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Jind News: पिछले तीन साल में 500 लोगों ने नशा छोड़ जिंदगी को चुना
Fri, 31 May 2024 04:15 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Fri, 31 May 2024 04:15 AM IST
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30जेएनडी10 : लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए प्रेरित करते डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल। फाइ
सतीश जागलान
जींद। जिले के लोग नागरिक अस्पताल में तीन साल पहले खुले तंबाकू निवारण केंद्र का लाभ उठा रहे हैं। अब तक 500 लोग तंबाकू व जुर्दा छोड़ चुके हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के 650 पीयर एजुकेटर गांव-गांव व शहर की गली-गली जाकर लोगों को तंबाकू से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। वहीं, तंबाकू निवारण के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने हर गांव में दो-तीन लोग ऐसे तैयार कर दिए हैं, जो तंबाकू छोड़ने और नागरिक अस्पताल में इसकी दवाई कैसे मिले, इसके बारे में बता रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में मनोवैज्ञानिक डॉ. संकल्प तंबाकू छोड़ने के लिए आ रहे लोगों की काउंसिलिंग भी करते हैं और उनको इसके छोड़ने से होने वाले लाभ व इसके सेवन करने से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताते हैं। नागरिक अस्पताल में तंबाकू छोड़ने के लिए अलग से दवाई दी जाती हैं। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य किशोर कार्यक्रम के तहत बनाई गई 650 पीयर एजुकेटर की टीम के साथ काम करते हैं।
जो व्यक्ति तंबाकू या जर्दा छोड़ने की इच्छा रखता है तो उसको पूरी तरह से जागरूक किया जाता है। इसके बाद उसकी काउंसिलिंग की जाती है और वह व्यक्ति धीरे-धीरे तंबाकू छोड़ देता है।
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एक महीने में 14-15 लोग छोड़ रहे तंबाकू
नागरिक अस्पताल के तंबाकू निवारण केंद्र में हर महीने 14-15 लोग तंबाकू छोड़ने की इच्छा लेकर आते हैं। इनमें से लगभग 10 व्यक्ति तंबाकू छोड़ने में सफल भी हो जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार इसके लिए दृढ़ इच्छा शक्ति की जरूरत होती है। जो व्यक्ति यह ठान ले कि उसे तंबाकू छोड़ना है तो फिर उसे तंबाकू छोड़ने से कोई नहीं रोक सकता।
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कैंसर का मुख्य कारण
कैंसर होने का मुख्य कारण तंबाकू है। जिन लोगों को कैंसर होता है, उनमें 70 प्रतिशत लोगों को तंबाकू के कारण कैंसर होता है। जो लोग लगातार हुक्का, बीड़ी या किसी अन्य माध्यम से तंबाकू पीते हैं, उनको कैंसर होने का शत-प्रतिशत खतरा रहता है। जो लोग जर्दा खाते हैं, उनको मुंह या गले का कैंसर हो जाता है। जो हुक्का या किसी अन्य तरीके से तंबाकू लेते हैं, उनको ब्लड कैंसर, मुंह, गले या फिर आंत का कैंसर होता है। ऐसे लोगों के बचने की संभावना बहुत कम होती है और वह धीरे-धीरे मौत के आगोश में समा जाते हैं।
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तंबाकू एक जानलेवा नशा है। इससे कैंसर होता है। अब तक जिले के 500 लोग नागरिक अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण केंद्र में आकर तंबाकू छोड़ चुके हैं। किसी भी व्यक्ति को हुक्का या तंबाकू किसी अन्य तरीके से लेते हुए की पोस्ट नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को ज्यादा लोग फालो करते हैं, उनको तंबाकू को बढ़ावा देने की बजाय छोड़ने के लिए लोगाें को प्रेरित करना चाहिए।
-डॉ. रमेश पांचाल, डिप्टी सिविल सर्जन, तंबाकू निवारण केंद्र
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जींद। जिले के लोग नागरिक अस्पताल में तीन साल पहले खुले तंबाकू निवारण केंद्र का लाभ उठा रहे हैं। अब तक 500 लोग तंबाकू व जुर्दा छोड़ चुके हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के 650 पीयर एजुकेटर गांव-गांव व शहर की गली-गली जाकर लोगों को तंबाकू से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। वहीं, तंबाकू निवारण के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल ने हर गांव में दो-तीन लोग ऐसे तैयार कर दिए हैं, जो तंबाकू छोड़ने और नागरिक अस्पताल में इसकी दवाई कैसे मिले, इसके बारे में बता रहे हैं।
नागरिक अस्पताल में मनोवैज्ञानिक डॉ. संकल्प तंबाकू छोड़ने के लिए आ रहे लोगों की काउंसिलिंग भी करते हैं और उनको इसके छोड़ने से होने वाले लाभ व इसके सेवन करने से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताते हैं। नागरिक अस्पताल में तंबाकू छोड़ने के लिए अलग से दवाई दी जाती हैं। डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश पांचाल राष्ट्रीय स्वास्थ्य किशोर कार्यक्रम के तहत बनाई गई 650 पीयर एजुकेटर की टीम के साथ काम करते हैं।
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जो व्यक्ति तंबाकू या जर्दा छोड़ने की इच्छा रखता है तो उसको पूरी तरह से जागरूक किया जाता है। इसके बाद उसकी काउंसिलिंग की जाती है और वह व्यक्ति धीरे-धीरे तंबाकू छोड़ देता है।
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एक महीने में 14-15 लोग छोड़ रहे तंबाकू
नागरिक अस्पताल के तंबाकू निवारण केंद्र में हर महीने 14-15 लोग तंबाकू छोड़ने की इच्छा लेकर आते हैं। इनमें से लगभग 10 व्यक्ति तंबाकू छोड़ने में सफल भी हो जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार इसके लिए दृढ़ इच्छा शक्ति की जरूरत होती है। जो व्यक्ति यह ठान ले कि उसे तंबाकू छोड़ना है तो फिर उसे तंबाकू छोड़ने से कोई नहीं रोक सकता।
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कैंसर का मुख्य कारण
कैंसर होने का मुख्य कारण तंबाकू है। जिन लोगों को कैंसर होता है, उनमें 70 प्रतिशत लोगों को तंबाकू के कारण कैंसर होता है। जो लोग लगातार हुक्का, बीड़ी या किसी अन्य माध्यम से तंबाकू पीते हैं, उनको कैंसर होने का शत-प्रतिशत खतरा रहता है। जो लोग जर्दा खाते हैं, उनको मुंह या गले का कैंसर हो जाता है। जो हुक्का या किसी अन्य तरीके से तंबाकू लेते हैं, उनको ब्लड कैंसर, मुंह, गले या फिर आंत का कैंसर होता है। ऐसे लोगों के बचने की संभावना बहुत कम होती है और वह धीरे-धीरे मौत के आगोश में समा जाते हैं।
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तंबाकू एक जानलेवा नशा है। इससे कैंसर होता है। अब तक जिले के 500 लोग नागरिक अस्पताल के तंबाकू नियंत्रण केंद्र में आकर तंबाकू छोड़ चुके हैं। किसी भी व्यक्ति को हुक्का या तंबाकू किसी अन्य तरीके से लेते हुए की पोस्ट नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा जिन लोगों को ज्यादा लोग फालो करते हैं, उनको तंबाकू को बढ़ावा देने की बजाय छोड़ने के लिए लोगाें को प्रेरित करना चाहिए।
-डॉ. रमेश पांचाल, डिप्टी सिविल सर्जन, तंबाकू निवारण केंद्र