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हिसार में किसानों पर हुए बल प्रयोग के विरोध में दस से अधिक जगह पर लगाया जाम

Sun, 16 May 2021 09:58 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 16 May 2021 09:58 PM IST
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hisar farmer protest 13 village
हिसार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल के कार्यक्रम के दौरान किसानों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने पर जिले के किसान आक्रोशित हो गए। किसानों ने मनोहरपुर, रामराय, राजपुरा, गतौली, कंडेला, शाहपुर, जलालपुरकलां, खटकड़, बद्दोवाल, राजपुरा, दनौदा, सफीदों, नगुरा सहित अन्य जगहों पर जाम लगाकर विरोध जताया।
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अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य प्रधान फूल सिंह श्योकंद, जिला प्रधान रोहताश नगूरां, सीटू के राज्य उपाध्यक्ष रमेश चंद्र, जिला सचिव कपूर सिंह, भवन निर्माण कामगार यूनियन हरियाणा के जिला प्रधान कश्मीर सिंह सेलवाल, कैशियर संदीप जाजवान, अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राज्य कमेटी उपाध्यक्ष प्रकाश चंद्र व रोडवेज वर्कर यूनियन इंटक के राज्य उपमहासचिव संदीप रंगा, किसान नेता नरेश ढांडा व भाकियू जिला प्रेस प्रवक्ता रामराजी ढुल ने कहा कि देश व प्रदेश की सरकार लगातार किसानों के ऊपर पुलिस से बल प्रयोग करवा रही है। किसानों ने भाजपा व जजपा के मंत्रियों व विधायकों का बहिष्कार किया हुआ है। फिर भी प्रदेश सरकार जानबूझ कर किसानों को उकसाने के लिए अपने कार्यक्रम कर रही हैं और माहौल बिगाड़ रही है। किसान अपने लोकतांत्रिक अधिकार के तहत मुख्यमंत्री मनोहरलाल का काले झंडे लेकर हिसार में विरोध करने पहुंचे थे, लेकिन इस दौरान किसानों पर वहां की पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, पत्थरबाजी की तथा बल का प्रयोग किया गया। इससे बहुत से किसानों को गंभीर चोटें आई हैं।
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उन्होंने कहा कि किसानों को कोई शौक नहीं है अपनी जान को जोखिम में डालकर विरोध करने का, लेकिन केंद्र सरकार ने किसानों के लिए कृषि कानून बना दिए हैं। इस कारण किसानों को अपनी जमीन छिने जाने का डर है। यह कानून कोरोना से भी खतरनाक हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इन कानूनों की पैरवी करते रहते हैं। दूसरी ओर किसानों को बदनाम करने के लिए मुख्यमंत्री कोरोना के बढ़ने का कारण किसानों को बता रहे हैं, जिस कारण किसानों में मुख्यमंत्री के खिलाफ गुस्सा भी है। प्रदेश सरकार किसानों पर किए गए बल प्रयोग, पत्थरबाजी तथा आंसू गैस छोड़ने की किसानों से माफी मांगें। किसान पिछले छह माह से आंदोलनरत हैं। किसान केवल यह चाहते हैं कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। इसलिए किसान विरोध कर रहे हैं। रविवार को भी किसान शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करवा रहे थे, परंतु उनपर पुलिस बल, आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं। आज प्रदेश की जनता एक तरफ इन गलत नीतियों से लड़ रही है दूसरी तरफ महामारी से। वहीं मुख्यमंत्री वाहवाही लूटने के लिए उद्घाटन के ड्रामे कर रहे हैं। ऐसे समय पर उद्घाटन का क्या औचित्य है, यह समझ से परे है। अगर वह सच में ही जन हितैषी हैं तो कृषि कानूनों को वापस लिया जाए।
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