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सिविल सेवा परीक्षा में जिले के पांच युवाओं ने मारी बाजी
अमर उजाला ब्यूरो जींद
Updated Fri, 02 Jun 2017 12:24 AM IST
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घर लौटने पर हिमांशु जैन का स्वागत करते परिजन और खुशी में नाचते हिंमाशु जैन व परिजन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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भारतीय प्रशासनिक सेवा के परीक्षा परिणाम में जींद जिले के पांच युवाओं सफलता प्राप्त की है। इनमें तीन जींद शहर के हैं, तो एक उचाना और एक सफीदों से। परीक्षा परिणाम के बाद सभी के घरों में बधाई देने वालों का तांता लग गया है। इसमें हिमांशु जैन ने 44वां, डॉ. गौरव सैनी ने 89वां तथा डॉ. सचिन कुमार ने 129वां, अंजू ने 398 और अमन बिसला ने 315वां रैंक प्राप्त किया।
गूगल की नौकरी छोड़कर की तैयारी
सिविल सर्विसेज में 44वां रैंक हासिल करने वाले हिमांशु जैन जूता व्यवसायी पवन जैन के पुत्र हैं। 10वीं तक जींद के एसडी स्कूल में पढ़ने वाले हिंमाशु जैन ने हैदराबाद से एमटेक पास की है। गूगल में 22 लाख रुपये का पैकेज छोड़ उन्होंने आईएएस की तैयारी शुरू की। तीसरे प्रयास में हिमांशु ने सफलता हासिल की। 89वां रैंक पाने वाले गौरव सैनी समाजसेवी अभयराम आर्य के परिवार से हैं। उनका पारिवारिक मकान रोहतक रोड पर है। पिता डॉ. दलबीर आर्य हिसार में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। गौरव मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली से गोल्ड मेडलिस्ट हैं। दूसरे प्रयास में गौरव ने सिविल सर्विसेज की परीक्षा में सफलता पाई। गौरव के ताऊ व्यवसायी रामकुमार सैनी और रणबीर सैनी के पारिवारिक सदस्यों ने मिठाई बांटकर खुशियां मनाईं।
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129वां रैंक हासिल करने वाले डॉ. सचिन कुमार जैन ने मैट्रिक स्तर की पढ़ाई जींद के एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में की। 12वीं कक्षा के बाद उनका चयन एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए हो गया। वर्ष 2012 में पीजीआई एमएस रोहतक से पास आउट होने के बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा के लिए प्रयास शुरू किया। 2013 में प्रथम प्रयास में उन्होंने 499वां रैंक हासिल किया। आईआरएस कस्टम एवं एक्साइज में उनका सेलेक्शन हो गया। इसके बाद 2015 में फिर प्रयास किया तो 313 रैंक हासिल कर लिया। आईआरएस-इनकम टैक्स के तौर पर उनकी नियुक्ति हो गई। इन दिनों वे नागपुर में ट्रेनिंग पर हैं। इस साल घोषित परिणाम में उन्होंने फिर से 129वां रैंक हासिल कर आईपीएस के लिए क्वालिफाई कर लिया। सचिन कुमार के पिता राजपाल जैन एसडी स्कूल में विज्ञान अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। वीरवार को एसडी स्कूल प्रबंधक कमेटी के प्रधान लक्ष्मीनारायण बंसल, उपप्रधान प्रेम गोयल, प्रबंधक रामनिवास गुप्ता, सदस्य बलबीर गर्ग, प्राचार्य सुरेंद्र राणा, मुख्याध्यापक रमेश शर्मा सहित स्कूल स्टाफ के सदस्य सचिन के परिवार को बधाई दी। सचिन की 72 वर्षीय दादी मूर्ति देवी के अनुसार उनके लिए आज सबसे खुशी का दिन है। परिवार के सभी लोगों ने खुशी मनाई।
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कोई कार्य मुश्किल नहीं, पूरे जनून से करें : अमन
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा परिणाम आते ही सफीदों क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। कस्बे की शिव कॉलोनी निवासी सतपाल बिसला के पुत्र अमन बिसला ने परीक्षा में 315वां रैंक हासिल किया। अमन के पिता सतपाल बिसला गांव खेड़ाखेमावती स्कूल में बतौर गणित अध्यापक और माता केलो देवी राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिंदी की अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। अमन गांव खरकड़ा में पशु चिकित्सक के रूप में काम कर रहे हैं। इस परीक्षा से पहले वे दो बार यूपीएससी के पहले पड़ाव को पार कर चुके हैं। अमन ने बताया कि निरंतर एक काम को करते रहने से काम को आसान बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उसके छोटे भाई अंकेश बिसला के सुझाव व माता-पिता की प्रेरणा से कार्यशैली में बदलाव किया। उन्होंने आध्यात्मिकता का सहारा लेकर पढ़ाई को रुचिकर बनाया। अमन ने बताया कि वे हमेशा समाज में दुखी लोगों को देखकर उनके लिए कुछ करना चाहते थे। सकारात्मक सोच और समाज के लिए कुछ करने की भावना ने उन्हें यहां पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि कोई कार्य मुश्किल नहीं होता, बस शर्त है कि कार्य सकारात्मक सोच के साथ पूरे जनून से किया जाए।
तीसरे प्रयास में अंजू ने पाई सफलता
उचाना खुर्द गांव की अंजू ने सिविल सेवा परीक्षा में 398वां रैंक हासिल कर सफलता की नई इबारत लिखी है। इसको लेकर अंजू की ससुराल उचाना खुर्द से लेकर मायके सोनीपत जिले के शामड़ी गांव में परिजनों में उत्साह का माहौल है। अंजू ने तीसरी बार यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा दी। इस बार वह 398वां रैंक हासिल करने में कामयाब हो गईं। इस समय अंजू अपने पति देवेंद्र और परिवार के दूसरे लोगों के साथ जींद की अर्बन एस्टेट कॉलोनी में रह रही हैं। पटवारी देवेंद्र की पत्नी अंजू फिलहाल केंद्र में पंचायती राज मंत्रालय में सहायक अनुभाग अधिकारी के तौर पर नियुक्त हैं। परीक्षा पास कर लेने के बाद उचाना खुर्द, जींद की अर्बन एस्टेट कॉलोनी से लेकर उसके मायके शामड़ी गांव में उत्साह का माहौल है। अंजू ने स्नातक जींद के राजकीय महिला कॉलेज से पास की थी और एमबीए की डिग्री हिसार के गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय से हासिल की थी। उसकी पांच साल की एक बेटी है और लगभग डेढ़ साल पहले अंजू ने केंद्र सरकार में सहायक अनुभाग अधिकारी के पद पर नौकरी ज्वाइन की थी। अंजू की मां राजबाला हिंदी अध्यापिका के पद से सेवा निवृत्त हैं। उसके ससुर रामदिया श्योकंद पीटीआई अध्यापक के पद से सेवा निवृत्त हुए। उनके पति देवेंद्र इस समय अलेवा में रैवेन्यू पटवारी के पद पर तैनात हैं।
लगातार प्रयास से मिली सफलता
लगन और कड़ी मेहनत से सब कुछ हासिल किया जा सकता है। बार-बार के प्रयास पर असफलता हाथ भी लगे तो निराश होने की जरूरत नहीं। आप संघर्ष करते हो तो भगवान भी आपका साथ देगा। मैंने भी मन में ठानी और माता-पिता, दादी और अन्य परिवार के सदस्यों के आशीर्वाद से यह मुकाम हासिल किया। परिवार का सहारा भी मिला, जिससे आगे बढ़ने में कोई दिक्कत नहीं आई।
-सचिन कुमार जैन
डीसी के दौरे ने बदल दी जिंदगी
स्कूल में एक दिन डीसी ने दौरा किया। मैंने उसी दिन डीसी बनने की ठान ली थी। इसके लिए मैंने किसी से पूछा था कि डीसी कैसे बनते हैं। फिर मैंने अपना लक्ष्य निर्धारित किया। उसके बाद कड़ी मेहनत की। परिवार के सदस्यों ने भी पूरा सहयोग दिया। सभी के आशीर्वाद का परिणाम है कि मुझे सिविल सर्विसिज की परीक्षा में उपलब्धि मिली है। -हिमांशु जैन
मेहनत के साथ लक ने किया काम
मैंने एमबीबीएस करते समय ही सोचा था कि भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दूं, जिससे देश सेवा में अपना योगदान दे सकूं। इसके लिए सबसे पहले मेरे पिता ने मुझे प्रेरित किया। मां और परिवार के बुजुर्गों के आशीर्वाद ने मेरा हौसला बढ़ाया। भगवान का भी शुक्र है, जिनकी कृपा से मुझे यह मुकाम मिला। -गौरव सैनी