{"_id":"591b4bfb4f1c1b864bf226f5","slug":"jind-school-books-teacher-harayana","type":"story","status":"publish","title_hn":"डेढ़ महीने पहले शुरू हुआ सत्र, बच्चों को किताबों का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डेढ़ महीने पहले शुरू हुआ सत्र, बच्चों को किताबों का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो जींद
Updated Wed, 17 May 2017 12:29 AM IST
विज्ञापन
सरकारी स्कूल में पुरानी कक्षाओं की पुस्तकों से पढ़ाई करते विद्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
सरकारी स्कूलों में नए सत्र को शुरू हुए डेढ़ महीने हो चुके हैं लेकिन विद्यार्थियों को अब तक किताबें नहीं मिल पाईं हैं। ऐसे में अधिकतर विद्यार्थियों ने अपनी अपनी पुस्तकें खरीद ली हैं। वहीं, जिन्होंने नहीं खरीदी हैं, वे अब तक पिछली कक्षाओं का पाठ्यक्रम ही पढ़ रहे हैं। शिक्षा विभाग पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में पुस्तकें मुहैया करवाता है। पिछले साल जिले भर में पहली से आठवीं तक कुल 39 हजार विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था। हालांकि शिक्षा विभाग सही आंकड़ा तो तैयार नहीं कर पाया है, लेकिन इस बार सरकारी स्कूलों में पिछले साल के मुकाबले संख्या बढ़ी है। इन विद्यार्थियों को अब सरकार की ओर से मिलने वाली पुस्तकों का इंतजार है।
बाद में आती हैं पुस्तकें
विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि सरकार सत्र शुरू होने के कई महीने के बाद में पुस्तकें मुहैया करवाती हैं। पुस्तकें विद्यार्थियों तक पहुंचने में और भी अधिक समय लग जाता है। ऐसे में इन पुस्तकों का कोई लाभ नहीं होता। जिन बच्चों ने पुस्तकें खरीद ली हैं, नई पुस्तकें उनके लिए रद्दी हो जाएगी।
निजी स्कूलों से कैसे होगा मुकाबला
सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली से नाराज हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकार निजी स्कूलों से मुकाबले की बात करती है, लेकिन जब तक सरकारी स्कूलों में पुस्तकें पहुंचती हैं, निजी स्कूलों में आधा पाठ्यक्रम कवर कर लिया जाता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चे लर्निंग लेवल से लेकर पूरी परफॉरमेंस में पिछड़ जाते हैं।
विज्ञापन
कैचअप के बहाने उलझा रही है सरकार
शिक्षा विभाग में काफी प्रयोग किए जा रहे हैं। अब विद्यार्थियों के लिए कैचअप कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें उन्हें पिछली कक्षा के पाठ्यक्रम को ही सिखाना है। ऐसे में नए सत्र को शुरू करने का क्या मतलब है। -महताब सिंह मलिक, शिक्षक
साथ में चलें गतिविधियां
कैचअप और सीआरपीसी कार्यक्रम नियमित पाठ्यक्रम के साथ ही चलने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को नए पाठ्यक्रम की भी जानकारी हो जाएगी। पुस्तक न होने के कारण नया पाठ्यक्रम शुरू नहीं करवाया जा रहा है। -भूप वर्मा, शिक्षक।
जल्द पहुंचेंगी पुस्तकें
फिलहाल स्कूलों में कैचअप कार्यक्रम चल रहा है। इसमें पुस्तकों की जरूरत नहीं है। पुस्तकों के लिए अधिकारियों से बात हुई है। गर्मियों की छुट्टियों से पहले पुस्तकें आ जाएंगी। -वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी
बाद में आती हैं पुस्तकें
विद्यार्थियों और अभिभावकों का कहना है कि सरकार सत्र शुरू होने के कई महीने के बाद में पुस्तकें मुहैया करवाती हैं। पुस्तकें विद्यार्थियों तक पहुंचने में और भी अधिक समय लग जाता है। ऐसे में इन पुस्तकों का कोई लाभ नहीं होता। जिन बच्चों ने पुस्तकें खरीद ली हैं, नई पुस्तकें उनके लिए रद्दी हो जाएगी।
विज्ञापन
निजी स्कूलों से कैसे होगा मुकाबला
सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली से नाराज हैं। शिक्षकों का कहना है कि सरकार निजी स्कूलों से मुकाबले की बात करती है, लेकिन जब तक सरकारी स्कूलों में पुस्तकें पहुंचती हैं, निजी स्कूलों में आधा पाठ्यक्रम कवर कर लिया जाता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों के बच्चे लर्निंग लेवल से लेकर पूरी परफॉरमेंस में पिछड़ जाते हैं।
विज्ञापन
कैचअप के बहाने उलझा रही है सरकार
शिक्षा विभाग में काफी प्रयोग किए जा रहे हैं। अब विद्यार्थियों के लिए कैचअप कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसमें उन्हें पिछली कक्षा के पाठ्यक्रम को ही सिखाना है। ऐसे में नए सत्र को शुरू करने का क्या मतलब है। -महताब सिंह मलिक, शिक्षक
साथ में चलें गतिविधियां
कैचअप और सीआरपीसी कार्यक्रम नियमित पाठ्यक्रम के साथ ही चलने चाहिए। इससे विद्यार्थियों को नए पाठ्यक्रम की भी जानकारी हो जाएगी। पुस्तक न होने के कारण नया पाठ्यक्रम शुरू नहीं करवाया जा रहा है। -भूप वर्मा, शिक्षक।
जल्द पहुंचेंगी पुस्तकें
फिलहाल स्कूलों में कैचअप कार्यक्रम चल रहा है। इसमें पुस्तकों की जरूरत नहीं है। पुस्तकों के लिए अधिकारियों से बात हुई है। गर्मियों की छुट्टियों से पहले पुस्तकें आ जाएंगी। -वंदना गुप्ता, जिला शिक्षा अधिकारी