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शहर में जगह-जगह मिले कूड़े के ढेर, गीला सूखा कूड़ा भी नहीं किया जा रहा अलग,
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शहर की सफाई के लिए यूं तो लाख दावे किए जा रहे हों लेकिन शहरी स्थानीय निकाय विभाग की टीम द्वारा बुधवार को सफाई व्यवस्था की जांच की तो व्यवस्थाओं की कलई खुल गई। निरीक्षण के दौरान जांच दल को जगह-जगह खामियां मिली। शहर में कूड़े के ढेरों ने जहां टीम का स्वागत किया वहीं नियमानुसार सूखे और गीले कूड़े की छंटाई भी नहीं मिली। इसके अलावा हांसी रोड पर जहां कूड़ा डाला जाता है वहां आग लगी मिली। इससे जांच दल ने व्यवस्थाओं पर असंतोष जताया। वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण से पहले इस प्रकार की खामी उजागर हुई है।
जांच करने पहुंची टीम ने सफाई व्यवस्था पर असंतोष जताया। हांसी रोड स्थित कूड़े के ढेर में आग भी लगी हुई मिली जिससे धुआं निकल रहा था। मौके पर ही आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की टीम को बुलाया गया। बुधवार को अंबाला नगर निगम के चीफ इंजीनियर महिपाल के नेतृत्व में पहुंची टीम ने शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान लोगों से भी सफाई के बार में जानकारी ली गई। चीफ इंजीनियर महीपाल ने बताया कि पूरे राज्य में ही निरीक्षण किया जा रहा है। अलग-अलग टीम में जांच कर रही हैं। इसमें पता किया जा रहा है कि कैसे सफाई हो रही है, उसमें क्या कमियां हैं, ये देख रहे हैं। जींद शहर में निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली है। काफी कमियां हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। घरों से गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग कर कलेक्शन सेंटर पर ले जाना होता है लेकिन शहर में गीला व सूखे कूड़े की छंटाई नहीं हो रही है। इसमें शहरवासियों की सबसे अहम भूमिका रहती है। रसोई से निकलने वाले सब्जियां व अन्य गीले कूड़े को घर के बाकी सूखे कूड़े के साथ ना मिलाएं। सूखे व गीले कूड़े के लिए अलग-अलग कूड़ेदान रखें। तभी शहर में सफाई का उद्देश्य पूरा हो पाएगा। सरकार चाहती है कि शहर साफ-सुथरा रहे, लोगों को स्वच्छ वातावरण मिले। इसके लिए प्रशासन के साथ आमजन को भी सहयोग करना होगा।
छह साल में दस गुणा से अधिक हुआ सफाई का ठेका, सफाई व्यवस्था का भट्ठा बैठा
जांच के दौरान टीम जींद सुधार के संयोजक सुनील वशिष्ठ ने भी अधिकारियों से मुलाकात की। वशिष्ठ ने कहा कि शहर में छह साल पहले 2016 में महज सात लाख रुपये में महीना में साफाई होती थी। अब यह 70 लाख रुपये महीने से अधिक हो चुका है लेकिन सफाई में कोई सुधार नहीं हो रहा है। उल्टा सफाई व्यवस्था का भट्ठा बैठ गया है। ठेके के अलावा नगरपरिषद के 213 सफाई कर्मचारी भी सफाई में तैनात हैं। वहीं मुख्य सड़कों पर मशीन से सफाई हो रही है।
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हड़ताल के चलते भी चरमराई व्यवस्था
वहीं कर्मचारी संगठनों की 28 व 29 मार्च हड़ताल के कारण भी व्यवस्था चरमरा गई है। इसके चलते शहर में सफाई व्यवस्था और भी खराब नजर आई। हड़ताल के चलते ठेकेदार के सफाई कर्मचारी भी काम पर नहीं आए। ऐसे में 28 मार्च को नगर परिषद मुख्य सफाई निरीक्षक द्वारा ठेकेदार को नोटिस जारी किया था कि कूड़ा उठवाएं, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी और बिल के अंदर जुर्माना राशि की कटौती करके पेमेंट की अदायगी की जाएगी।
बुधवार को जींद शहर में सफाई का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सफाई व्यवस्था असंतोषजनक मिली। इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी। शहर में सफाई से लेकर कूड़ा छंटाई व डंपिंग साइट पर भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
-महिपाल, चीफ इंजीनियर, नगर निगम, अंबाला।
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जांच करने पहुंची टीम ने सफाई व्यवस्था पर असंतोष जताया। हांसी रोड स्थित कूड़े के ढेर में आग भी लगी हुई मिली जिससे धुआं निकल रहा था। मौके पर ही आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की टीम को बुलाया गया। बुधवार को अंबाला नगर निगम के चीफ इंजीनियर महिपाल के नेतृत्व में पहुंची टीम ने शहर की सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान लोगों से भी सफाई के बार में जानकारी ली गई। चीफ इंजीनियर महीपाल ने बताया कि पूरे राज्य में ही निरीक्षण किया जा रहा है। अलग-अलग टीम में जांच कर रही हैं। इसमें पता किया जा रहा है कि कैसे सफाई हो रही है, उसमें क्या कमियां हैं, ये देख रहे हैं। जींद शहर में निरीक्षण के दौरान सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली है। काफी कमियां हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। घरों से गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग कर कलेक्शन सेंटर पर ले जाना होता है लेकिन शहर में गीला व सूखे कूड़े की छंटाई नहीं हो रही है। इसमें शहरवासियों की सबसे अहम भूमिका रहती है। रसोई से निकलने वाले सब्जियां व अन्य गीले कूड़े को घर के बाकी सूखे कूड़े के साथ ना मिलाएं। सूखे व गीले कूड़े के लिए अलग-अलग कूड़ेदान रखें। तभी शहर में सफाई का उद्देश्य पूरा हो पाएगा। सरकार चाहती है कि शहर साफ-सुथरा रहे, लोगों को स्वच्छ वातावरण मिले। इसके लिए प्रशासन के साथ आमजन को भी सहयोग करना होगा।
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छह साल में दस गुणा से अधिक हुआ सफाई का ठेका, सफाई व्यवस्था का भट्ठा बैठा
जांच के दौरान टीम जींद सुधार के संयोजक सुनील वशिष्ठ ने भी अधिकारियों से मुलाकात की। वशिष्ठ ने कहा कि शहर में छह साल पहले 2016 में महज सात लाख रुपये में महीना में साफाई होती थी। अब यह 70 लाख रुपये महीने से अधिक हो चुका है लेकिन सफाई में कोई सुधार नहीं हो रहा है। उल्टा सफाई व्यवस्था का भट्ठा बैठ गया है। ठेके के अलावा नगरपरिषद के 213 सफाई कर्मचारी भी सफाई में तैनात हैं। वहीं मुख्य सड़कों पर मशीन से सफाई हो रही है।
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हड़ताल के चलते भी चरमराई व्यवस्था
वहीं कर्मचारी संगठनों की 28 व 29 मार्च हड़ताल के कारण भी व्यवस्था चरमरा गई है। इसके चलते शहर में सफाई व्यवस्था और भी खराब नजर आई। हड़ताल के चलते ठेकेदार के सफाई कर्मचारी भी काम पर नहीं आए। ऐसे में 28 मार्च को नगर परिषद मुख्य सफाई निरीक्षक द्वारा ठेकेदार को नोटिस जारी किया था कि कूड़ा उठवाएं, नहीं तो कार्रवाई की जाएगी और बिल के अंदर जुर्माना राशि की कटौती करके पेमेंट की अदायगी की जाएगी।
बुधवार को जींद शहर में सफाई का निरीक्षण किया गया। इस दौरान सफाई व्यवस्था असंतोषजनक मिली। इसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी। शहर में सफाई से लेकर कूड़ा छंटाई व डंपिंग साइट पर भी नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
-महिपाल, चीफ इंजीनियर, नगर निगम, अंबाला।