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पलवल में सात बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
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पीएमओ डॉ. अनिल बिरला। संवाद
- फोटो : Jind
पलवल जिले के चिल्ली और चिल्ला गांवों में सात बच्चों की मौत होने के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है। प्रारंभिक जांच में इन बच्चों को निमोनिया होने तथा दूषित पानी पीने को मौत का कारण माना जा रहा है। वहीं नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 150 बच्चों की ओपीडी होती है। इनमें से 50 प्रतिशत बच्चों में निमोनिया की शिकायत होती है। इसको लेकर पीएमओ डॉ. अनिल बिरला ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही सामने आई तो वह बर्दास्त नहीं करेंगे।
फिलहाल पूरे देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। यह लहर बच्चों के लिए खतरनाक साबित होने की आशंका है। कोरोना होने पर मरीज को निमोनिया हो जाता है। जिससे उसके फेफड़े जवाब दे जाते हैं और उसकी मौत हो जाती है। पलवल में भी सात बच्चों की मौत का कारण निमोनिया होना बताया जा रहा है। हालांकि इनको कोरोना होने की बात से स्वास्थ्य विभाग मना कर रहा है। इसके बावजूद पीएमओ डॉ. अनिल बिरला ने अपने मातहत सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करें। यदि बच्चे को बुखार है तो उसकी जांच करवाकर पता लगाएं कि कहीं उसको निमोनिया तो नहीं हो गया है। नागरिक अस्पताल में फिलहाल दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। दोनों ही बाल रोग विशेषज्ञ को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं ताकि उनको किसी भी समय अस्पताल में बुलाया जा सके। डॉ. अनिल बिरला ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वह अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें उबाल कर पानी पिलाएं। इसके अलावा बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
बच्चों को क्यों होता है निमोनिया
बैक्टीरिया, वायरस या केमिकल प्रदूषण की वजह से फेफड़ों में सूजन को निमोनिया कहा जाता है। यह एक गंभीर इंफेक्शन या सूजन होती है जिसमें हवा की थैली में पस और अन्य तरल पदार्थ भर जाता है। इससे सांस लेने में परेशानी होती है।
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लक्षण
सूखी खांसी, हल्का बुखार, सिरदर्द और थकान होने जैसे निमोनिया के लक्षण हैं। हलकी कंपकंपी भी निमोनिया का ही लक्षण है। बच्चों को इससे सांस लेने में भी परेशानी होती है। कई बार उल्टी या दस्त भी हो जाते हैं। निमोनिया एक संक्रामक बीमारी है, जो खांसने, छींकने, छूने यहां तक की सांस के जरिये भी फैलती है।
पहले की बजाय बढ़ रहे निमोनिया के मामले
बाल रोग विशेषज्ञ एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रघुबीर सिंह पूनिया ने कहा कि इस समय नागरिक अस्पताल में 150 के आसपास बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से बच्चों में निमोनिया की शिकायत अधिक मिल रही है। पहले औसतन 20 से 25 बच्चे निमोनिया से पीड़ित मिलते थे लेकिन इस समय इनकी संख्या बढ़कर 70 के आसपास पहुंच गई है। डॉ. पूनिया ने कहा कि बच्चों को ठंडी वस्तुओं से दूर रखना चाहिए। शाम के समय बच्चों की छाती की गर्म रूई के साथ सिकाई करनी चाहिए। यदि बुखार हो तो तुरंत उसे चिकित्सक को दिखाएं।
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फिलहाल पूरे देश में कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। यह लहर बच्चों के लिए खतरनाक साबित होने की आशंका है। कोरोना होने पर मरीज को निमोनिया हो जाता है। जिससे उसके फेफड़े जवाब दे जाते हैं और उसकी मौत हो जाती है। पलवल में भी सात बच्चों की मौत का कारण निमोनिया होना बताया जा रहा है। हालांकि इनको कोरोना होने की बात से स्वास्थ्य विभाग मना कर रहा है। इसके बावजूद पीएमओ डॉ. अनिल बिरला ने अपने मातहत सभी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करें। यदि बच्चे को बुखार है तो उसकी जांच करवाकर पता लगाएं कि कहीं उसको निमोनिया तो नहीं हो गया है। नागरिक अस्पताल में फिलहाल दो बाल रोग विशेषज्ञ हैं। दोनों ही बाल रोग विशेषज्ञ को 24 घंटे अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं ताकि उनको किसी भी समय अस्पताल में बुलाया जा सके। डॉ. अनिल बिरला ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वह अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें और उन्हें उबाल कर पानी पिलाएं। इसके अलावा बुखार होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
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बच्चों को क्यों होता है निमोनिया
बैक्टीरिया, वायरस या केमिकल प्रदूषण की वजह से फेफड़ों में सूजन को निमोनिया कहा जाता है। यह एक गंभीर इंफेक्शन या सूजन होती है जिसमें हवा की थैली में पस और अन्य तरल पदार्थ भर जाता है। इससे सांस लेने में परेशानी होती है।
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लक्षण
सूखी खांसी, हल्का बुखार, सिरदर्द और थकान होने जैसे निमोनिया के लक्षण हैं। हलकी कंपकंपी भी निमोनिया का ही लक्षण है। बच्चों को इससे सांस लेने में भी परेशानी होती है। कई बार उल्टी या दस्त भी हो जाते हैं। निमोनिया एक संक्रामक बीमारी है, जो खांसने, छींकने, छूने यहां तक की सांस के जरिये भी फैलती है।
पहले की बजाय बढ़ रहे निमोनिया के मामले
बाल रोग विशेषज्ञ एवं डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रघुबीर सिंह पूनिया ने कहा कि इस समय नागरिक अस्पताल में 150 के आसपास बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से बच्चों में निमोनिया की शिकायत अधिक मिल रही है। पहले औसतन 20 से 25 बच्चे निमोनिया से पीड़ित मिलते थे लेकिन इस समय इनकी संख्या बढ़कर 70 के आसपास पहुंच गई है। डॉ. पूनिया ने कहा कि बच्चों को ठंडी वस्तुओं से दूर रखना चाहिए। शाम के समय बच्चों की छाती की गर्म रूई के साथ सिकाई करनी चाहिए। यदि बुखार हो तो तुरंत उसे चिकित्सक को दिखाएं।

नागरिक अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़। संवाद- फोटो : Jind