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Jind News: जिला अस्पताल में आईसीयू और ऑक्सीजन प्लांट बंद मिले
Tue, 11 Apr 2023 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Tue, 11 Apr 2023 12:20 AM IST
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जींद। नागरिक अस्पताल में सोमवार को कोरोना को लेकर मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें सब कुछ तैयार नजर आया। चिकित्सक से लेकर कर्मचारी, इमरजेंसी वार्ड से लेकर कोरोना वार्ड व एंबुलेंस भी पूरी तरह से तैयार मिली। हालांकि आमदिनों में अस्पताल में ऐसा कोई नजारा नहीं मिलता, लेकिन यदि वास्तव में प्रतिदिन ऐसी व्यवस्था हो तो स्वास्थ्य विभाग लोगों के लिए वरदान साबित हो सकता है। इसमें सबसे बड़ी खामी यह रही कि यहां पर आईसीयू व ऑक्सीजन प्लांट केवल दिखावे के लिए खड़े हैं। न तो आईसीयू चल रहा है और न ही ऑक्सीजन प्लांट, जिनकी कोरोना में सख्त जरूरत होती है। इसके अलावा शारीरिक दूरी से संबंधित नियम यहां केवल हवा-हवाई साबित हुए।
मॉकड्रिल सुबह दस बजकर 35 मिनट पर शुरू हुई। इसमें एक के बाद एक चार एंबुलेंस आती हैं और मरीजों को तुरंत स्ट्रेचर से उपचार के लिए नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया जाता है। यहां नागरिक अस्पताल के एमएस डॉ. अरविंद, डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला, डॉ. संतलाल, डॉ. विजेंद्र घणघस, डॉ. प्रदीप व अन्य स्वास्थ्यकर्मी पहले से ही तैयार हैं। बाकायदा स्वास्थ्यकर्मी पीपी किट भी पहने हुए दिखे, जो अमूमन देखने को नहीं मिलती है। जैसे ही एक के बाद एक मरीज आते हैं तो उन्हें उपचार देने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मौके पर मौजूद लोग यह कहते हैं कि सच में अगर इमरजेंसी में आने वाले मरीज को इतनी तेज सुविधा मिले तो कई लोगों की जान बच जाए। डीसी डॉ. मनोज कुमार का इंतजार किया गया लेकिन वो पहुंच नहीं सके। वहीं डॉक्टर, स्टाफ नर्स, सफाईकर्मी, वार्ड ब्वाय समेत अन्य कर्मियों को अपनी-अपनी जगह पर तैनात कर दिया गया था। वहीं दवाइयां, स्ट्रेचर, ट्रॉली व अन्य जरूरी चीजों को भी अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के बाहर उनकी सही जगह पर रख दिया गया था। अस्पताल के बाहर स्ट्रेचर पर चादर डाल दी गई थी। जो आम दिनों में नहीं होती। मॉक ड्रिल के चलते अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर व ट्रॉली को यथावत रखा गया। मॉक ड्रिल के दौरान मरीज के आने पर इन्हीं पर डाल कर उनको इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया। एक मरीज तो खुद एंबुलेंस से उठकर स्ट्रेचर पर लेट गया, जिसने सबको हंसने पर मजबूर कर दिया।
एंबुलेंस विभाग की भूमिका पर भी नजर
मॉक ड्रिल के दौरान एंबुलेंस विभाग की भूमिका भी देखी गई। यह देखा गया कि कैसे गंभीर स्थिति में मरीज को कितनी जल्दी अस्पताल में लाया जा सकता है। अगर एंबुलेंस अस्पताल के मुख्य गेट पर खड़ी होती है तो वहां रास्ता तो बाधित नहीं होता है। एंबुलेंस में साथ रहने वाला ईएमटी कैसे मरीज की मदद करता है। सबका लेखा-जोखा तैयार किया गया।
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बॉक्स
पिछले एक माह से खराब है अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट
नागरिक अस्पतालों में पिछले एक माह से ऑक्सीजन प्लांट खराब है। बजट नहीं आने के चलते प्लांट ठीक नहीं हो पा रहा है। ऑक्सीजन सिलिंडरों से काम चलाया जा रहा है। हालांकि मॉक ड्रिल को देखते हुए प्लांट की सफाई करवाई गई। यहां झाडू लगवाया गया। इसके बाद वार्डों में बने ऑक्सीजन के प्वाइंटों को देखा गया और ऑक्सीजन कंस्टेटर और सिलिंडर की आवश्यकता और प्रयोग को देखा गया।
मरीजों की देखभाल की जानकारी दी जाएगी
ऑक्सीजन संबंधित व्यवस्था के बाद आइसोलेशन तथा आईसीयू वार्ड में कोरोना संक्रमित मरीज की देखभाल के बारे में जानकारी दी गई। यह भी बताया गया कि यदि कोई मरीज की हालत गंभीर हो जाती है उसे कैसे दाखिल किया जाए और उपचार दिया जाएगा। यहां स्टाफ के कार्य की गहनता से जांच की गई। इस दौरान कुछ चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ के संशय को भी दूर किया गया।
मॉक ड्रिल का ब्योरा
1. नागरिक अस्पताल में मौजूद 200 बेड
2. अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्टेड (ओटू) आईसोलेशन बेड 40 हैं।
3. 10 बेड का आईसीयू है, लेकिन काम नहीं कर रहा है।
4. अस्पताल में 30 वेंटिलेटर्स हैं, जो सभी काम करते हुए पाए गए।
5. नागरिक अस्पताल में 35 एलोपैथी चिकित्सक हैं और पांच एनएचएम के तहत कार्यरत हैं।
6. अस्पताल में कुल 103 नर्स हैं, जिनमें 78 रेग्यूलर हैं और 25 एनएचएम के तहत कार्यरत हैं।
7. अस्पताल के पास 6 बीएलसएस एंबुलेंस हैं जिनमें से पांच काम कर रही हैं।
8. अस्तपाल के पास 6 एएलएस एंबुलेंस हैं जिनमें से तीन काम कर रही हैं।
9. जींद स्वास्थ्य विभाग के पास कोरोना जांच के लिए 700 वीटीएम वॉयल हैं। इसके अलावा दवाओं का मात्रा में स्टॉक है। टेली मेडिसन की सुविधा भी मरीजों को लगातार दी जा रही है।
कोट
मॉकड्रिल का आयोजन करवाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि यदि कोई भी आपातकालीन स्थिति आती है तो उससे निपटने के लिए हम तैयार रहें। हमें इस स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि स्थिति से किस प्रकार निपटा जा सकता है इसके लिए कार्य करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।
-- डॉ. मंजू कादियान, सिविल सर्जन
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मॉकड्रिल सुबह दस बजकर 35 मिनट पर शुरू हुई। इसमें एक के बाद एक चार एंबुलेंस आती हैं और मरीजों को तुरंत स्ट्रेचर से उपचार के लिए नागरिक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया जाता है। यहां नागरिक अस्पताल के एमएस डॉ. अरविंद, डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला, डॉ. संतलाल, डॉ. विजेंद्र घणघस, डॉ. प्रदीप व अन्य स्वास्थ्यकर्मी पहले से ही तैयार हैं। बाकायदा स्वास्थ्यकर्मी पीपी किट भी पहने हुए दिखे, जो अमूमन देखने को नहीं मिलती है। जैसे ही एक के बाद एक मरीज आते हैं तो उन्हें उपचार देने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मौके पर मौजूद लोग यह कहते हैं कि सच में अगर इमरजेंसी में आने वाले मरीज को इतनी तेज सुविधा मिले तो कई लोगों की जान बच जाए। डीसी डॉ. मनोज कुमार का इंतजार किया गया लेकिन वो पहुंच नहीं सके। वहीं डॉक्टर, स्टाफ नर्स, सफाईकर्मी, वार्ड ब्वाय समेत अन्य कर्मियों को अपनी-अपनी जगह पर तैनात कर दिया गया था। वहीं दवाइयां, स्ट्रेचर, ट्रॉली व अन्य जरूरी चीजों को भी अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के बाहर उनकी सही जगह पर रख दिया गया था। अस्पताल के बाहर स्ट्रेचर पर चादर डाल दी गई थी। जो आम दिनों में नहीं होती। मॉक ड्रिल के चलते अस्पताल की इमरजेंसी में स्ट्रेचर व ट्रॉली को यथावत रखा गया। मॉक ड्रिल के दौरान मरीज के आने पर इन्हीं पर डाल कर उनको इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया। एक मरीज तो खुद एंबुलेंस से उठकर स्ट्रेचर पर लेट गया, जिसने सबको हंसने पर मजबूर कर दिया।
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एंबुलेंस विभाग की भूमिका पर भी नजर
मॉक ड्रिल के दौरान एंबुलेंस विभाग की भूमिका भी देखी गई। यह देखा गया कि कैसे गंभीर स्थिति में मरीज को कितनी जल्दी अस्पताल में लाया जा सकता है। अगर एंबुलेंस अस्पताल के मुख्य गेट पर खड़ी होती है तो वहां रास्ता तो बाधित नहीं होता है। एंबुलेंस में साथ रहने वाला ईएमटी कैसे मरीज की मदद करता है। सबका लेखा-जोखा तैयार किया गया।
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पिछले एक माह से खराब है अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट
नागरिक अस्पतालों में पिछले एक माह से ऑक्सीजन प्लांट खराब है। बजट नहीं आने के चलते प्लांट ठीक नहीं हो पा रहा है। ऑक्सीजन सिलिंडरों से काम चलाया जा रहा है। हालांकि मॉक ड्रिल को देखते हुए प्लांट की सफाई करवाई गई। यहां झाडू लगवाया गया। इसके बाद वार्डों में बने ऑक्सीजन के प्वाइंटों को देखा गया और ऑक्सीजन कंस्टेटर और सिलिंडर की आवश्यकता और प्रयोग को देखा गया।
मरीजों की देखभाल की जानकारी दी जाएगी
ऑक्सीजन संबंधित व्यवस्था के बाद आइसोलेशन तथा आईसीयू वार्ड में कोरोना संक्रमित मरीज की देखभाल के बारे में जानकारी दी गई। यह भी बताया गया कि यदि कोई मरीज की हालत गंभीर हो जाती है उसे कैसे दाखिल किया जाए और उपचार दिया जाएगा। यहां स्टाफ के कार्य की गहनता से जांच की गई। इस दौरान कुछ चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ के संशय को भी दूर किया गया।
मॉक ड्रिल का ब्योरा
1. नागरिक अस्पताल में मौजूद 200 बेड
2. अस्पताल में ऑक्सीजन सपोर्टेड (ओटू) आईसोलेशन बेड 40 हैं।
3. 10 बेड का आईसीयू है, लेकिन काम नहीं कर रहा है।
4. अस्पताल में 30 वेंटिलेटर्स हैं, जो सभी काम करते हुए पाए गए।
5. नागरिक अस्पताल में 35 एलोपैथी चिकित्सक हैं और पांच एनएचएम के तहत कार्यरत हैं।
6. अस्पताल में कुल 103 नर्स हैं, जिनमें 78 रेग्यूलर हैं और 25 एनएचएम के तहत कार्यरत हैं।
7. अस्पताल के पास 6 बीएलसएस एंबुलेंस हैं जिनमें से पांच काम कर रही हैं।
8. अस्तपाल के पास 6 एएलएस एंबुलेंस हैं जिनमें से तीन काम कर रही हैं।
9. जींद स्वास्थ्य विभाग के पास कोरोना जांच के लिए 700 वीटीएम वॉयल हैं। इसके अलावा दवाओं का मात्रा में स्टॉक है। टेली मेडिसन की सुविधा भी मरीजों को लगातार दी जा रही है।
कोट
मॉकड्रिल का आयोजन करवाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि यदि कोई भी आपातकालीन स्थिति आती है तो उससे निपटने के लिए हम तैयार रहें। हमें इस स्थिति में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि स्थिति से किस प्रकार निपटा जा सकता है इसके लिए कार्य करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।