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Jind News: उचाना मंडी में गेट पास के कमरे पर लटका ताला शौचालयों में पसरी गंदगी...यह है मंडियों का हाल
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23जेएनडी23, 24: उचाना मंडी में शौचालयों की हुई बदहाल हालात। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में एक अक्तूबर से पीआर धान की सरकारी खरीद शुरू होनी है लेकिन मंडियों में तैयारियां अभी तक अधूरी हैं। खरीद शुरू होने में अब सिर्फ आठ दिन शेष बचे हैं। मंगलवार को जिले की मंडियों में व्यवस्थाओं की पड़ताल की जिसमें कई खामियां सामने आईं। उचाना मंडी में गेट पास के कमरे पर ताला लटका मिला तो शौचालयों में गंदगी मिली।
जिलेभर की मंडियों में करीब 25 कर्मचारियों की जरूरत है लेकिन अभी तक कहीं भी स्टाफ नहीं भेजा गया है। सभी मंडियों की ओर से अपनी जरूरत के अनुसार कर्मचारियों की मांग भेजी जा चुकी है। इसके अलावा लोडिंग-अनलोडिंग के टेंडर भी अभी तक नहीं हुए हैं।
मार्केट कमेटी को फिलहाल केवल 10 कर्मचारियों की मंजूरी मिली है। नरवाना मंडी में 50 की जरूरत है। अभी तक कोई कर्मचारी नहीं मिला। मंडियों में धान की खरीद के लिए मशीनरी और बारदाने की व्यवस्था भी अभी तक नहीं पहुंची है।वहीं, धान खरीद के लिए मिलर्स भी तय नहीं हुए हैं।
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पिछले वर्ष जिले में 32 मिलर्स ने धान की खरीद की थी। उचाना की नई अनाज मंडी में तो व्यवस्थाओं की स्थिति और भी चिंताजनक नजर आ रही है। एक अक्तूबर से पीआर धान की खरीद शुरू होनी है लेकिन मंडी के शेड के नीचे अभी गेहूं के बैग रखे हुए हैं। केवल एक शेड खाली बचा है।
यदि गेहूं के बैग समय पर नहीं उठाए गए तो धान खुले में डालने की नौबत आ सकती है। इससे किसानों की फसल की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर परेशानी बढ़ सकती है।
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जींद। जिले में एक अक्तूबर से पीआर धान की सरकारी खरीद शुरू होनी है लेकिन मंडियों में तैयारियां अभी तक अधूरी हैं। खरीद शुरू होने में अब सिर्फ आठ दिन शेष बचे हैं। मंगलवार को जिले की मंडियों में व्यवस्थाओं की पड़ताल की जिसमें कई खामियां सामने आईं। उचाना मंडी में गेट पास के कमरे पर ताला लटका मिला तो शौचालयों में गंदगी मिली।
जिलेभर की मंडियों में करीब 25 कर्मचारियों की जरूरत है लेकिन अभी तक कहीं भी स्टाफ नहीं भेजा गया है। सभी मंडियों की ओर से अपनी जरूरत के अनुसार कर्मचारियों की मांग भेजी जा चुकी है। इसके अलावा लोडिंग-अनलोडिंग के टेंडर भी अभी तक नहीं हुए हैं।
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मार्केट कमेटी को फिलहाल केवल 10 कर्मचारियों की मंजूरी मिली है। नरवाना मंडी में 50 की जरूरत है। अभी तक कोई कर्मचारी नहीं मिला। मंडियों में धान की खरीद के लिए मशीनरी और बारदाने की व्यवस्था भी अभी तक नहीं पहुंची है।वहीं, धान खरीद के लिए मिलर्स भी तय नहीं हुए हैं।
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पिछले वर्ष जिले में 32 मिलर्स ने धान की खरीद की थी। उचाना की नई अनाज मंडी में तो व्यवस्थाओं की स्थिति और भी चिंताजनक नजर आ रही है। एक अक्तूबर से पीआर धान की खरीद शुरू होनी है लेकिन मंडी के शेड के नीचे अभी गेहूं के बैग रखे हुए हैं। केवल एक शेड खाली बचा है।
यदि गेहूं के बैग समय पर नहीं उठाए गए तो धान खुले में डालने की नौबत आ सकती है। इससे किसानों की फसल की सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर परेशानी बढ़ सकती है।

23जेएनडी23, 24: उचाना मंडी में शौचालयों की हुई बदहाल हालात। संवाद

23जेएनडी23, 24: उचाना मंडी में शौचालयों की हुई बदहाल हालात। संवाद

23जेएनडी23, 24: उचाना मंडी में शौचालयों की हुई बदहाल हालात। संवाद

23जेएनडी23, 24: उचाना मंडी में शौचालयों की हुई बदहाल हालात। संवाद