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डेंगू के साथ जिले में चिकनगुनिया ने दी दस्तक
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
Updated Mon, 26 Sep 2016 12:15 AM IST
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नागरिक अस्पताल में डेंगू वार्ड पर लगा ताला।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जिले में डेंगू के साथ-साथ अब चिकनगुनिया ने भी दस्तक दे दी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग को इसकी कोई फिक्र नहीं है। स्वास्थ्य विभाग मरीजों को उपचार देने की बजाए अपने आंकड़ों में सुधार करने में लगा है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते नागरिक अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर रुख करना पड़ रहा है, लेकिन अस्पताल प्रशासन अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं में सुधार करने की बजाए केवल जागरूकता अभियानों पर ही जोर दे रहा है।
उपचार करना तो दूर मरीज को वार्ड में एंट्री तक नहीं करने दी
शहर की अर्बन एस्टेट कॉलोनी निवासी रणबीर सरोहा ने बताया कि गत 23 सितंबर को वह नागरिक अस्पताल में अपनी बेटी पूनम का चिकनगुनिया का टेस्ट करवाने के लिए गया था लेकिन इमरजेंसी के गेट पर खड़े गार्ड ने उसे अंदर ही नहीं जाने दिया। जब उसने इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक को इस बारे में अवगत करवाया तो चिकित्सक ने भी उसकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया। रणबीर ने बताया कि वह अपनी बेटी के उपचार के लिए अस्पताल में इधर-उधर भटकता रहा लेकिन वहां मौजूद किसी भी चिकित्सक ने उसकी बेटी का उपचार करना तो दूर, टेस्ट तक नहीं करवाया। जबकि पिछले तीन माह से उसकी बेटी का एलर्जी का उपचार नागरिक अस्पताल में ही चल रहा है। इसके बाद उसने निजी अस्पताल की लैब से अपनी बेटी का टेस्ट करवाया तो टेस्ट में चिकनगुनिया पॉजिटिव मिला।
रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद इसकी पुष्टि के लिए टेस्ट को दोबारा से दिल्ली की लैब में भेजा गया। दिल्ली से भी चिकनगुनिया की पुष्टि हो गई। रणबीर सरोहा ने कहा कि नागरिक अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते उसे महंगे रेट पर निजी लैब से अपनी बेटी का टेस्ट करवाना पड़ा।
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आंकड़ों में सुधार की तरफ ही अस्पताल प्रशासन का ध्यान
नागरिक अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि अस्पताल प्रशासन केवल आंकड़ों के सुधार की तरफ ही ध्यान दे रहा है। अस्पताल में सही तरीके से मरीजों को उपचार नहीं मिलने के कारण मरीज नागरिक अस्पताल की बजाए निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। इसलिए अभी तक नागरिक अस्पताल के रिकार्ड में डेंगू के केवल 18 केस ही सामने आए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि डेंगू के इससे ज्यादा केस जिले में हैं।
चिकनगुनिया के टेस्ट की सुविधा नहीं
अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों की काफी भीड़ रहती है। इसलिए व्यवस्था बनाने के लिए गार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। अगर गार्ड ने या किसी स्टाफ ने किसी मरीज या उसके अभिभावक के साथ कोई दुर्व्यवहार किया है, तो इसकी शिकायत मुझे करें। अस्पताल में चिकनगुनिया के टेस्ट की सुविधा नहीं है। सरकार द्वारा निजी लैब में चिकनगुनिया के टेस्ट के रेट निर्धारित किए गए हैं। यदि निजी लैब सरकार द्वारा निर्धारित रेट से ज्यादा रुपये लिए गए हैं, तो वह इसकी जांच करवाएंगे।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
नागरिक अस्पताल, जींद
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उपचार करना तो दूर मरीज को वार्ड में एंट्री तक नहीं करने दी
शहर की अर्बन एस्टेट कॉलोनी निवासी रणबीर सरोहा ने बताया कि गत 23 सितंबर को वह नागरिक अस्पताल में अपनी बेटी पूनम का चिकनगुनिया का टेस्ट करवाने के लिए गया था लेकिन इमरजेंसी के गेट पर खड़े गार्ड ने उसे अंदर ही नहीं जाने दिया। जब उसने इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक को इस बारे में अवगत करवाया तो चिकित्सक ने भी उसकी समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया। रणबीर ने बताया कि वह अपनी बेटी के उपचार के लिए अस्पताल में इधर-उधर भटकता रहा लेकिन वहां मौजूद किसी भी चिकित्सक ने उसकी बेटी का उपचार करना तो दूर, टेस्ट तक नहीं करवाया। जबकि पिछले तीन माह से उसकी बेटी का एलर्जी का उपचार नागरिक अस्पताल में ही चल रहा है। इसके बाद उसने निजी अस्पताल की लैब से अपनी बेटी का टेस्ट करवाया तो टेस्ट में चिकनगुनिया पॉजिटिव मिला।
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रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद इसकी पुष्टि के लिए टेस्ट को दोबारा से दिल्ली की लैब में भेजा गया। दिल्ली से भी चिकनगुनिया की पुष्टि हो गई। रणबीर सरोहा ने कहा कि नागरिक अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते उसे महंगे रेट पर निजी लैब से अपनी बेटी का टेस्ट करवाना पड़ा।
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आंकड़ों में सुधार की तरफ ही अस्पताल प्रशासन का ध्यान
नागरिक अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि अस्पताल प्रशासन केवल आंकड़ों के सुधार की तरफ ही ध्यान दे रहा है। अस्पताल में सही तरीके से मरीजों को उपचार नहीं मिलने के कारण मरीज नागरिक अस्पताल की बजाए निजी अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। इसलिए अभी तक नागरिक अस्पताल के रिकार्ड में डेंगू के केवल 18 केस ही सामने आए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि डेंगू के इससे ज्यादा केस जिले में हैं।
चिकनगुनिया के टेस्ट की सुविधा नहीं
अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों की काफी भीड़ रहती है। इसलिए व्यवस्था बनाने के लिए गार्ड की ड्यूटी लगाई गई है। अगर गार्ड ने या किसी स्टाफ ने किसी मरीज या उसके अभिभावक के साथ कोई दुर्व्यवहार किया है, तो इसकी शिकायत मुझे करें। अस्पताल में चिकनगुनिया के टेस्ट की सुविधा नहीं है। सरकार द्वारा निजी लैब में चिकनगुनिया के टेस्ट के रेट निर्धारित किए गए हैं। यदि निजी लैब सरकार द्वारा निर्धारित रेट से ज्यादा रुपये लिए गए हैं, तो वह इसकी जांच करवाएंगे।
डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
नागरिक अस्पताल, जींद