्री व परिवहन और शिक्षामंत्री रहे। 32 साल के इस राजनीतिक सफर में मांगेराम गुप्ता और बृजमोहन सिंगला ही जींद की राजनीति पर काबिज रहे।

मांगेराम गुप्ता के अंतिम संस्कार के समय सलामी देते पुलिसकर्मी।- फोटो : Jind
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