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जींद नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी निलंबित, चार्जशीट आने का इंतजार

Thu, 27 May 2021 11:58 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 27 May 2021 11:58 PM IST
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Jind city council executive suspended, waiting for charge sheet to come
विवादों में घिरे रहने वाले जींद नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डॉ. एसके चौहान को सरकार ने निलंबित कर दिया है। हालांकि अभी तक निलंबन का कारण स्पष्ट नहीं है। ऐसे में अधिकारियों को भी चार्जशीट आने का इंतजार है। इसके बाद ही निलंबन के कारणों का पता चलेगा।
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वीरवार को शहरी स्थानीय निकाय विभाग की तरफ से जारी पत्र में उनके निलंबन की जानकारी दी गई है। निलंबन के दौरान डॉ. चौहान का मुख्यालय शहरी स्थानीय निकाय विभाग का निदेशालय पंचकूला रहेगा। वहीं नरवाना के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार को जींद नगर परिषद का कार्यभार संभालेंगे।
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कई विवादों से डॉ. चौहान का रहा नाता
विवाद एक : करीब तीन साल पहले नरवाना में कार्यकारी अधिकारी रहते प्रधानमंत्री आवास योजना के मामले में भी उन पर आरोप लगे थे। हालांकि इस मामले में सर्वे कंपनी के कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई हुई। लेकिन डीएमसी की जांच में सामने आया था कि कार्यकारी अधिकारी सहित जेई ने भी इस मामले में लापरवाही बरती है। इसमें आरोप है कि पात्र लोगों के नाम सूची में डालने के पैसे की मांग की गई। हालांकि डॉ. एसके चौहान इसे नकारते रहे हैं।
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विवाद दो : एक साल पहले जींद नगर परिषद की चेयरपर्सन पूनम सैनी के पति व भाजपा के पूर्व प्रदेश सचिव जवाहर सैनी के साथ भी उनका झगड़ा हो गया था। इसमें उन्होंने जवाहर सैनी व पार्षद काला सैनी के खिलाफ एससी-एसटी की धाराओं के तहत केस दर्ज करवाया था। इसके बाद से ही नगर परिषद में काफी खींचतान चल रही थी।
विवाद तीन : यह आरटीआई से जुड़ा हुआ है। नरवाना रोड निवासी एडवोकेट विरेंद्र जांगड़ा ने 2016 में शिवपुरी कॉलोनी में बनी एक गली के बारे में जानकारी मांगी थी। इसमें पूछा गया था कि गली का निर्माण किस फर्म ने किया। किस अधिकारी ने इसकी जांच की। पानी का स्तर किसने जांचा। इस प्रकार के दस बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। एक महीने में सूचना नहीं मिली तो एडवाकेट ने प्रथम अपील में सीटीएम के पास आवेदन किया। इसमें भी सूचना देने के आदेश हुए। लेकिन नहीं दी गई। इसके बाद जांगड़ा ने द्वितीय अपील में 2017 में राज्य सूचना आयुक्त का दरवाजा खटखटाया। आयोग द्वारा कहने बावजूद सूचना नहीं दी गई। इस दौरान करीब 35 बार सुनवाई हुई। कार्यकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने के आदेश दिए गए। करीब छह महीने पहले राज्य सूचना आयुक्त जयसिंह बिश्नोई द्वारा पुलिस को आदेश दिए गए कि चौहान को आयोग के समक्ष पेश किया जाए। फिर भी चौहान सुनवाई पर नहीं पहुंचे। इसके बाद आयोग ने जींद के डीसी को पत्र लिखकर आदेश दिए कि अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट दें। इसके बाद डीसी ने निदेशक शहरी स्थानीय विभाग को पत्र लिखा कि यह पद राज्य स्तर का है। ऐसे में डीसी सक्षम नहीं है। 24 जुलाई 2020 को आयोग ने आदेश दिए कि अतिरिक्त मुख्य सचिव चौहान के खिलाफ कार्रवाई करें। तभी से कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी।
कानून को नहीं मानने वालों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई
मेरा किसी के साथ व्यक्तिगत विवाद नहीं है। सिर्फ व्यवस्थाओं की बात है। सूचना मांगना आम आदमी का अधिकार है। यह सूचना देना अधिकारियों का काम है। बार-बार सूचना नहीं देना कानून की अवमानना है। ऐसे में और भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। एडवोकेट विरेंद्र जांगड़ा।
निलंबन का मिला है पत्र
मुझे निलंबन का पत्र मिला है। यह जानकारी नहीं है कि निलंबन किस कारण से किया गया है। सरकारी सेवा में ऐसी स्थितियां आती हैं। सूचना नहीं देने पर ऐसी कार्रवाई संभव नहीं है। काफी अन्य लोगों ने भी सूचना नहीं दी हैं। डॉ. एसके चौहान।

नहीं है जानकारी
मीडिया से ही मुझे कार्यकारी अधिकारी के निलंबन का पता चला है। यह पत्र सरकार की ओर से आया है। ऐसे में जिला स्तर पर इसका कोई संबंध नहीं है। -डॉ. आदित्य दहिया, डीसी।
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