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हीमोफीलिया आनुवांशिक बीमारी : डॉ. गोपाल
Sat, 27 Apr 2024 02:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
Updated Sat, 27 Apr 2024 02:02 AM IST
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26जेएनडी04: बच्चे को स्पोर्टिव मेडिकल किट देते हुए सीएमओ डॉ. गोपाल गोयल व अन्य। संवाद
जींद। जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में शुक्रवार को विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीएमओ डॉ. गोपाल गोयल ने की, जबकि पीएमओ डॉ. जितेंद्र कादियान, डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला, डॉ. पालेराम कटारिया, डॉ. अरविंद, डॉ. शिप्रा, हीमोफीलिया सोसाइटी से आशुतोष मौजूद रहे। इस दौरान आमजन को जागरूक करने के साथ किट वितरित की गई।
सीएमओ ने कहा कि विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाने का उद्देश्य लोग को इस बीमारी के बारे में जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि हीमोफिलिया में खून बहना बंद नहीं होता है। इससे जान जाने का खतरा रहता है। यह बीमारी आनुवांशिक होती है, यानी माता-पिता में से किसी को यह बीमारी होती है। पीएमओ डॉ. जितेंद्र कादियान ने कहा कि एक समय हीमोफिलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब बीमारी की गंभीरता कम है तो दवाइयों से इलाज हो सकता है। अगर माता-पिता को यह बीमारी है तो बच्चे में आने की संभावना होती है। ऐसे में पहले ही इसकी जांच कर ली जाती है।
डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने कहा कि सिर में बहुत तेज दर्द होना, बार-बार उल्टी आना, गर्दन में दर्द होना, धुंधला या दोहरा दिखना, बहुत ज्यादा नींद आना, चोट लगने पर लगातार खून बहना इसके लक्षण हैं। डॉ. शिप्रा ने कहा कि हीमोफिलिया दो तरह का होता है। हीमोफिलिया ए में फैक्टर आठ की कमी होती और हीमोफिलिया बी में घटक 9 की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं। ये एक दुर्लभ बीमारी है। एक समय तक हीमोफिलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब घटकों की कमी होने पर इन्हें बाहर से इंजेक्शन के जरिये डाला जा सकता है। इस अवसर पर नर्सिंग स्टाफ फार्मासिस्ट सुभाष, संजय परमार, नवीन कुमार मौजूद थे।
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सीएमओ ने कहा कि विश्व हीमोफीलिया दिवस मनाने का उद्देश्य लोग को इस बीमारी के बारे में जानकारी देना है। उन्होंने कहा कि हीमोफिलिया में खून बहना बंद नहीं होता है। इससे जान जाने का खतरा रहता है। यह बीमारी आनुवांशिक होती है, यानी माता-पिता में से किसी को यह बीमारी होती है। पीएमओ डॉ. जितेंद्र कादियान ने कहा कि एक समय हीमोफिलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब बीमारी की गंभीरता कम है तो दवाइयों से इलाज हो सकता है। अगर माता-पिता को यह बीमारी है तो बच्चे में आने की संभावना होती है। ऐसे में पहले ही इसकी जांच कर ली जाती है।
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डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने कहा कि सिर में बहुत तेज दर्द होना, बार-बार उल्टी आना, गर्दन में दर्द होना, धुंधला या दोहरा दिखना, बहुत ज्यादा नींद आना, चोट लगने पर लगातार खून बहना इसके लक्षण हैं। डॉ. शिप्रा ने कहा कि हीमोफिलिया दो तरह का होता है। हीमोफिलिया ए में फैक्टर आठ की कमी होती और हीमोफिलिया बी में घटक 9 की कमी होती है। दोनों ही खून में थक्का बनाने के लिए जरूरी हैं। ये एक दुर्लभ बीमारी है। एक समय तक हीमोफिलिया का इलाज मुश्किल था, लेकिन अब घटकों की कमी होने पर इन्हें बाहर से इंजेक्शन के जरिये डाला जा सकता है। इस अवसर पर नर्सिंग स्टाफ फार्मासिस्ट सुभाष, संजय परमार, नवीन कुमार मौजूद थे।

26जेएनडी04: बच्चे को स्पोर्टिव मेडिकल किट देते हुए सीएमओ डॉ. गोपाल गोयल व अन्य। संवाद
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