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ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों को मजबूत बनाना जरूरी : रणधीर मताना
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15जेएनडी30: जल जीवन मिशन के तहत बरसाना गांव में समिति सदस्य से जानकारी लेते हुए रणधीर मताना। स्
- फोटो : सांकेतिक
जींद। जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने और जल संरक्षण अभियान को सफल बनाने के लिए ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। यह बात जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जिला सलाहकार रणधीर मताना ने दनोदा और गोबिंदपुरा गांव में ग्राम जल एवं सीवरेज समिति के सदस्यों से संवाद के दौरान कही।
उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन की ओर से चलाए जा रहे जल संरक्षण अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि समितियों के सदस्यों को नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता प्रदान करना आवश्यक है। इससे उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की बेहतर जानकारी मिलेगी और गांवों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
मताना ने कहा कि ग्राम जल एवं सीवरेज समितियां गांव स्तर पर जलापूर्ति और जल संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि समितियां सक्रिय और सशक्त होंगी तो पेयजल की उपलब्धता, रखरखाव और जल संरक्षण के कार्य अधिक प्रभावी तरीके से किए जा सकेंगे। उन्होंने वासो टीम और खंड समन्वयकों को जनसंपर्क अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके।
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खुले नलों पर टेप लगाकर पानी की बर्बादी रोका जा रहा
अभियान के तहत जिले के विभिन्न गांवों में अवैध पेयजल कनेक्शन काटे जा रहे हैं और खुले नलों पर टेप लगाकर पानी की बर्बादी रोकने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही लोगों को जरूरत के अनुसार पानी उपयोग करने और नल बंद रखने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में 16 सदस्यीय समिति गठित की गई
भविष्य में ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों की जिम्मेदारी और बढ़ेगी क्योंकि इन्हें ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव का दायित्व भी संभालना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में 16 सदस्यीय समिति गठित की गई हैं जिसमें सरपंच, पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर, महिला मंडल प्रतिनिधि, युवा संगठन सदस्य, पंप ऑपरेटर, तकनीकी कर्मचारी और अन्य सामाजिक प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
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उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग और जल एवं स्वच्छता सहायक संगठन की ओर से चलाए जा रहे जल संरक्षण अभियान की समीक्षा करते हुए कहा कि समितियों के सदस्यों को नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता प्रदान करना आवश्यक है। इससे उन्हें अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की बेहतर जानकारी मिलेगी और गांवों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
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मताना ने कहा कि ग्राम जल एवं सीवरेज समितियां गांव स्तर पर जलापूर्ति और जल संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। यदि समितियां सक्रिय और सशक्त होंगी तो पेयजल की उपलब्धता, रखरखाव और जल संरक्षण के कार्य अधिक प्रभावी तरीके से किए जा सकेंगे। उन्होंने वासो टीम और खंड समन्वयकों को जनसंपर्क अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीणों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके।
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खुले नलों पर टेप लगाकर पानी की बर्बादी रोका जा रहा
अभियान के तहत जिले के विभिन्न गांवों में अवैध पेयजल कनेक्शन काटे जा रहे हैं और खुले नलों पर टेप लगाकर पानी की बर्बादी रोकने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही लोगों को जरूरत के अनुसार पानी उपयोग करने और नल बंद रखने के लिए भी जागरूक किया जा रहा है।
प्रत्येक ग्राम पंचायत में 16 सदस्यीय समिति गठित की गई
भविष्य में ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों की जिम्मेदारी और बढ़ेगी क्योंकि इन्हें ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव का दायित्व भी संभालना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में 16 सदस्यीय समिति गठित की गई हैं जिसमें सरपंच, पंच, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर, महिला मंडल प्रतिनिधि, युवा संगठन सदस्य, पंप ऑपरेटर, तकनीकी कर्मचारी और अन्य सामाजिक प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।